नहीं रहे मुलायम के लंगोटिया यार, सपा की जीत के लिए गांव में बैठकर रणनीति बनाते थे दर्शन सिंह यादव

- सैफई में वह सिर्फ दर्शन सिंह यादव ही थे जो मुलायम को सीधे नाम लेकर पुकारते थे और गलती करने पर फटकार भी लगाते थे

By: Hariom Dwivedi

Published: 17 Oct 2020, 04:55 PM IST

दिनेश शाक्य

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
इटावा. वर्ष 1972 से लगातार सैफई के ग्राम प्रधान रहे दर्शन सिंह यादव का शनिवार सुबह लखनऊ के लोहिया अपस्ताल में निधन हो गया। खबर सुनते ही सपाइयों में शोक की लहर दौड़ गई। सपा संस्थापक मुलायम सिंह और दर्शन सिंह यादव लंगोटिया यार थे। बचपन से ही दोनों को पहलवानी का शौक था। सैफई में वह सिर्फ दर्शन सिंह यादव ही थे जो मुलायम को सीधे नाम लेकर पुकारते थे और गलती करने पर फटकार भी लगाते थे। अखिलेश यादव ने निधन को अपूर्णीय क्षति बताया है।

मुलायम सिंह ने जब राजनीति में कदम रखा तो उनके कंधे से कंधा मिलाकर दर्शन सिंह चले। लोहिया आंदोलन के दौरान 15 साल की उम्र में मुलायम सिंह सियासत में कूद पड़े। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया और फर्रूखाबाद जेल में बंद कर दिया। इसकी भनक जैसे ही दर्शन को हुई तो उन्होंने जेल के बाहर आमरण अनशन पर बैठ गए। जिसके चलते जिला प्रशासन को मुलायम सिंह को रिहा करना पड़ा। मित्र मुलायम सिंह यादव के सियासी सफर को रफ्तार देने के लिए दर्शन सिंह गांव में बैठकर रणनीति बनाते थे।

सैफई गांव को वीवीआईपी ग्राम पंचायत बनाने के पीछे मुलायम सिंह यादव के मित्र दर्शन सिंह का अहम योगदान है। इस गांव में तमाम ऐसी सुविधाएं हैं जो देश के बड़े-बड़े मेट्रो शहरों में नहीं हैं। कम पढ़े लिखे होने के बावजूद दर्शन सिंह सरकारी बाबुओं पर कड़ी नजर रखते थे और गांव के विकास के लिए आए पैसे का हिसाब उनसे लेते हैं। दूसरों के मुकाबले मुलायम सिंह भी दर्शन सिंह यादव पर सबसे ज्यादा भरोसा करते थे। इतना ही नहीं जब भी वह परेशान होते थे तो सलाह लेने के लिए खुद गांव पहुंच जाते थे। मुलायम सिंह अपने मित्र की ईमानदारी के इतने थे कि सैफई की जिम्मेदारी उनके कंधों पर सौंप दी थी। वर्ष 1971 से दर्शन सिंह 1971 से सैफई से निर्विरोध प्रधान चुने जाते रहे हैं। कहा जाता रहा है कि मुलायम सिंह यादव ने साफ कह दिया था जब तक दर्शन सिंह है तब तक कोई दूसरा प्रधान नहीं होगा।

ऐसे करते थे चंदा
मुलायम सिंह यादव के चुनाव लड़ने के लिए पैसे इकट्ठा करने में लगे हुए थे, लेकिन इंतेजाम हो नहीं हो पा रहा था। एक दिन नेताजी के घर की छत पर पूरे गांववालों की बैठक हुई, जिसमें सभी जाति के लोगों ने भाग लिया। गांव के ही सोने लाल शाक्य ने बैठक में सबके सामने कहा कि मुलायम सिंह यादव हमारे हैं। उनको चुनाव लड़ाने के लिए हम गांव वाले एक शाम खाना नहीं खाए। एक शाम खाना नहीं खाने से कोई मर नहीं जायेगा, पर एक दिन खाना छोड़ने से आठ दिनों तक मुलायम की गाड़ी चल जाएगी। जिस पर सभी गांव वालों ने एक जुट हो सोने लाल के प्रस्ताव का समर्थन किया और वहीं हुआ।

नहीं रहे मुलायम के लंगोटिया यार, सपा की जीत के लिए गांव में बैठकर रणनीति बनाते थे दर्शन सिंह यादव

1967 में मुलायम-दर्शन साइकिल से करते थे प्रचार
साल 1967 के चुनाव में दर्शन सिंह यादव मुलायम सिंह के साथ साइकिल पर चुनाव प्रचार करते थे और घूम-घूमकर चंदा मांगते थे। मुलायम सिंह यादव पहली दफा जब चुनाव मैदान में उतरे उनके लिए प्रचार करने वालो में दर्शन सिंह यादव भी प्रमुख रहे हैं। उस समय सब साइकिल से चुनाव प्रचार करते थे। बाद में चंदे के पैसों से एक सेकेंड हैंड कार खरीदी पर सभी लोगों को इस कार को खूब धक्के लगाने पड़ते थे, क्योंकि यह कार बार-बार बंद हो जाया करती थी। सैफई में कोई भी पर्व हो, मुलायम सिंह यादव दर्शन सिंह को अपने बगल में ही बिठाया करते हैं।

1972 से चुने जा रहे प्रधान
दर्शन सिंह यादव साल 1972 से ही सैफई के प्रधान चुने जा रहे हैं। पहले प्रधानी के चुनाव नियमित समय पर नहीं होते थे, इसलिए 1972 के बाद 1982, 1988 और 1995 में जब ग्राम प्रधानों के चुनाव कराए गए, तब दर्शन सिंह यादव ही प्रधान बने। 1995 से पांच वर्ष के नियमित अंतराल पर चुनाव कराए जा रहे हैं। तब से दर्शन सिंह को ही ग्राम प्रधान चुना जाता रहा है।

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