ब्रेक्जिट कैम्पेन की पोस्टर गर्ल का थेरेसा मे सरकार को गुड बाय

विदेशी राजनयिकों से गोपनीय मुलाकात है त्यागपत्र की वजह ।

By: Prashant Jha

Published: 10 Nov 2017, 01:49 AM IST

लंदन: ब्रिटेन में भारतीय मूल की वरिष्ठ मंत्री प्रीति पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इंटरनेशनल डवलपमेंट सेक्रेटरी के तौर पर कार्यरत प्रीति ने अगस्त में इजराइल के निजी दौरे पर प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू और इजराइली अफसरों से मुलाकात की थी। उन्होंने इसकी जानकारी ब्रिटिश सरकार के किसी व्यक्ति को नहीं दी थी। इसे राजनयिक प्रोटोकोल का उल्लंघन माना गया। उनकी थैचराइट के रूप में पहचान है। वे ब्रेक्जिट कैम्पेन की पोस्टर गर्ल रहीं हंै और सीरिया पर बमबारी की भी प्रबल समर्थक रही हैं।

सीरिया पर बमबारी की समर्थक
2015 में विथम सीट पर दुबारा चुनाव जीतने पर उन्हें केबिनेट स्तर का मंत्री बनाया गया पहली बार पीएम डेविड कैमरन के साथ काम किया। उसी वर्ष हाउस कॉमंस में सीरिया पर बमबारी को लेकर मतदान में पटेल ने खुलकर समर्थन किया व पक्ष में वोटिंग की।


बीबीसी के खिलाफ शिकायत
प्रीति का जन्म युगांडा से लंदन आए एक गुजराती परिवार में हुआ था। पढ़ाई के बाद कंजरवेटिव पार्टी के सेंट्रल ऑफिस में नौकरी भी की।1995 से 1997 तक सर जेम्स गोल्डस्मिथ के नेतृत्व वाली रेफरेंडम पार्टी की स्पोक्सपर्सन रही हैं। 2014 में पीएम मोदी की जीत के बाद उनके बारे में बीबीसी के एक तरफा आलोचनात्मक कवरेज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराईथी।


एकमात्र अल्पसंख्यक मंत्री
ब्रिटेन की पीएम थेरेसा मे की करीबी प्रीति पटेल सरकार में एकमात्र अल्पसंख्यक मंत्री थीं। उनके इस्तीफे के बाद से मे की सरकार में अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं। वो मार्गरेट थैचर के समय से ही वहां की राजनीति में सक्रिय थीं।


गोपनीय मुलाकात बड़ी भूल

विदेशी राजनयिकों से मुलाकात उनके कामकाज का हिस्सा था, उनके ऊपर इस्तीफा देने का दबाव इसलिए बना क्योंकि उन्होंने मुलाकात के बारे में विदेश मंत्रालय को सूचित नहीं किया। वे बिना सूचना दिए अगस्त की छुट्टियों के दौरान इजराइली पीएम सहित कई राजनेताओं और व्यावसायियों से मिलीं।

 

ब्रेक्जिट कैम्पेन की अगुवा

जब पीएम डेविड कैमरन ने ईयू से ब्रिटेन के अलग होने के लिए रेफरेंडम की घोषणा की तो प्रीति ने ब्रेक्जिट कैम्पेन में बढ़ चढक़र हिस्सा लिया। राष्ट्रवादी विचारों, भाषणों की वजह से वह इस कैम्पेन की पोस्टर गर्ल बन गई थीं। ईयू से ब्रिटेन को अलग करने के पीछे उनका तर्क यह था कि ईयू का ब्रिटेन की राजनीति में हस्तक्षेप बढ़ गया है।

Prashant Jha
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