scriptDespite the ban, the private builder cut the colony in the Saat Bagh | यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के गृहनगर कोटा में अंधेर: रोक के बावजूद राजपरिवार के 'सात बाग' में निजी बिल्डर ने काट दी कॉलोनी | Patrika News

यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के गृहनगर कोटा में अंधेर: रोक के बावजूद राजपरिवार के 'सात बाग' में निजी बिल्डर ने काट दी कॉलोनी

कोटा। राजस्थान के कद्दावर स्वायत्त शासन व नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के गृहनगर कोटा के थेकड़ा में जमीन खरीद-बेचान का बड़ा खेल चल रहा है। यहां पूर्व राजपरिवार से जुड़ी जिस जमीन (सात बाग) के खरीद-बेचान पर वर्ष 2014 में रोक लगाई गई थी, उसी इलाके में से 16 हेक्टेयर जमीन 3 लोगों को बेच दी गई। नामांतरण खोलने के साथ कॉलोनी सृजित कर पट्टे भी जारी कर दिए गए। मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत पहुंचने के बाद जिला कलक्टर ने जनहित के आधार पर पट्टे जारी करने पर रोक लगाकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जयपुर

Published: May 10, 2022 11:18:15 am

राज्य के नगरीय विकास मंत्री के गृह नगर कोटा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कोटा के थेकड़ा इलाके में 7 बागों की कई बीघा जमीन है। इसमें से करीब 16 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री 17 सितंबर, 2021 को बिल्डर-कॉलोनाइजर नीरज सुवालका, उनकी पत्नी सुनीता सुवालका और बेटी मंशिका सुवालका के नाम की गई। गौर करने की बात ये है कि रजिस्ट्री के तीन दिन बाद ही नामांतरण भी खुल गया। जनवरी, 2022 में आवासीय योजना सृजित करने के लिए कोटा नगर विकास न्यास में आवेदन पहुंचा। आपत्ति मांगने की औपचारिकता पूरी कर न्यास ने आवासीय योजना का नक्शा व ले आउट प्लान भी 16 मार्च को पास कर दिया। लेकिन कॉलोनी सृजित करने के साथ ही विवाद ने भी तूल पकड़ लिया। इस मामले की जांच चल रही है, जिसके बाद स्थिति साफ होगी।
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कुल हैं 187 भूखंड, जारी हो चुके हैं 42 पट्टे

इस योजना में विभिन्न क्षेत्रफल के 187 भूखंड बताए जा रहे हैं। योजना सृजित होते ही इनमें से 42 भूखंडों के तो पट्टे भी जारी कर दिए गए। इस बीच, कई लोग
बिल्डर-कॉलोनाइजर को भूखंड के लिए बुकिंग राशि भी दे चुके हैं।
मौखिक आदेश पर ही दौड़ रहे अफसर

खास बात यह है कि इस हाइप्रोफाइल मामले में संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर, नगर विकास न्यास के पास एक भी लिखित शिकायत नहीं पहुंची, लेकिन
फिर भी उच्च से निचले स्तर तक अफसर, कर्मचारियों के हाथ-पैर फूले हुए हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में सीधे 'सरकार' के स्तर पर निर्देश आ रहे
हैं। नगर विकास न्यास ने भी कलक्टर, संभागीय आयुक्त को वस्तु स्थिति भेजी है, लेकिन यह आधिकारिक रूप में नहीं है। इस पूरे मामले में कलक्टर ने
अतिरिक्त कलक्टर के निर्देशन में कमेटी गठित की, जो वर्ष 1963 से अब तक का रिकॉर्ड खंगाल रही है।
अब इनकी भूमिका पर उठ रहे हैं सवाल

तत्कालीन कलक्टर उज्जवल राठौड़: तत्कालीन कलक्टर और हाईकोर्ट के स्टे बावजूद इस जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई। कलक्टर ही नगर विकास न्यास के
अध्यक्ष भी हैं। न्यास ने ही नक्शे पास करने में देर नहीं लगाई।
कलक्टर हरिमोहन मीणा: इस पूरे प्रकरण को समझने और एक्शन लेने में देरी। ऊपरी आदेश पर रोक लगाई। स्वयं के स्तर पर ही जांच में देरी क्यों।

तहसीलदार: लाडपुरा तहसीलदार खुद इस मामले में हाईकोर्ट में ओआइसी हैं। फिर इस जमीन का नामांतरण खोलने से पहले पूरे मामले की जांच क्यों नहीं
की। न्यास को एनओसी भी दे दी।
पटवारी: जमीन से जुड़े हर पहलू की गहनता से जांच किए बिना ही अपनी रिपोर्ट क्यों दे दी।

यूआइटी सचिव राजेश जोशी: हाईकोर्ट स्टे के बावजूद नक्शे कैसे पास कर दिए।

इसलिए मामला बना हाइप्रोफाइल
यह मामला कोटा के पूर्व राजपरिवार के भीम सिंह के सीलिंग प्रकरण से प्रभावित जमीन से जुड़ा हुआ है। इसी परिवार के सदस्य इज्येराज सिंह कांग्रेस से
सांसद रह चुके हैं, जबकि इनकी पत्नी कल्पना सिंह अब भाजपा की ओर से लाडपुरा सीट से विधायक हैं।
अब किसी का कार्रवाई का दिखावा, तो कोई झाड़ रहा पल्ला

कोटा के कलक्टर हरिमोहन मीणा का कहना है कि जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, तत्काल खरीद, बेचान पर रोक लगा दी गई है। अब इससे जुड़े सारी जमीन के प्रकरण की जांच कर रहे हैं। 2014 में तत्कालीन कलक्टर ने जो रोक लगाई है, उसे भी देख रहे हैं। राजस्व विभाग को भी लिखा है कि उनके स्तर पर विशेषज्ञों की टीम भेजकर जांच कराएं। वहीं तत्कालीन कलक्टर, कोटा और अभी जयपुर विकास प्राधिकरण में सचिव उज्जवल राठौड़ का कहना है कि जमीन विवाद के कई मामले चल रहे हैं। ऐसे किसी प्रकरण की मुझे जानकारी नहीं है। मौजूदा कलक्टर ही बता सकते हैं। जबकि नगर विकास न्यास, कोटा के सचिव राजेश जोशी का कहना है कि जिला कलक्टर को प्रकरण की वस्तुस्थिति बता दी है। उनके स्तर पर जांच चल रही है, इसलिए ज्यादा जानकारी वही बता सकते हैं।

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