राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले निर्मोही अखाड़े में खड़ा हुआ बड़ा विवाद

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले निर्मोही अखाड़े में खड़ा हुआ बड़ा विवाद

Anoop Kumar | Publish: Apr, 17 2018 07:04:40 PM (IST) Faizabad, Uttar Pradesh, India

राम मंदिर मुकदमे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है लेकिन फैसले के आने से पहले ही अब पैरोकारी को लेकर नई लड़ाई अब कोर्ट की दहलीज लांघने को है

अनूप कुमार
फैजाबाद : देश की सबसे बड़ी अदालत में चल रहे देश के सबसे बड़े मुकदमे में एक पक्ष से पैरवी को लेकर दो पक्षकार आमने सामने आ गए हैं . सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि मामले की पैरवी को लेकर निर्मोही अखाड़ा में विवाद गहरा गया है, एक तरफ निर्मोही अखाड़ा के महंत भास्कर दास के निधन के बाद भास्कर दास के शिष्य महंत राम दास ने खुद को मुख्य पक्षकार बताकर सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की पैरवी कर रहे हैं तो दूसरी तरफ निर्मोही अखाड़ा के नवनिर्वाचित महंत दिनेन्द्र दास ने 10 अप्रैल सन 1990 में हाई कोर्ट द्वारा निर्मोही अखाड़े की अयोध्या शाखा के महंत को मामले का पक्षकार बताने के आदेश का हवाला देते हुए खुद को राम जन्मभूमि मामले की असली पैरोकार बताते हुए निर्मोही अखाड़े के पंचों की बैठक में निर्मोही अखाड़े की उप शाखा नाका हनुमान गढ़ी के वर्तमान महंत रामदास के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अभी तक अखाड़े के दो महंतों के बीच चल रही ये लड़ाई अब कोर्ट की दहलीज लांघने को है .दिलचस्प बात ये है कि अयोध्या में राम मंदिर मुकदमे की सुनवाई लगातार सुप्रीम कोर्ट में चल रही है लेकिन उस फैसले के आने से पहले ही अब पैरोकारी को लेकर भी एक मुकदमा खड़ा होने की स्थिति बन गयी है .

निर्मोही अखाड़े की अयोध्या शाखा के महंत दिनेंद्र दास ने लगाया महंत रामदास पर धोखाधड़ी का आरोप कहा मै असली पैरोकार

इस पूरे मामले पर निर्मोही अखाड़े की अयोध्या शाखा के महंत दिनेंद्र दास के वकील तरुण वर्मा ने फैजाबाद की नाका हनुमानगढ़ी को निर्मोही अखाड़ा की संपत्ति बताया है और कहा कि महंत रामदास नाका हनुमानगढ़ी पर अवैध कब्जा कर रखा है जिसके लिए बहुत जल्द ही महंत रामदास के खिलाफ विधिक कार्रवाई करवाई जाएगी.अब एक ही मुकदमे में एक ही नाम से दो पैरोकार सामने आ गए हैं जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है कि आखिर असली पैरोकार कौन है महंत राम दास या फिर महंत दिनेन्द्र दास.महंत दिनेन्द्र दास के वकील तरुण वर्मा ने आरोप लगाया कि फैजाबाद की नाका हनुमानगढ़ी निर्मोही अखाड़ा की संपत्ति है और उसे महंत रामदास ने कब्जा कर रखा है.

स्वर्गीय महंत भास्कर दास के शिष्य महंत रामदास ने वसीयत के आधार पर बताया खुद को राम मंदिर मुकदमे का पैरोकार

वहीं दूसरी तरफ नाका हनुमान गढ़ी महंत रामदास ने निर्मोही अखाड़े की अयोध्या शाखा के वर्तमान महंत दिनेन्द्र दास पर आरोप लगाया है कि दस्तावेजों में कूट रचना के जरिये महंत दिनेन्द्र दास खुद को राम जन्मभूमि मामले का पैरोकार बता रहे हैं और अब उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा. महंत राम दास ने बताया कि इसकी एक शिकायत एसडीएम कोर्ट और नगर निगम में भी की गई है. बुधवार को नाका हनुमान गढ़ी के महंत रामदास मीडिया के सामने अपने पक्ष में सबूत पेश करेंगे और उसके बाद अपनी अगली कार्यवाही के बारे में बताएँगे .

जानिये आखिर क्यूँ खड़ा हो गया है राम मंदिर मुकदमे की पैरोकारी को लेकर विवाद

बताते चलें कि निर्मोही अखाड़ा के महंत रहे भास्कर दास के निधन के बाद यह विवाद पैदा हुआ है . महंत भास्कर दास अयोध्या निर्मोही अखाड़ा में न रहकर फैजाबाद के नाका हनुमानगढ़ी में रहते थे और उनके शिष्य रामदास उनकी सेवा करते थे. महंत भास्कर दास के निधन के बाद रामदास को नाका हनुमानगढ़ी का महंत बना दिया गया और राम जन्मभूमि मामले की पैरवी भी भी वो खुद ही कर रहे थे . लेकिन जब महंत भास्कर दास का निधन हुआ तो निर्मोही अखाड़ा के पंचों ने महंत दिनेंद्र दास को अपना महंत चुन लिया जिसके बाद आधिकारिक तौर पर महंत दिनेन्द्र दास ने राम जन्मभूमि मामले की पैरवी का हक जताया और अपने वकील तरुण वर्मा के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया कि महंत भास्कर दास के निधन के बाद महंत दिनेन्द्र दास ही सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करेंगे .वहीं दूसरी तरफ स्वर्गीय महंत भास्कर दास के शिष्य रामदास ने भी वसीयत के जरिए खुद को राम जन्मभूमि मामले का पैरोकार बताया है. फिलहाल यह विवाद अब अखाड़े के पंचों की बैठक से निकल कर कोर्ट की दहलीज़ की ओर रुख कर चुका है और अब दोनों ही पक्ष एक दूसरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रहे हैं .

 

 

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