भाजपा विधायक का थाने में हंगामा, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

Ashish Pandey

Publish: Oct, 12 2017 03:27:20 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
भाजपा विधायक का थाने में हंगामा, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

विधायिका पर थाने में घुसकर अभद्रता का आरोप, थानाध्यक्ष को बिना बताए एफआईआर करने पर एसएसपी ने एसओ को किया निलंबित।

इटावा. थाना इकदिल इलाके के भूलपुर गांव निवासी ऊषा देवी इटावा में नारी निकेतन में होमगार्ड के पद पर तैनात है। एक अक्टूबर की शाम को ऊषा देवी ड्यूटी ख़त्म कर घर जाने के लिए अपने बेटे कमल को बाइक लेकर बुलाया था, लेकिन इकदिल इलाके में हो रही चेकिंग में उसको रोक लिया गया। कागज न होने पर होमगार्ड के बेटे की पुलिस कर्मियों ने जमकर पिटाई की थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। अगले दिन परिजनों पर पुलिस कर्मियों द्वारा राजीनामा करने के दबाव भी बनने लगे थे। तभी मामले में मृतक की माँ ऊषा देवी विधायिका से मिलीं।

विधायिका ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मृतक के परिजनों से मिलने उनके घर गईं। परिजनों से मिलने के बाद सदर विधायक सरिता भदौरिया अपने दर्जनों साथियों के साथ थाना इकदिल पहुंचीं, जहां पर थानाध्यक्ष अमित कुमार मिले, विधायिका मामले में मुकदमा दर्ज करने के लिए कहती रहीं, लेकिन थानाध्यक्ष ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। विधायिका ने थानाध्यक्ष से कहा कि तुम्हारा दिमाग खऱाब है। सरकार को बदनाम कर रहे हो, लेकिन फिर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। तभी सभी लोग थाने से निकल आए और घर चले गए।

इटावा में 9 अक्टूबर को एक कार्यक्रम में शामिल होने आए रामशंकर कठेरिया से मृतक के परिजनों ने मुलाकात की। तभी परिजनों को न्याय दिलाने की बात कही। इसी मामले में रामशंकर कठेरिया ने इटावा एसएसपी को बुलाकर मामले में कार्यवाही की बात की तो एसएसपी वैभव कृष्ण ने थानाध्यक्ष सहित चार लोग को लाइन हाजिर कर दिया। इसी दिन अपने ऊपर कार्यवाही होने से नाराज थानाध्यक्ष अमित कुमार ने सदर विधायिका, पूर्व विधायिका मृतक के परिजन सहित 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया, लेकिन थानाध्यक्ष ने इस मुकदमे की जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को नहीं दी, लेकिन जैसे ही एफआईआर की कॉपी मीडिया तक पहुंची तो पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सीओ सिटी से जांच कराई गई तो मामले में निकल कर आया कि अमित कुमार ने किसी को जानकारी न देते हुए मुकदमा पंजीकृत किया है, जिसमें अमित कुमार स्वयं वादी हैं, वहीँ इस पूरे मामले में सीओ की जांच पर एसएसपी ने लाइन हाजिर किए गए थानाध्यक्ष को निलंबित करते हुए विभागीय जांच बैठा दी है।

वहीं इस पूरे मामले में सदर विधायिका सरिता भदौरिया का कहना है कि मैं तो जनता की आवाज बनकर थाने गई थी। यह मामला मेरे परिवार या कार्यकत्र्ता का नहीं बल्कि एक दलित महिला का था, लेकिन महिला एक पीडि़त बनकर आई थी, मैं भी महिला हूं, मुझे इस महिला की मदद करनी चाहिए। मैने वही किया था जो मुझे करना चाहिए था, उसने जैसा किया जो उसे ठीक लगा है और जो एसएसपी को करना है, वह करेंगे और थाने में जो भी घटना हुई थी मीडिया के कैमरों की निगरानी में हुआ था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।

वहीं इस मामले में एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि पिछले दिनों एक महिला के बेटे की मौत हो गई थी, जिसका आरोप पुलिस पर लगा था। इस मामले में जांच चल रही है, लेकिन इस मामले में जानकारी आई की बिना बताए और बिना किसी को सूचना दिए थानाध्यक्ष ने पहले मुकदमा पंजीकृत किया है और जो गलत तथ्यों के आधार पर मृतक के परिजनों सदर विधायक और वकील के खिलाफ भी बढ़ा चढ़कर मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में घोर अनुशासनहीनता के चलते थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है। यह पूरा मामला ही गलत है, इसमें पुलिस की पूरी गलती है।

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