यहां तो मुलायम के लोग ही शिवपाल के सबसे बड़े समर्थक, दो खेमे में बंटे सपाई

यहां तो मुलायम के लोग ही शिवपाल के सबसे बड़े समर्थक, दो खेमे में बंटे सपाई

Nitin Srivastava | Publish: Sep, 03 2018 01:17:16 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

शिवपाल सिंह यादव का समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बनेगा अखिलेश यादव के लिए मुसीबत?

दिनेश शाक्य

इटावा. समाजवादी पार्टी के आधार स्तंभ माने जाने वाले इटावा मे तो 'मुलायम के लोग' ही शिवपाल सिंह यादव के साथ नजर आ रहे हैं। समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के स्थानीय समर्थकों की ओर से दावा किया जा रह है कि समाजवादी पार्टी के मुकाबले उनका संगठन ज्यादा मजबूत है। वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी का तर्क है कि चंद स्वार्थी ठेकेदार टाइप लोग सेक्युलर मोर्चे का हिस्सा बनकर बड़ा नाटक करने में जुटे हुए हैं।

 

दो हिस्सों में बंटा समाजवादी खेमा

बेशक मुलायम सिंह यादव के भाई और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने सपा में अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए संसदीय चुनाव से पहले ही समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के गठन का ऐलान कर दिया है। उसके साथ ही पूरे प्रदेश के समाजवादी खेमे में दो तरह की विचारधारा सक्रिय होती दिख रही हैं। एक वह जो समाजवादी पार्टी की मुख्यधारा में शामिल हैं, दूसरे वह जो शिवपाल समर्थक समाजवादी सेक्युलर मोर्चे से अपना जुडाव रखते हैं। इन सबके बीच अगर बात करें समाजवादी पार्टी के प्रमुख केंद्र इटावा की तो यहां आज भी शिवपाल सिंह यादव के पीछे चलने वाले कोई और नही बल्कि सब के सब 'मुलायम के लोग' संगठन के पदाधिकारी हैं। जिनका कहीं न कहीं मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव से सीधा जुड़ाव माना जाता है।

 

जनता को देंगे नया विकल्प

'मुलायम के लोग' संगठन के मुख्य अगवाकार और समाजवादी सेक्युलर मोर्चे से जुड़ाव रखने वाले सुनील यादव की ओर से एक प्रेस रिलीज जारी की गई है जिसमें इस बात का साफ-साफ ज्रिक किया गया है। प्रदेश की एकता और अखडंता के लिए अमतनीर है सेक्युलर मोर्चा, जमीनी और सच्चे समाजवादियों का सम्मान है सेक्युलर मोर्चा, प्रदेश की जनता की उम्मीद की मशाल है सेक्युलर मोर्चा। सेक्युलर मोर्चा से जुड़े सुनील यादव, कृष्ण मुरारी गुप्ता और दिलीप यादव बब्लू ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि कुछ लोग जो सेक्युलर मोर्चा का वजूद पूछ रहे हैं, वह जनपद में अपने वजूद को बचाने की सोचें। उनकी स्थिति क्या है। हम सारे सेक्युलर मोर्चा से जुड़े हुए लोग अन्याय के खिलाफ अपनी मेहनत और सेवाभाव से प्रदेश की जनता को नया और बेहतर विकल्प देंगे। आने वाले समय में मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव के आर्शीवाद से मोर्चे से जुड़े पूर्व विधायक रधुराज सिंह शाक्य, पूर्व विधायक सुखदेवी वर्मा, अजय भदौरिया, संजय शुक्ला, धर्मवीर यिंह यादव, दीपक भदौरिया, के.के. यादव, रामनाथ यादव, फरहान शकील, कामिल कुरैशी, रामनरेश राजपूत, बब्लू शुक्ला, आलोक दीक्षित, उपदेश मिश्रा आदि ने कहा है कि हम सारे लोग मोर्चे को मजबूत करने का काम करेंगे।

 

मोर्चा का नहीं पड़ेगा कोई असर

समाजवादी सेक्युलर मोर्चा की गतिविधियों को लेकर समाजवादी पार्टी की इटावा इकाई के अध्यक्ष गोपाल यादव का कहना है कि इससे समाजवादी पार्टी पर कोई असर नहीं पडेगा, क्योकि इटावा में समाजवादी पार्टी समर्थक समझदार हैं। वह अपने वोट को बरबाद करने का कोई कदम नहीं उठाएंगे। उनका कहना है कि अकेला चलो वाली कहावत दिखाई दे रही है। जो लोग सक्रिय हैं, वह ठेकेदार टाइप प्रतीत हो रहे हैं।

 

शिवपाल के पक्ष में नारे

इटावा में शिवपाल के समर्थक उनको बड़ा नेता मानते हैं। पिछले साल जुलाई महीने में इटावा में मुलायम के लोग नाम के संगठन में लोगों ने शिवपाल सिंह यादव को अपना नेता मानते हुए बड़े स्तर पर होर्डिंग बैनर लगाए। उनमें शिवपाल सिंह यादव को उत्तर प्रदेश का बड़ा और अहम नेता बताते हुए नारे लिखे गए। जहां एक बैनर में लिखा गया गूंजे धरती और पाताल प्रदेश के नेता हैं शिवपाल। वहीं दूसरे में मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों से आती आवाज, यही शिवपाल लाओ प्रदेश बचाओ करते हैं सब यही बात। तीसरे बैनर में लिखा गया है कि आई परिवर्तन की आंधी है, शिवपाल हमारे गांधी हैं।

 

संगठन की फिर से इंट्री

विधानसभा चुनाव के दौरान इस संगठन की गतिविधि बड़े स्तर पर सामने आई थी। इस संगठन के पदाधिकारियों को बड़े स्तर पर शिवपाल सिंह यादव की ओर से समर्थन मिलता रहा है। इस संगठन का कार्यालय भी शिवपाल सिंह यादव के चौगुर्जी आवास के करीब एक बिल्डर कंपनी के मकान में खोला गया था, लेकिन चुनाव खत्म होने से पहले ही इस कार्यालय को न केवल बंद कर दिया गया, बल्कि मुलायम के लोग नाम की तख्ती भी उखाड़ ली थी। उसके बाद अब नए सिरे से मुलायम के लोग की इंट्री पोस्टरों, बैनरों के जरिये होती हुई दिखाई दे रही है।

 

कार्यालय बंद होने पर हुई थी चर्चा

आपको बता दें कि इटावा में तीसरे चरण में 19 फरवरी को चुनाव हुआ था, लेकिन उससे पहले ही मुलायम के लोग कार्यालय में तालाबंदी ने हर किसी को सन्न कर दिया। क्योंकि इस संगठन के पदाधिकारियों का दावा था कि यह कार्यालय मुलायम समर्थकों का सम्मान करने के लिए खोला गया है। खुद मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश यादव ने भी इस कार्यालय के औचित्य पर 16 फरवरी को इटावा में हुई अपनी चुनावी रैली में सवाल उठाया था। जितनी चर्चा मुलायम के लोग कार्यालय खोलने के बाद इटावा में नहीं हुई, उससे कहीं ज्यादा चर्चा इस कार्यालय के बंद होने के बाद शुरू हुई। क्योंकि इस कार्यालय में कहने के लिए तो मुलायम के लोग बैठ रहे थे लेकिन हकीकत में वह सभी के सभी शिवपाल सिंह यादव के लोग थे। जिनके बारे में एक जनचर्चा यह भी कही और सुनी जाती रही है कि वह सभी के सभी समाजवादी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों को हराने की दिशा में काम करने में जुटे हुए थे। उनकी मंशा और उद्देश्य चुनाव पूरा होते ही पूरा हो गया है।

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