मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह पर उठे सवाल, दंपतियों ने नहीं निभाई रस्में, बिन मांग बिन फेरे हुई सैकड़ों जोड़ों की शादी

अधिकारियों की मौजूदगी में दंपति रस्मों को नजरअंदाज कर खड़े रहे, फिर भी उन्हें शादी का प्रमाणपत्र दे दिया गया। ऐसे में दंपतियों की पात्रता पर भी सवाल खड़े किए गए।

By: suchita mishra

Published: 19 Jan 2019, 04:47 PM IST

एटा। एटा महोत्सव के तहत आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में अनोखी शादी देखने को मिली। शादी में मौजूद ज्यादातर दंपतियों ने रस्मों को नहीं निभाया। न दुल्हन ने लहंगा पहना, न कंगन, न ही हाथों में मेहंदी लगी। पंडित रस्म अदायगी के निर्देश देते रहे, लेकिन दंपतियों ने उन्हें अनसुना कर दिया। न सिंदूर भरा गया और न ही फेरे लिए गए। जब जोड़ों को मांग भरने के लिए टोका गया तो भी उन्होंने बात को टाल दिया और ऐसे ही खड़े रहे।

इस बीच विवाह के लिए आए 151 जोड़ों में मात्र 40 जोड़ों ने ही रस्मों के साथ विवाह किया। बाकी जोड़ों ने बस चंद आहुतियां दीं और उनका विवाह संपन्न हो गया। हैरानी की बात ये है कि यह सब कुछ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ, लेकिन वे सिर्फ तमाशा देखते रहे, लेकिन कोई संज्ञान लेना जरूरी नहीं समझा। विवाह संपन्न होने के बाद वहां मौजूद तमाम लोगों ने दंपतियों की पात्रता पर सवाल खड़े किए।

बता दें कि शासन से जिले को 1500 शादियां कराने का लक्ष्य मिला है। लेकिन जिले में लाभार्थी ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। अब लक्ष्य पूरा करना अधिकारियों के लिए सिर दर्द बन गया है। ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है कि जिम्मेदार लोग लक्ष्य पूरा करने के लिए फर्जी जोड़े बुला रहे हैं। जब दंपतियों से बात की गई, तो उन्होंने बात टाल दी। समारोह में नवविवाहित जोड़ों को शादी के दौरान सिल्क साड़ी, चुनरी, सिल्क सलवार सूट, ब्लाउज, पेटीकोट, टंकी, थाली, परात, कटोरी, चम्मच, बाल्टी, पायल चांदी की, छह चांदी के बिछिया, बक्सा, डिनर सेट, लोटा, नोकिया मोबाइल, कंबल और खाते में 20 हजार रुपये दिए गए। साथ ही विवाह संपन्न होने के बाद सरकारी प्रमाणपत्र थमाया गया।

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