ये रहीं खूंखार डकैत, जानिए क्या कर रहे हैं इनके बच्चे

ये रहीं खूंखार डकैत, जानिए क्या कर रहे हैं इनके बच्चे

Mahendra Pratap Singh | Publish: May, 12 2018 05:40:55 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

मदर्स-डे पर अलग-अलग तरीके से लोग अपनी मां के त्याग को याद भी करते हैं।

दिनेश शाक्य

इटावा. वैसे तो अपने बेटे के लिए हर मां का समर्पण और प्यार दुर्लभ होता है। मदर्स-डे पर अलग-अलग तरीके से लोग अपनी मां के त्याग को याद भी करते हैं। लेकिन, कभी किसी ने सोचा कि चंबल के बीहड़ों में कभी दुर्दांत महिला डकैत रहीं महिलाओं ने अपने मातृत्व सुख के लिए कितने कष्ट सहे हैं? जिनके नाम से कभी इलाका थर्राता था उन मांओं कहानी बहुत दर्दभरी है। बहुत जीवटता के बाद इन्होंने मातृत्व का सुख झेला। बड़े त्याग और बलिदान के बाद कईयों ने अपने बेटे और बेटियों को समाज में प्रतिष्ठित पद के लायक बनाया। मसलन-खूंखार डकैत छविराम की पत्नी ने तमाम कष्ट झेले लेकिन अपने बेटे को वह सब इंस्पेक्टर बनाने में कामयाब रहीं।

चंबल का बीहड़ कभी डकैतों के आतंक का पर्याय रहा है। यहां तमाम नामी डाकुओं के साथ उनकी पत्नियों और प्रेयसियों की हूकुमत चलती रही है। इनमें कुछ महिला डकैत पुलिस की गोली खाकर मौत के मुंह मे समा गईं। कुछ गिरफ्तार हुईं। कुछ ने आत्मसमर्पण किया। इनमें कुछ मां बनने का सौभाग्य भी पायीं। इन्हीं में से एक थीं चंबल घाटी के कुख्यात डकैत छविराम की पत्नी। तमाम संघर्षों के बाद उसने आज समाज में अपने बेटे को जो मुकाम दिलाया है वह काबिले तारीफ है। संघर्षों के बीच लाला छविराम की पत्नी ने अपने बेटे अजय पाल यादव को पढ़ा-लिखाकर उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर बनाया।

 

wife of Dacoit chhaviram made sub inspector to son

चंबल की पहली महिला डकैत

इसी तरह पुतलीबाई भी एक डकैत थीं। जिन्हें चंबल की पहली महिला डकैत के नाम से जाना जाता है। डकैत बनने से पहले गौहरबानो नाम था पुतलीबाई का। वह पेट पालने के नाचने का काम करती थीं। खूबसूरत पुतलीबाई को एक दिन सुल्ताना डाकू ने अपने गिरोह में शामिल कर लिया। चंबल के बीहड़ों में ही पुतलीबाई मां बनीं। 1950 से 1956 तक बीहड़ों में उसका आतंक रहा। लेकिन अपने बच्चों को पुतलीबाई ने जिम्मेदार नागरिक बनाया। पहचान उजागर न करने की शर्त पर उनके परिजन कहते हैं पुतलीबाई डकैत होते हुए भी एक आदर्श मां थीं।

सागर जैसा विशाल बनाना है बेटे को सीमा परिहार

चंबल के बीहड़ों में सीमा परिहार का भी बड़ा नाम था। जंगल में ही उसने अपने बच्चे सागर को जन्म दिया। पहले दस्यु सरगना लालाराम की गैंग में शामिल सीमा की शादी गिरोह के एक सदस्य निर्भय गुर्जर से हुई। लेकिन, सीमा के लालाराम से एक बेटा है। बेटे का नाम सागर है। वह एक अच्छे स्कूल में पढ़ रहा है। जमानत पर चल रही सीमा परिहार औरैया में में राजनीति में सक्रिय हैं वह कहती हैं अतीत के दाग को छुड़ाने के लिए वह बेटे सागर को सागर जैसा विशाल बनाना चाहती हैं ताकि पूरी दुनिया में उसका नाम हो।

सुरेखा चाहती हैं बेटा आगे चलकर मिटाए कलंक

सीमा परिहार की ही तरह चंबल की डकैत चंदन की पत्नी रेनू यादव, डकैत सलीम गुर्जर की प्रेयसी सुरेखा उर्फ सुलेखा, जगन गुर्जर की पत्नी कोमेश गुर्जर की कहानी अलग नहीं है। चंबल के बीहड़ों में रहते हुए इन सभी ने मातृत्व सुख हासिल किया। सुरेखा एक बेटे की मां हैं। भिंड की सुरेखा फिलहाल गांव में रह कर अपना जीवन बसर कर रही हैं। वे अपने बेटे को पढ़ा रही हैं ताकि वह आगे चलकर मां का कंलक मिटा सके। 5 जनवरी 2005 को औरैया जिले में पुलिस मुठभेड़ में मारे गये कुख्यात डकैत चंदन यादव गैंग की महिला डकैत रेनू यादव एक बेटी की मां हैं। रेनू की बेटी अपनी नानी के पास औरैया के मंगलीपुर गांव मे रह रही है। वह भी अच्छे भविष्य के लिए पढऩा लिखना सीख रही है।

 

wife of Dacoit chhaviram made sub inspector to son

कोमेश और शीला के बच्चे गढ़ रहे जीवन की नींव

अरविन्द गुर्जर और रामवीर गुर्जर ने 2005 में बबली और शीला से बीहड़ में शादी रचाई। रामवीर की बीबी शीला ने नर्मदा नाम की एक बेटी को जन्म दिया। वह मप्र के एक नामी स्कूल में पढ़ाई कर रही है। महिला डकैत कोमेश गुर्जर भी बीहड़ में मां बनी। धौलपुर जिले के पूर्व सरपंच छीतरिया गुर्जर की बेटी कोमेश अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए बंदूक उठा कर बीहड़ों में कूदी थी। जगन गुर्जर और कोमेश से उसके संतान हुई। इनके बच्चे भी जीवन की नींव मजबूत करने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं।

इन महिला डकैतों का कहानी भी दिलचस्प

अस्सी के दशक में लवली पांडे, अनीता दीक्षित, नीलम गुप्ता, सरला जाटव, सुरेखा, बसंती पांडे, आरती, सलमा, सपना सोनी, रेनू यादव, शीला इंदौरी, सीमा यादव, सुनीता पांडे, गंगाश्री आदि ने भी बीहड़ में दस्तक दीं। परंतु इनमें से कोई भी सीमा परिहार जैसा नाम और शोहरत नहीं हासिल कर सकीं। सरला जाटव, नीलम गुप्ता और रेनू यादव के अतिरिक्त अन्य महिला डकैत पुलिस की गोलियों का शिकार हो गईं। हालांकि, एक समय लवली पांडेय सीमा परिहार के मुकाबले ज्यादा खतरनाक साबित हुई थीं। इनमें से अधिकतर मां बन चुकी हैं। ये सभी कहती हैं मेरे दिल में भी धडक़ता है मां का दिल।

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