विधानसभा उपचुनाव से पहले अक्षय यादव के लिए अब अखिलेश यादव ने किया सबसे बड़ा ऐलान, चला बड़ा मास्टर स्ट्रोक

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ विधानसभा सदस्यता को लेकर के समाजवादी पार्टी के एक्शन के बाद हलचल तेज हो गई है

By: Ruchi Sharma

Published: 13 Sep 2019, 04:26 PM IST

इटावा. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ विधानसभा सदस्यता को लेकर के समाजवादी पार्टी के एक्शन के बाद हलचल तेज हो गई है। ऐसा कहा जा रहा कि उत्तर प्रदेश के इटावा जिले की जसवंतनगर विधानसभा के उपचुनाव के बहाने फ़िरोज़ाबाद संसदीय सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख महासचिव प्रो.रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव की हुई हार का बदला लेने के लिए समाजवादी पार्टी जी जान लगा देगी।

असल में समाजवादी पार्टी ने संसदीय चुनाव से पहले बागी शिवपाल सिंह यादव के प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया का गठन कर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में अपने उम्मीदवारों को उतारते हुए किस्मत अज़ामाई थी लेकिन बदकिस्मती से पार्टी किसी भी उम्मीदवार की जमानत तो बची नहीं कुछ ऐसा ही हाल खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का भी फिरोजाबाद संसदीय सीट पर अपने भतीजे अक्षय यादव के खिलाफ भी हुई जहां उन्हे मात्र 90 हजार के आसपास वोट मिले जब कि अक्षय को शिवपाल से पांच गुना अधिक वोट हासिल हुए। इस सीट से न तो शिवपाल जीत पाये और ना ही अक्षय जीत सके। जीत का सेहरा भाजपा के चंद्रसैन जादौन के सहेरे बंध गया जब कि शिवपाल सिंह यादव और उनके समर्थकों ने रिकार्ड मतो से जीत का दावा किया था लेकिन जब नतीजे समाने आये तो परिणाम छुप नहीं सका।

समाजवादी पार्टी से अलग होकर के प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन कर बेसक शिवपाल सिंह यादव कर चुके हो लेकिन आज भी समाजवादी पार्टी से जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित है और फिरोजाबाद संसदीय सीट में जब उनके नामांकन पर अक्षय यादव की तरफ से आपत्ति उठाई गई तब उन्होंने इस बात की दलील दी कि उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है इसी दलील के बाद उनके नामांकन को वैद्य माना गया ।

जब संसदीय चुनाव के दरम्यान शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने का पत्र भेज दिया तो निश्चित है कि उसकी क्रिया तो होनी ही थी । इसी के तहत समाजवादी पार्टी के नेता रामगोविंद चौधरी ने विधानसभा में शिवपाल सिंह यादव की विधानसभा सदस्यता को लेकर के याचिका दायर कर दी जिसके बाद इटावा खास कर जसवंतनगर विधानसभा में हलचल तेज हो गयी है। हर किसी को इस बात का एहसास हो चुका है कि जसवंतनगर विधानसभा में अब चुनाव होगा । जिसमे शिवपाल सिंह यादव की प्रतिष्ठा दांव पर लगेगी वहीं समाजवादी पार्टी इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने का प्रयत्न करेगी ।

जहां तक जसवंतनगर विधानसभा की बात है तो इस सीट पर 1996 से समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के उत्तराधिकारी के तौर पर शिवपाल सिंह यादव की ताजपोशी है। बेशक उनकी जीत का अंतर लगातार कम हो रहा हो लेकिन इसके बावजूद शिवपाल सिंह ऐसा मानकर के चलते हैं कि उनके तिलिस्म को तोड़ पाना किसी के लिए संभव नहीं है लेकिन यह तब है जब वो समाजवादी पार्टी से एमएलए थे । अब अगर समाजवादी पार्टी का तगमा उनसे अलग होगा तो शिवपाल के लिए निश्चित ही मुसीबत खड़ी होगी । उधर शिवपाल सिंह यादव के कट्टर प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी के नेता मनीष यादव पतरे साफ-साफ कहते हैं कि जब शिवपाल सिंह यादव ने नए दल का सृजन कर लिया था तो ऐसे में उन्हें समाजवादी पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा पहले ही दे देना चाहिए था और शिवपाल सिंह यादव समाजवादी पार्टी ओर मुलायम सिंह यादव से अलग होकर के चुनाव मैदान में उतरेंगे तो उनको उनकी हैसियत का पता चल जाएगा ।

मनीष यादव का साफ कहना है कि वह शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ चुनाव मैदान में जरूर उतरेंगे भले ही नतीजा कुछ भी रहे ।
समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष गोपाल यादव का कहना है कि जसवंतनगर विधानसभा के वासी अर्से से समाजवादी पार्टी के पक्षधर रहे है इसलिए वो समाजवादी पार्टी के अलावा किसी ओर को पसंद नही करेंगे । जसवंतनगर विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी की परंपरागत सीट है । इसलिए समाजवादी पार्टी अपनी परंपरागत सीट पर चुनाव के दरम्यान मजबूत उम्मीदवार को उतारेगी ताकि इस पर भी इस सीट पर समाजवादी झण्डा फ़हराये ।

सपा की चुनौती के बाद जाहिर है कि शिवपाल सिंह यादव इटावा जिले की जसंवतनगर विधानसभा सीट से विधायक नहीं रहेगे और यहां पर नये सिर से चुनाव होगा। जब जसंवतनगर विधानसभा मे सीट पर चुनाव होगा तो इस चुनाव में कौन वजूद में आता है। यह देखने वाली बात बडी ही दिलचस्प मानी जायेगी क्यो कि 1996 से मुलायम सिंह यादव के उत्तराधिकारी के तौर पर शिवपाल सिंह यादव विधायक होते आये है और इस दफा बागी बन कर सपा के लिए मुसीबत बनेगे । दलबदल कानून के तहत शिवपाल की सदस्यता खत्म होना तय है।

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