जलियांवाला बाग हत्याकांड पर ब्रिटेन का बयान, माफी मांगने से पैदा होंगी कई मुश्किलें

  • जलियांवाला बाग हत्याकांड की 100वीं बरसी
  • 13 अप्रैल 1919 को हुआ था जलियांवाला बाग हत्यकांड
  • ब्रिटेन पर फिर बढ़ा माफी मांगने का दबाव

By: Siddharth Priyadarshi

Updated: 10 Apr 2019, 01:43 PM IST

लंदन। ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने कहा है कि जलियांवाला बाग हत्याकांड पर मांगी मांगने से कई तरह की दूसरी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। ब्रिटेन के विदेश मंत्री मार्क फील्ड ने हाउस ऑफ कॉमन्स कॉम्प्लेक्स के वेस्टमिंस्टर हॉल में जलियांवाला बाग हत्याकांड पर आयोजित एक बहस में कहा कि इतिहास में यह एक "शर्मनाक प्रकरण" के रूप में दर्ज है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान को बार-बार अतीत में खींचने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा की बार-बार इस घटना के लिए माफी के मांग ब्रिटिश राज से संबंधित कई दूसरी समस्याओं को पैदा करेगा। आपको बता दें कि 13 अप्रैल, 2019 को इस घटना के 100 साल पूरे हो रहे हैं।

माफी मांगने से पैदा होंगी मुश्किलें

ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के मंत्री मार्क फील्ड ने कहा, "ब्रिटेन के औपनिवेशिक अतीत के बारे में मेरे विचार थोड़े रूढ़िवादी हैं। मैं अतीत में हुई चीजों के लिए माफी मांगने में थोड़ा हिचक महसूस करता हूं।" उन्होंने आगे कहा, "यह भी चिंता है कि किसी भी सरकारी विभाग को किसी भी बारे में माफी मांगने के कई वित्तीय निहितार्थ हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम इस तरह की कई घटनाओं को साथ मिलाकर देखें तो ऐसा लगेगा कि किसी विशेष घटना की माफी मांगने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में हुए नरसंहार के दिन को ब्रिटेन सरकार द्वारा 'गहरे अफसोस' के रूप में मनाया जाने को उचित ठहराते हुए उन्होंने कहा कि किसी दिन की 100 वीं वर्षगांठ को जरूर याद किया जाना चाहिए।

अतीत को कुरेदने से कोई लाभ नहीं

मार्क फील्ड ने कहा, "भारत के साथ हमारे आधुनिक संबंधों को भविष्य के जरूरतों पर केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूके सरकार द्वारा पहले से ही व्यक्त किए गए "गहरे अफसोस" की तुलना में इस घटना के लिए शायद थोड़ा अधिक आवश्यक है। मंत्री ने कहा, "भारत के साथ समृद्ध संबंधों की पूरी संभावना है और जलियांवाला बाग पर कोई अलग स्पष्टीकरण इसे विशेष रूप से मजबूती देगा।" आपको बता दें कि भारतीय मूल के लेबर सांसद वीरेंद्र शर्मा ने ब्रिटिश प्रधान मंत्री थेरेसा मे से औपचारिक माफी मांगने का आह्वान किया है। अन्य कई लोगों ने इस मांग का समर्थन किया और जान गंवाने वालों की याद में एक भौतिक स्मारक के निर्माण की संभावना जताई। व्यवसायी सरदार बलबीर सिंह कक्कड़ की अध्यक्षता में अंतर्राष्ट्रीय पंजाब फोरम के सदस्यों सहित कई भारतीयों ने 13 अप्रैल, 1919 को हुए नरसंहार की शताब्दी मानाने का ऐलान किया है।

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