औरैया हादसे की सच्ची कहानी, रोंगटे हो जाएंगे खड़े

औरैया मे ट्रेलर के डीसीएम से टकराने के बाद 25 मजदूर की मौत
31 सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी भर्ती
ज्यादा मौतें गैसों की वजह से हुईं
112 नंबर से कोई जवाब नहीं मिला
ट्रकों पर सवार होकर लोग कैसे इतनी दूर आए, इस मुद्दे पर जांच

By: Mahendra Pratap

Published: 16 May 2020, 09:09 PM IST

दिनेश शाक्य

इटावा. कोरोना संक्रमण के बीच लाॅकडाउन मे अपने अपने घरों को जा रहे अप्रवासी मजदूरों से भरे दो वाहनों के उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में कानपुर हाइवे पर चिरहुली गांव के पास दुघर्टनाग्रस्त हो जाने से 25 की दर्दनाक मौत हो गई तथा तीन दर्जन के उपर गंभीर रूप से घायल हो गए। 31 गंभीर घायल मजदूर और उनके परिजनों को इटावा जिले के सैफई मेडिकल यूनीवसिर्टी के ट्रामा सेंटर मे बेहतर उपचार के लिए भर्ती करा दिया गया है जबकि अन्य घायलों को औरैया के अस्पताल मे भर्ती कराया गया है जहां डाक्टरों की टीम सभी का उपचार करने मे लगी हुई है।

लगा भूकम्प आ गया :- हादसे मे घायल हुए राजस्थान से बोकारो जा रहे गोवर्धन बताते है कि हम लोग सो रहे थे। अचानक ऐसा लगा जैसे भीषण भूकंप आ गया हो। रात थी इसलिए कुछ समझ में ही नहीं आया कि क्या हुआ? जब तक कुछ समझते। लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई पड़ने लगीं। मैं खुद जमीन पर गिरा हुआ था। काफी देर वहीं पड़े रहे। बाद में गांव के लोग आए तो हम लोगों को उन्होंने निकालना शुरू किया।

ज्यादा मौतें गैसों की वजह से हुईं :- झारखंड में बोकारो के रहने वाले गोवर्धन भी उस ट्रक में सवार थे जो औरैया में सड़क पर खड़ी एक डीसीएम गाड़ी से भिड़ गई और देखते ही देखते दो दर्जन लोग मौत के मुंह में समा गए। गोवर्धन भी बुरी तरह से घायल हैं और इस समय सैफई मेडिकल काॅलेज में भर्ती हैं। गोवर्धन बताते हैं कि हम 35 लोग इस ट्रक में बैठे थे और सभी लोग बोकारो जा रहे थे, इसके अलावा भी कई और लोग बैठे थे। हम लोग राजस्थान में मार्बल का काम करते हैं । कोई साधन नहीं मिला और काम भी बंद था तो इस ट्रक से जाने का इंतजाम किसी तरह से हो गया। राजस्थान के भरतपुर से चला यह ट्रक औरैया जिले में कानपुर हाईवे पर चिरहूली गांव के पास शनिवार सुबह करीब तीन बजे सड़क के किनारे खड़े एक डीसीएम से जा भिड़ी। टक्कर के बाद ट्रक गड्ढे में गिर गई और ट्रक में लदी चूने की बोरियां फट गईं । बताया जा रहा है कि ट्रक और डीसीएम से हुई दुर्घटना से ज्यादा मौतें चूने की बोरियों के फट जाने और उनसे निकली गैसों की वजह से हुईं।

हादसे के वक्त डीसीएम का ड्राइवर सड़क के किनारे स्थित एक ढाबे पर चाय पी रहा था। डीसीएम पर भी करीब बीस लोग सवार थे जिनमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं। इनमें से कुछ यात्री भी बाहर निकलकर चाय पी रहे थे जबकि कुछ उसी में सो रहे थे। डीसीएम के कई यात्री भी घायल हुए हैं, हालांकि उनमें से किसी की मौत नहीं हुई है।

112 नंबर से कोई जवाब नहीं मिला :- ढाबे के मालिक आनंद चतुर्वेदी ने बताया कि 112 नंबर पर काफी देर तक फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उनका कहना था कि बाद में मैंने इलाके के दारोगा योगेंद्र सिंह को फोन करके सारी जानकारी दी। उसके बाद योगेंद्र सिंह पुलिस वालों के साथ यहां पहुंचे और अन्य अधिकारियों को सूचित किया।

समय पर इलाज मिलता तो कम मौतें होतीं :- एक अन्य चश्मदीद राजेश सिंह का कहना था कि पांच बजे के बाद पुलिस और एंबुलेंस आईं और राहत कार्य की शुरुआत हुई। राजेश सिंह के मुताबिक कि घायल लोग इधर-उधर तड़प रहे थे। अंधेरे में कुछ दिख भी नहीं रहा था, आस-पास के लोग भी जुटने लगे और मदद करने लगे। घायलों को अस्पताल तक पहुंचने में ही कई घंटे लग गए। यदि समय पर इलाज मिल गया होता तो शायद इतने लोगों की मौत न होने पाती। घटना की जानकारी मिलते ही जिले के आलाअधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए।

रिपोर्ट भी तलब :- करीब साढ़े सात बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर मंडल के आयुक्त और कानपुर जोन के पुलिस महानिरीक्षक को तत्काल घटना स्थल पर पहुंचने और राहत कार्य तेज करने और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दोनों अधिकारियों से घटना की रिपोर्ट भी तलब की है।

प्रति व्यक्ति 1500 रुपए लिए :- हादसे में मारे गए ज्यादातर मजदूर झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के थे. इस ट्रक में उत्तर प्रदेश के भी कई लोग सवार थे। वाराणसी जा रहे सुनील कुमार बताते हैं कि रात काफी हो गई थी। ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे। टक्कर के बाद ट्रक उछलकर गड्ढे में जा गिरी। जिस डीसीएम से उसकी टक्कर हुई वह भी गड्ढे में चली गई। ट्रक में सवार लोगों का कहना है कि उन्होंने भरतपुर से अपने गंतव्य तक जाने के लिए कोई किराया नहीं दिया था लेकिन डीसीएम में सवार कांति देवी कहती हैं कि डीसीएम के ड्राइवर ने उन लोगों से प्रति व्यक्ति 1500 रुपए लिए थे। कांति देवी और उनके तीन बच्चे भी दुर्घटना में घायल हैं और सैफई अस्पताल में भर्ती हैं । कांति देवी बताती हैं कि उन्हें छतरपुर जाना था और वो लोग गाजियाबाद से इस डीसीएम में सवार हुए थे। डीसीएम में सवार सभी लोग मध्य प्रदेश जा रहे थे।

ट्रकों पर सवार होकर लोग कैसे इतनी दूर आए:- घटनास्थल से सैफई मेडिकल यूनीवसिर्टी घायलों का हाल जानने पहुंचे कानपुर मंडल के आयुक्त सुधीर कुमार बोबड़े ने बताया कि हादसे में घायल 31 लोगों को सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है जिनमें छह की हालत गंभीर बनी हुई है। 12 लोगों का औरैया के जिला अस्पताल में ही इलाज चल रहा है जबकि पूरी तरह से स्वस्थ 5 लोगों को एक आश्रय स्थल में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस बात की जांच की जा रही है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद ट्रकों पर सवार होकर लोग कैसे इतनी दूर तक चले आए।

उपचार में कोई कोताही नहीं :- बताया जा रहा है कि भरतपुर से आ रहे जिस ट्रक ने डीसीएम को टक्कर मारी है, उसमें पचास से ज्यादा लोग सवार थे। चूने की बोरियों से लदे इस ट्रक में इतनी संख्या में लोगों का सवार होना भी कम आश्चर्यजनक नहीं है। आयुक्त सुधीर कुमार बोबड़े का कहना है कि सभी घायलों के बेहतर उपचार के लिए सैफई मेडिकल विश्वविद्यालय को निर्देशित कर दिया गया है कि घायलों के उपचार में कोई कोताही न की जाए।

15 मृतकों की पहचान :- मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति डाक्टर राजकुमार ने बताया, घायलों के उपचार को ले डाक्टरों की टीम जी-जान से जुटी है। पांच घायलों की हालत नाजुक है जबकि अन्य की स्थिति नियंत्रण में है। घटना के बाद मौके पर औरैया के जिलाधिकारी अभिषेक सिंह और पुलिस अधीक्षक सुनीति समेत कई अधिकारी पहुंच गए और कई क्रेनों की मदद से गाडियो में फंसे मजदूरों को निकाल कर एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाने का इंतजाम किया गया। जिला प्रशासन ने जिन मृतकों की सूची जारी की है उनमें 15 की पहचान हो गई है जबकि अन्य की पहचान अभी की जा रही है ।

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