हमारे वालिद की बरसी है आ जाइये नेता जी - इक़बाल अंसारी

बाबरी मस्जिद मुकदमे के मुख्य मुद्दई रहे मरहूम हासिम अंसारी की दूसरी बरसी में शामिल होने के लिए बेटे इकबाल को करनी पड़ी गुजारिश तब पहुँचे पूर्व सपा विधायक तेजनारायण पाण्डेय

By: Satya Prakash

Updated: 21 Jul 2018, 07:52 AM IST

अयोध्या : धार्मिक नगरी अयोध्या के राम जन्मभूमि व बाबरी मस्जिद विवाद के मुख्य मुद्दई रहे मरहूम हासिम अंसारी को उनके दूसरी बरसी पर श्रद्धांजलि दिया गया. वर्ष 2016 में 20 जुलाई को अंतिम सांस ली थी उनके निधन के बाद उनके आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लग गया था | हाशिम अंसारी के निधन पर सबसे पहले शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचने वालों में अयोध्या के साधु संत थे. जिसके बाद समाजवादी पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने हाशिम अंसारी को अंतिम श्रद्धांजलि दी और उनके निधन को एक बहुत बड़ी क्षति बताया | लेकिन हाशिम अंसारी के निधन के बाद उनकी पुण्यतिथि पर ही वह लोग उन्हें भूल गए जो हाशिम अंसारी को कौमी एकता और भाईचारे की मिसाल कहते थे. शुक्रवार को हाशिम अंसारी के दूसरी बरसी पर उनके बेटे इकबाल अंसारी ने अपने घर पर कुरानखानी का आयोजन किया जिसमें शामिल होने के लिए इक़बाल द्वारा कई लोगो व नेताओ के बुलाए जाने के बाद सिर्फ तेजनारायण पाण्डेय व गुलशन बिंदु पहुंचे .

अयोध्या में गंगाजमुनी तहजीब के मिशल थे मरहूम हासिम अंसारी

अपनी जिंदगी के आखिरी दौर तक मंदिर मस्जिद झगड़े को समाप्त करने के लिए संघर्ष करते हुए इस दुनिया से रुखसत हुए मरहूम हाशिम अंसारी ने अपनी जिंदगी के आखिरी लम्हों में अयोध्या के साधू संतो से मुलाकात कर इस विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने की कवायद पर जोर दिया था. और महंत ज्ञानदास के साथ सुलह समझौते की मुहिम चलाकर हाशिम अंसारी चर्चा में आए और उन्हें देश में गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की थी. और हाशिम अंसारी ने अपने निधन से कुछ महीने पहले यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि वह अब रामलला को कैद में नहीं देखना चाहते जिसके बाद अयोध्या में चल रहे मंदिर मस्जिद के झगड़े को आपसी सुलह समझौते के जरिए सुलझाने के लिए तमाम प्रयास किए गए और उनके इस प्रयास को तमाम राजनीतिक दलों ने भी सराहा. लेकिन जीवित अवस्था में हाशिम अंसारी इस बड़े मुद्दे को सुलझा नहीं पाए. तथा उनके जाने के बाद हाशिम अंसारी के बेहद करीबी रहे अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञानदास व अन्य लोगो ने मुहिम चलाने की बात छोड़िए उनके निधन के दूसरी बरसी पर भी श्रद्धांजलि नहीं पहुचे.


इस विवाद पर राजनीति बंद होने पर ही आ सकता है फैसला

मरहूम हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने बताया कि हमारे वालिद साहब हमेशा देश की तरक्की की बात की और अयोध्या में हिन्दू मुस्लिम को एक कर हमेशा गंगाजमुनी तहजीब पेश करते रहे है हमारे वालिद अंतकाल के पहले यह चाहते थे कि इस विवाद का हल जल्द से जल्द हो जाये लेकिन आज भी यह तारीख खेल चल रहा है हम भी यह चाहते है कि यह विवाद जल्द समाप्त हो जिससे और दोनों पक्ष मिल कर आदालत के निर्णय का स्वागत करे लेकिन अभी भी लगातार तारीख मिल रही है और इसमें कुछ लोग अपने राजनीति रोटी सकने वाले रोड़े लगाते रहे है जब तक इस विवाद पर राजनीति समाप्त नहीं होगा इसका निर्णय नहीं आ सकता है

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