जानिये कजरी तीज की कथा और व्रत का महत्व आखिर कब से शुरू हुई परम्परा

जानिये कजरी तीज की कथा और व्रत का महत्व आखिर कब से शुरू हुई परम्परा

Anoop Kumar | Publish: Sep, 12 2018 11:09:07 AM (IST) Faizabad, Uttar Pradesh, India

हिन्‍दू धर्म को मानने वाली सुहागिन स्त्रियों के लिए इस पर्व का विशेष महत्‍व है. यही नहीं जो कुंवारी लड़कियां सुयोग्‍य वर चाहती हैं वे भी इस व्रत को रखती हैं

फैजाबाद : कजरी तीज का पर्व आज पूरे देश में मनाया जा रहा है | सुहागिन महिलायें और कुंवारी लडकियां इस व्रत को ख़ास तौर पर मना रही हैं | कजरी तीज का ये नाम क्यूँ पड़ा इसके पीछे भी एक कथा है | प्राचीन मान्‍यताओं के अनुसार मध्‍य भारत में कजली (Kajli) नाम का एक जंगल था, जिसका राजा दादुरै था. यहां के लोग चाहते थे कि उनके स्‍थान की प्रस‍िद्धि दूर-दूर तक फैले. इस वजह से वे अपने स्‍थान कजली के नाम पर गीत गाते थे. कुछ समय बाद राजा की मृत्‍यु हो गई और रानी नागमती सती हो गईं. इसके बाद से कजली के गाने पति-पत्‍नी के जनम-जनम के साथ के लिए गाए जाने लगे. यह त्‍योहार मुख्‍य रूप से महिलाओं का त्‍योहार है. इस दिन घरों में झूले डाले जाते हैं. महिलाएं अपनी सहेलियों के साथ नाचती-गाती हैं. कजरी तीज के दिन कजली गीतों का विशेष महत्‍व है. महिलाएं ढोलक और मंजीरे की थाप पर कजली गीतों पर झूमती हैं. हर त्‍योहार की तरह इस पर्व में भी खान-पान पर खास ध्‍यान दिया जाता है. हालांकि महिलाएं तो निर्जला व्रत रखती हैं लेकिन फिर भी घर में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं. इस दिन खास तौर पर गेहूं, जौ, चना और चावल के सत्तू में घी डालकर व्‍यंजन बनाए जाते हैं. पति के हाथों पानी पीने के बाद इन्‍हीं पकवानों को खाकर व्रत खोला जाता है. इनके अलावा खीर-पूरी, घेवर, गुजिया, बादाम का हलवा, बेसन के लड्डू और दाल-बाटी-चूरमा भी बनाया जाता है.

हिन्‍दू धर्म को मानने वाली सुहागिन स्त्रियों के लिए इस पर्व का विशेष महत्‍व है. यही नहीं जो कुंवारी लड़कियां सुयोग्‍य वर चाहती हैं वे भी इस व्रत को रखती हैं
कजरी तीज को कजली तीज (Kajli Teej) या बड़ी तीज (Badi Teej) के नाम से भी जाना जाता है. मान्‍यता है कि बड़ी तीज के दिन सभी देवी-देवता शिव-पार्वती की पूजा करते हैं. हिन्‍दू धर्म को मानने वाली सुहागिन स्त्रियों के लिए इस पर्व का विशेष महत्‍व है. यही नहीं जो कुंवारी लड़कियां सुयोग्‍य वर चाहती हैं वे भी इस व्रत को रखती हैं. मान्‍यता है कि कजरी तीज का व्रत करने से मनवांछित फलों की प्राप्‍ति होती है और पति की उम्र लंबी होती है. कहा जाता है कि कोई कुंवारी कन्‍या अगर पूरे तन-मन से इस व्रत के रखे तो उसे सुयोग्‍य वर प्राप्‍त होता है. सबसे पहले सुबह-सवेरे उठकर स्‍नान करने के बाद स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें और व्रत का संकल्‍प लें. याद रहे कजरी तीज का व्रत निर्जला होता है.

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