कार्यकाल खत्म होने से पहले छुट्टी पर भेजे गए सैफई मेडिकल यूनीवसिर्टी के कुलपति

प्रतिकुलपति डा.रमाकांत यादव को दिया गया कुलपति का चार्ज

By: Neeraj Patel

Published: 10 May 2021, 08:50 PM IST

इटावा. जिले में सैफई मेडिकल यूनीवसिर्टी के कुलपति प्रो.राजकुमार को कोरोना संक्रमितों के इलाज में नाकाम होने पर छुट्टी पर भेज दिया गया है। प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने यूनीवसिर्टी मे कार्यवाहक कुलपति की तैनाती के संबंध में आदेश जारी किया है। पत्र में बताया गया है कि कुलपति का कार्यकाल 31 मई को समाप्त हो रहा है, नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है हालांकि तब तक प्रतिकुलपति डा.रमाकांत यादव को कुलपति का चार्ज दिया गया है। कुलपति का कार्यकाल 31 मई को पूरा हो रहा है पर इसके पहले ही उनको छुट्टी पर भेजे जाने का कारण कोरोना काल में यूनीवसिर्टी में फैली अव्यवस्थाएं बताई जा रहीं हैं। प्रतिकुलपति डा. रमाकांत यादव को कुलपति का चार्ज दिया गया है हालांकि नए कुलपति की तलाश भी की जा रही है।

वर्तमान कुलपति के पद का कार्यकाल 31 मई को समाप्त होने वाला था। नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया प्रचलित है। शीघ्र ही नये कुलपति की नियुक्ति अनुमोदनोपरांत की जाएगी। शासन ने सैफई विश्वविद्यालय इटावा अधिनियम 2015 की धारा 11(10) के अंतर्गत विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति को 31 मई अथवा नए कुलपति की नियुक्ति तक अथवा जो भी पहले हो के लिए कुलपति के कर्तव्यों के निर्वहन हेतु अधिकृत किए जाने का निर्णय लिया है। पत्र के अंतिम में लिखा है कि सैफई यूनीवसिर्टी के वर्तमान कुलपति को बचे शेष कार्यकाल हेतु अवकाश पर जाने हेतु अनुरोध किया जाता है और वह तत्काल प्रभाव से अवकाश पर माने जाएंगे । साथ ही निर्देश जारी किया गया कि शासन की ओर से लिए गए निर्णय अनुपालन सुनिश्चित करने का कष्ट करें।

इसके साथ ही पिछले तीन सालों से सैफई विश्वविद्यालय में चला आ रहा राजकुमार के कार्यकाल के रथ का पहिया बीच रास्ते मे ही थम गया। पिछले महीने से सैफई यूनीवसिर्टी में कोरोना महामारी के हाहाकार से जूझ रहा था। ऑक्सीजन की कमी, सेनेटाइजर, मास्क, ग्लब्स, पीपीई किट और जीवन रक्षक दवाओं की कमियों को शासन ने कुलपति को अवकाश पर माने जाने का निर्णय ले लिया। सूत्र बताते है कि पिछले महीने शासन से विश्वविद्यालय को 5 करोड़ 75 लाख का बजट दिया गया जिसमें 50 लाख दवा,1 करोड़ 25 लाख पीपीई किट के लिए और 4 करोड़ टेस्ट किट के लिए दिए गए लेकिन उसके बाद भी यूनीवसिर्टी में दवा और सामान के लिये हहाकार मचा रहा। जिसका नतीजा यह हुआ कि जे आर डाक्टरों को समान उपलब्ध न होने की वजह से हड़ताल भी करना पड़ी। जिसकी कई लिखित शिकायतें शासन को भेजी गई।

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यूनीवसिर्टी में 01 जून 2018 को कुलपति के पद का कार्यभार ग्रहण करने के बाद जैसे मानो लगा कि मुलायम सिंह के सपनों के महल की नींव में भ्रष्टाचार की जड़े फैलकर उनको खोखला करने में जुट गई हो। अनियमितताएं, भ्रष्टाचार और विवादित फैसले डॉक्टर राजकुमार राज्य में फैशन शो की तरह रेम्प पर चलने लगे। सितंबर 2018 में ओएसडी के पद पर जयशंकर प्रसाद की नियुक्ति, रैंगिंग मामले मेॆ कार्यवाही, सेवानिवृत्त ओएसडी के पद पर गुरजीत सिंह कलसी की अवैध नियुक्ति, सरकारी पद पर रहते हुए रायबरेली में कुमार मित्रा ट्रस्ट का गठन कर करोड़ों रुपयों की बिल्डिंग बनाकर आईटीआई कालेज की स्थापना करना, कार्डियोलॉजी डाक्टर समीर शराफ द्वारा करोड़ो रुपयों के स्टंट खरीद घोटाले जैसी शिकायतें आज भी शासन और पीएमओ कार्यालय में चल रही जिसका नतीजा यह हुआ कि शासन को कार्यकाल खत्म होने के कुछ दिन पहले डॉक्टर राजकुमार को अवकाश पर भेजने को कह दिया।

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