Exclusive : अयोध्या में राम मंदिर बाद में बनाइये पहले रामलला के इन घरों को संवारिये यहाँ भी बसते हैं राम

Anoop Kumar

Publish: Dec, 07 2017 03:04:02 (IST)

Faizabad, Uttar Pradesh, India
Exclusive : अयोध्या में राम मंदिर बाद में बनाइये पहले रामलला के इन घरों को संवारिये यहाँ भी बसते हैं राम

अयोध्या में भगवान श्री राम के सैकड़ों ऐसे मंदिर हैं जिनकी देख रेख न होने के कारण या तो वो गिर चुके हैं या जर्जर होकर गिरने की कगार पर है

अनूप कुमार
फैज़ाबाद (अयोध्या) इन दिनों देश की सबसे बड़ी अदालत में देश के सबसे बड़े मुकदमे की सुनवाई को लेकर सियासी हलके में भी तूफ़ान मचा हुआ है ,अयोध्या के विवादित राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तारीखें टालने की कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल की सिफारिश से बीजेपी नेताओं को कांग्रेस पर जुबानी हमला करने का मौक़ा मिल गया है .वहीँ दूसरी तरफ अयोध्या में विवादित परिसर में मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर में विराजमान रामलला को भव्य मंदिर में आसीन करने की मांग भी जोर शोर से उठायी जा रही है,लेकिन अहम सवाल ये भी है कि जिस अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान मंदिर को लेकर इतना बवाल हो रहा है उसी अयोध्या में ऐसे सैकड़ों मंदिर हैं जहाँ रहने वाले रामलला सरकार जर्जर भवन में रह रहे हैं और उनके भोग राग और पूजन की अच्छी व्यवस्था भी नही है ,आलम ये है कि सैकड़ों मंदिर तो ऐसे हैं जो गिरने की कगार पर हैं और प्रशाशन ने ऐसे मंदिरों को मरम्मत कराने या गिराने के निर्देश भी जारी किये हैं और बाकायदा नोटिस चस्पा कर दी थी .

अयोध्या में भगवान श्री राम के सैकड़ों ऐसे मंदिर हैं जिनकी देख रेख न होने के कारण वो या तो वो गिर चुके हैं या जर्जर होकर गिरने की कगार पर है


आज हम आपको बता रहे हैं उस अयोध्या की जमीनी हकीकत जहां भगवान श्री राम के जन्मस्थल के दावे को लेकर उस स्थान पर मंदिर निर्माण को लेकर कत्लो गारद भी हुआ और आज ये मामला देश ही नहीं पूरी दुनिया में एक सियासी मुद्दा है बीजेपी,आर एस एस,विहिप और बजरंग दल जैसे हिंदूवादी संगठन अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए सड़क से लेकर संसद तक आन्दोलन कर चुके हैं लेकिन मंदिर का निर्माण नही करा पाए लेकिन अयोध्या की एक स्याह तस्वीर ये भी है कि जिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के मंदिर को बनाने के लिए अयोध्या में सियासी दंगल दशकों से चलता आ रहा है उसी अयोध्या में भगवान श्री राम के सैकड़ों ऐसे मंदिर हैं जिनकी देख रेख न होने के कारण वो या तो वो गिर चुके हैं या जर्जर होकर गिरने की कगार पर है . सवाल दीगर है कि भगवान तो कण कण में बसते हैं तो क्या अयोध्या के इन जर्जर मंदिरों में भगवान श्री राम नही रहते क्या सिर्फ राम जन्म भूमि पर ही भगवान वास करते हैं अगर हाँ तो विवादित स्थल को छोड़कर आखिर अयोध्या के करीब 6 हजार छोटे बड़े मंदिरों की किसकी पूजा हो रही है .

मंदिरों के शहर के नाम से भी जानी जाती है अयोध्या

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पवन जन्मस्थली अयोध्या हिंदू धर्म की आस्था के लोगों का केंद्र रही है ,करीब 5 किलोमीटर के दायरे में फैले इस प्राचीन नगर में करीब 5 हज़ार से अधिक छोटे बड़े मंदिर है जिसके कारण इस शहर को मंदिरों का शहर भी कहा जाता है , बेहद प्राचीन माने जाने वाले इस नगर में हजारों ऐसे भवन है और मंदिर है जो सैकड़ों वर्ष पुराने हैं इनमें से कुछ भवन और मंदिर ऐसे हैं जो उचित रखरखाव न होने के कारण बेहद जर्जर हालत में हैं और कभी भी किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं , जिसके कारण जिला प्रशासन ने ऐसे जर्जर भवनों को चिन्हित कर उन्हें खाली करने की नोटिस मंदिर और भवन स्वामियों को जारी कर चूका है . धार्मिक नगरी अयोध्या के सबसे प्राचीन क्षेत्र स्वर्गद्वारी इलाके में बने मंदिर और भवनों की स्थिति सबसे ज्यादा जर्जर है जिला प्रशासन ने नगरपालिका अयोध्या के जरिए जिन जर्जर भवन और मंदिरों की सूची बनाई है उसमें अकेले स्वर्ग द्वार मोहल्ले में ऐसे 22 मंदिर और भवन है जो बेहद जर्जर हालत में है और कभी भी गिर सकते हैं .

अयोध्या के इन मंदिरों की हालत है सबसे ज्यादा खस्ताहाल

इसके अलावा गोलाघाट इलाके में 17 निर्मोचन घाट में 10,विद्या कुंड मोहल्ले में 17 और कजियाना में 14 मकान और मंदिर ऐसे हैं जो बेहद जर्जर हालत में है .इन मंदिरों में प्राचीन जेता नाथ मंदिर उर्दू बाज़ार , अयोध्या राज मंदिर बाबू बाज़ार , मठिया मंदिर उर्दू बाज़ार , पत्थर मंदिर वासुदेव घाट , बेतिया मंदिर मीरपुर ,मनकापुर हॉउस प्रमुख हैं इनके अतिरिक्त अन्य कई मंदिरों को पूर्व में नगर पालिका अयोध्या ने इन भवन के स्वामियों को नोटिस जारी करते हुए उन्हें खाली करने के निर्देश दिए थे लेकिन इस नोटिस का कोई असर देखने को नहीं मिला और ये मंदिर आज भी जर्जर हालत में खड़े उपेक्षा के शिकार हैं .

बीते साल 2016 सावन मेले में बेकसूर श्रद्धालुओं की मौत के बाद हरकत में आया था प्रशाशन

साल 2016 में हुए सावन मेले के दौरान अयोध्या के तुलसी नगर इलाके में बेहद जर्जर यादव मंदिर की छत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी और इस हादसे में अयोध्या सावन झूला मेला में शामिल होने आए दो श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई और करीब 4 श्रद्धालु बुरी तरह से जख्मी हो गए थे , जिसके बाद हरकत में आए जिला प्रशासन ने अब अयोध्या नगर के 174 जर्जर मंदिर और भवनों को चिन्हित किया है जो कभी भी गिर सकते हैं साथ ही जिला प्रशासन ने इन मंदिर और भवन में रहने वाले लोगों को तत्काल इन्हें खाली करने की नोटिस जारी कर दी थी , इस बार भी सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर बाबरी मस्जिद मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के बाद ये सवाल मौजूं हो उठा है कि आखिर एक राम मंदिर बनाने के लिए लड़ने वाले सियासी दलों की नज़र में अयोध्या के सैकड़ों जर्जर मंदिर क्या भगवान श्री राम का घर नहीं है ..

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