World War II के सैनिकों को सम्मान देने जुटे दुनिया भर के नेता, ताजा हुईं D- Day की यादें

World War II के सैनिकों को सम्मान देने जुटे दुनिया भर के नेता, ताजा हुईं D- Day की यादें

Mohit Saxena | Updated: 07 Jun 2019, 02:06:19 PM (IST) यूरोप

  • दूसरे विश्वयुद्ध के सबसे बड़े सैन्य अभियान 'डी-डे' की 75वीं वर्षगांठ मनाई
  • 10,000 सैनिकों ने अपना खून बहाया और हजारों ने जान गंवाई
  • 75 साल पहले इस दिन 10,000 सैनिकों ने अपना खून बहाया था

वाशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे विश्वयुद्ध के सबसे बड़े सैन्य अभियान 'डी-डे' की 75वीं वर्षगांठ मनाई। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद थे। फ़्रांस के नॉरमैंडी शहर में दूसरे विश्वयुद्ध के सबसे बड़े सैन्य अभियान 'डी-डे' की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई, जहां प्रधानमंत्री थेरेस मे और दूसरे विश्व युद्ध में भाग लेने वाले भूतपूर्व सैनिक भी मौजूद थे।ट्रंप की पत्नी मेलानिया भी मौजूद थीं।

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10,000 सैनिकों ने अपना खून बहाया

डोनाल्ड ट्रंप, थेरेसा मे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने नॉरमैंडी की लड़ाई में मारे गए ब्रिटिश सैनिकों को सम्मानित करने के लिए स्मारक के उद्घाटन समारोह में भाग लिया। इस दौरान ट्रंप ने कहा कि हम स्वतंत्रता के शुभ मौके पर एकत्र हुए हैं। 75 साल पहले इस दिन 10,000 सैनिकों ने अपना खून बहाया और हजारों ने स्वतंत्रता के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। उन्होंने स्वतंत्रता के अस्तित्व के लिए अपना बलिदान दिया। ट्रंप ने कहा कि आज, हम उन लोगों को याद करते हैं जिन्होंने इस युद्ध में हिस्सा लिया। हम उन सभी का सम्मान करते हैं जिन्होंने यहाँ लड़ाई लड़ी। उन्होंने इस मैदान को सभ्यता के लिए वापस जीत लिया। इस वर्षगांठ के अवसर पर नेताओं ने विभिन्न तरह से पूर्व सैनिकों को श्रद्धाजलि दी। पेश है कुछ ऐसी तस्वीरें जिसमें इन नेताओं ने इनके प्रति आदर प्रकट किया।

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क्यों मनाया जाता है डी-डे

वर्ष 1944 का 06 जून, 20वीं शताब्दि को पूरी तरह बदल देने वाला वह महत्वपूर्ण दिन था। इसने यूरोप ही नहीं पूरी इंसानी सभ्यता को बदल दिया था। कई देश द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) की आग में जलकर नष्ट हो गए थे। इसके बाद इन देशों का रुख पूरी तरह से बदल गया। साल 1944 में द्वितीय विश्व युद्ध अपने चरम पर था, नाजियों के बर्बरता मचा रखी थी पूरे यूरोप में हाहाकार मचा था। सभी देशों के सामने करो या मरो वाली स्थिति थी। अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत तमाम तत्कालीन मित्र राष्ट्र किसी तरह द्वितीय विश्व युद्ध को खत्म करना चाहते थे। इसके बाद एक लाख 56 हजार सैनिक जर्मन सेना के खिलाफ खड़े हुए। यह सेना संयुक्त सेना थी। छह जून 1944 को उत्तरी फ्रांस के नॉरमैंडी शहर के तटीय इलाके पर गुपचुप तरीके से घुसपैठ की गई। यह भूभाग जर्मनी के कब्जे में था। सबमरीन के जरिए यह घुसपैठ की गई। यहां पर संयुक्त सेना की जीत हुई। इस ऑपरेशन को डी-डे D-Day के नाम से जाना जाता है।

 

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ब्रिटिश सैनिकों के नए स्मारक के सामने ब्रिटिश प्रधानमंत्री और फ्रांसीसी राष्ट्रपति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए। यह समुद्री तट के किनारे बना हुआ है।

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फ्रांस के राष्ट्रपति मैकों और ब्रिटेन की पीएम थेरेसा में श्रद्धांजलि अर्पित की।

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थेरेसा मे ने वेर-सर-मेर शहर में हो रहे एक समारोह में भाग लिया। नॉरमैंडी मेमोरियल में पहली बार 6 जून 1944 की सुबह ब्रिटिश सेनाएं यहां उतरी थीं।

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लड़ाई में मारे और घायल हुए ब्रिटिश सैनिकों को मैक्रों ने आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने नॉरमैंडी में अब तक कोई स्मारक न होने को गलत बताया।

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