आठ शताब्दी तक 80 राजाओं के राजतिलक का गवाह रहा है नोट्रे-डेम

आठ शताब्दी तक 80 राजाओं के राजतिलक का गवाह रहा है नोट्रे-डेम

Mohit Saxena | Publish: Apr, 21 2019 07:39:20 AM (IST) | Updated: Apr, 21 2019 08:19:22 AM (IST) यूरोप

  • नोट्रे-डेम चर्च को बने 850 वर्ष हो चुके हैं
  • इसने पांच गणतंत्रों का गठन और दो विश्व-युद्ध को झेला है
  • 1163 में चर्च का निर्माण शुरू हुआ

पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस में सीन नदी के तट पर बना ऐतिहासिक चर्च आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है। बीते सप्ताह इस चर्च में लगी आग ने इस इमरात को काफी नुकसान पहुंचाया। इस इमारत में आग लगने के बाद फ्रांस की जनता में शोक की लहर देखने को मिली। धूं-धूं जलती इमारत को देख लोगों की आखों से आंसू निकल पड़ें। ऐसा शायद तभी होता है जब किसी के प्रति लोगों की आस्था जुड़ी होती है। आपको बता दे नोट्रे-डेम चर्च को बने 850 वर्ष हो चुके हैं। इसने 80 राजाओं का राजतिलक, दो साम्राज्यों का राजपाट, पांच गणतंत्रों का गठन और दो विश्व-युद्ध को झेला है। ये सब किसी उपलब्धि से कम नहीं है।

 

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गुजरते वक्त के साथ इतिहास बनते गए

ये चर्च ना तो दुनिया का सबसे ऊंचा चर्च है और ना ही सबसे बड़ा। लेकिन इसकी अपनी ख़ासियत हैं। इस चर्च ने अपनी आंखों के सामने गुजरते वक्त के साथ इतिहास बनते देखा है। फ़्रांस के इतिहास में घटित कई घटनाक्रमों का यह गवाह रहा है। इस चर्च की स्थापना 13वीं शताब्दी में हुई। वर्ष 1163 में जब चर्च का निर्माण शुरू हुआ, तब पेरिस कला का केंद्र हुआ करता था। चर्च को बनने में 180 साल लगे। जब ये खूबसूरत चर्च बनकर तैयार हुआ, तब इतिहास में काफी उठापठक हो रही थी।

 

 

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किंग हेनरी छठे के राजतिलक का गवाह रहा

यह चर्च वर्ष 1431 में इंग्लैंड के दस साल के बीमार बालक किंग हेनरी छठे के राजतिलक का गवाह रहा है। इसके बाद साल 1804 में इसी चर्च में नेपोलियन को फ्रांस की सत्ता दी गई। इस चर्च की एक खासियत यहां का संगीत भी है। चर्च का इतिहास बताता है कि संगीत यहां हमेशा से मौजूद रहा।

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नोट्रे-डेम से जुड़ी खास बातें

  • यह चर्च कई बार हिंसा और आगजनी का शिकार हुआ, लेकिन हर बार ही इसको दोबारा खड़ा कर दिया गया।

  • 12वीं सदी का प्रसिद्ध नॉट्रे डेम कैथेड्रल चर्च यूरोपीय संस्‍कृति का प्रतीक था।

  • 1991 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहरों की सूची में शामिल किया था।

  • 1790 में फ्रांस में हुई क्रांति में इस चर्च को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। 1844 और 1864 में इसका नवीनीकरण किया गया था।

  • नेपोलियन प्रथम जब फ्रांस की सत्ता पर काबिज हुए थे तो यह चर्च उस पल का भी गवाह बना था।

  • माना जाता है कि यहां पर कभी गालो-रोमन मंदिर हुआ करता था जो ब्रहस्‍पति ग्रह को समर्पित था।

  • 1225-1250 में अपर गैलरी को बनाया गया था। इसके साथ ही चर्च के बाहर बने दो टावर का निर्माण भी किया गया।

  • 1548 में इसमें लगी नॉत्र डाम की मूर्ति को तोड़ दिया गया था। लुइस 14वें और लुइस 15वें काल में इस मूर्ति को बनाया गया था।

  • 1801 में नेपोलियन बोनापार्ट ने दोबारा इसकी मरम्‍मत कराई थी। यहीं पर उन्होंने अपनी सत्ता का ऐलान किया और यहीं उनकी शादी भी हुई।

  • 1944 में लिब्रेशन ऑफ पेरिस के दौरान चर्च में तोड़ाफोड़ी की गई थी। यहां पर लगे रंग बिरंगे कांच को तोड़ दिए गए थे।

  • यहां पर 26 अगस्‍त 1944 को जर्मनी से मुक्ति का जश्‍न भी मनाया गया। हिटलर की मौत के बाद विश्वयुद्ध में जर्मनी हार गया था। इसके बाद फ्रांस और ब्रिटेन महाशक्ति बनकर उभरे।

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