एक्सक्लूसिव : औने-पौने दामों में धान बेच रहे किसान, बाधा बन रही यह सरकारी प्रक्रिया

अब तक नहीं हुई लक्ष्य के अनुरूप धान की खरीदारी...

By: Hariom Dwivedi

Published: 18 Dec 2018, 03:14 PM IST

दिनेश शाक्य
इटावा. करीब दो दशक पहले धान उत्पादन में अव्वल रहे इटावा जिले के किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर फसल बेचने के बजाय आढ़तों पर कम पैसों में बेच रहे हैं। इसकी वजह फसल बेचने के लिए किसानों का अनिवार्य पंजीकरण और क्रय केंद्रों पर किसानों का धान न खरीदा जाना है। परेशान किसान समर्थन मूल्य (1750 रुपए प्रति कुंतल) की जगह आढ़तों पर 1200 से 1400 रुपए प्रति कुंतल धान बेचने को मजबूर हैं। सपा-बसपा ने धान किसानों के इस हाल के लिए प्रदेश सरकार की गलत नीतियों को जिम्मेदार बताया है।

जिला विपणन अधिकारी संतोष पटेल ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि शासन ने पंजीकरण को लेकर काफी सहूलियतें दी हैं। कोई भी गैर पंजीकृत किसान क्रय केंद्र पर आकर धान बेच सकता है। बस उसे पंजीकरण करवाना होगा। इसके लिए किसान केंद्र प्रभारी से संपर्क कर सकते हैं या फिर साइबर कैफे से भी पंजीकरण करवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मार्केटिंग विभाग के सभी केंद्र प्रभारियों के पास लैपटॉप उपलब्ध हैं, जो तत्काल किसानों का पंजीकरण कर सकते हैं।

महेवा के नगला मुलु नौधना निवासी नंदराम ने बताया कि धान बेचने के लिए क्रय केंद्र के कई चक्कर लगाये, लेकिन रजिस्ट्रेशन के चलते उनका धान नहीं खरीदा गया। हेल्पलाइन नंबर पर फोन भी किया गया, पर पंजीकरण नहीं हो सका। ऐसी ही समस्या से जिले के कई और किसान परेशान हैं।

जानकार फसल विशेषज्ञों का कहना है कि फसल के दौरान मौसम के बिगड़ने से इस बार धान की क्वालिटी खराब है। 17 प्रतिशत नमी के मानक से ज्यादा करीब 24 प्रतिशत नमी मौजूद है। क्रय केंद्रों पर मानक से नीचे धान नहीं खरीदा जा रहा है। रजिस्ट्रेशन और क्वालिटी की समस्या से परेशान किसान 1750 रुपये प्रति कुंतल की जगह 1200 रुपए प्रति कुंतल तक धान बेचने को मजबूर हैं।

किसान बोले- एक दाना भी नहीं खरीदा गया
बकेवर के चंद्रपुराकला निवासी किसान विजय उर्फ राजू चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने करीब 5 एकड़ में धान किया था, लेकिन उनका एक भी दाना सरकारी खरीद केंद्र पर नहीं बिका। बकेवर के ही कुडरिया निवासी प्रमोद कुमार तिवारी ने बताया कि उन्होंने 2 एकड़ में धान की पैदावार की। सहकारी समिति खरीद केंद्र के कई चक्कर लगाये, लेकिन उनका एक दाना भी नहीं बिका। इन किल्लतों से परेशान भर्थना के ब्रह्मनगर निवासी राजीव का कहना है कि पर्याप्त कीमत न मिलने से उन्होंने हाइब्रिड धान की उपज लेना बंद कर दिया है।

अब तक 13.37 ही हुई धान की खरीदारी
शासन की ओर से इटावा जिले में कुल 33,800 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जो किसानों के मौजूदा रुख को देखते हुए पूरा होता हुआ नहीं दिख रहा है। पिछले वर्ष अब तक करीब साढ़े तीन हजार किसानों ने क्रय केंद्रों पर धान बेचा था, लेकिन इस बार सिर्फ 751 किसान ही खरीद केंद्रों पर पहुंचे हैं। जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे ने बताया कि सरकारी समर्थन मूल्य पर धान की खरीद करने के लिए 7 एजेंसियां लगाई गई हैं। मार्केटिंग शाखा को 15800 मीट्रिक टन, पीसीएफ को 4700, कर्मचारी कल्याण निगम को 4000, भारतीय खाद्य निगम को 1500, यूपी एग्रो को 1000, नेफेड को 3000 और एनसीसीएफ को 3800 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक 4518.54 मीट्रिक टन ही धान खरीदा जा सका है, जो कुल खरीद का 13.37 प्रतिशत है।

सरकार की नीतियां जिम्मेदार : सपा-कांग्रेस
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष गोपाल यादव का कहना है कि सरकार की गलत नीतियों के चलते किसान अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं और 1750 रुपये के सरकारी रेट होने के बाबजूद भी 1200 या 1300 रुपये में निजी आढ़तियों को बेचने पर मजबूर हैं। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष उदयभान सिंह ने कहा कि पूरे जनपद के खरीद केंद्रों का दौरा किया है, लेकिन सरकार के गलत मानकों और किसान विरोधी नीतयों के चलते धान खरीद नहीं हो पा रही है।

 

 

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