जानिये छठ महाव्रत की कथा और पैराणिक महत्व

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी की थी छठ पूजा

फ़ैज़ाबाद । छठ पूजा का पर्व मुख्य रुप से उत्तर भारत में मनाया जाता है इस वर्ष छठ पूजा का यह त्यौहार 4 नवंबर से लेकर 7 नवंबर तक मनाया जाएगा जिसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही है देश के झारखंड बिहार और उत्तरप्रदेश के तमाम शहरों में यह महापर्व पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य देकर अपने परिवार के मंगल की कामना को लेकर किए जाने वाले इस अनुष्ठान का बहुत बड़ा महत्व है और इसके पीछे एक बहुत बड़ी पौराणिक मान्यता भी है ।

chhath pooja 2016

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी की थी छठ पूजा

छठ व्रत महापर्व का एक बहुत बड़ा महत्व उत्तर भारत से जुड़ा है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम जब जनक सुता सीता के स्वयंवर में जनकनंदिनी सीता को पत्नी स्वरुप स्वीकार कर घर लौटे थे और उनका राज्याभिषेक किया गया था उसके बाद उन्होंने पूरी विधि विधान के साथ कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को पूरे परिवार के साथ छठ पूजा की थी । एक अन्य कथानक के अनुसार महाभारत काल में जब पांडवों ने अपना सर्वस्व गंवा दिया था तब द्रौपदी ने इस व्रत का पालन किया वर्षों तक इसे नियमित करने पर पांडवों को उनका सर्वस्व प्राप्त हो गया था इसीलिए यह माना जाता है कि यह व्रत पारिवारिक खुशहाली के लिए बेहद लाभकर है ।

Chhath Pooja 2

जानिये छठ पूजा कथा का पौराणिक इतिहास आखिर क्यों होती है छठ पूजा

छठ पूजा के पवित्र अवसर पर इस पावन अनुष्ठान को करने वाले भक्त श्रद्धालु छठी माता की पूजा और अर्चना करते हैं यह पूजा-आराधना संतान प्राप्ति की इच्छा से किया जाता है इसके पीछे एक पौराणिक कथा मानी जाती है कि बहुत समय पहले एक राजा और रानी हुआ करते थे उन के कोई संतान नहीं थी राजा इस कष्ट से बहुत दुखी थे राजा के राज्य में एक बार महर्षि कश्यप आए राजा ने महर्षि कश्यप की सेवा की जिससे महर्षि कश्यप ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उनके आशीर्वाद के प्रभाव से राजा की रानी गर्भवती हो गई लेकिन उन्हें मृत संतान पैदा हुई इस घटना से राजा और रानी बेहद दुखी थे जिसके बाद दोनों ने इस घटना से आहत होकर आत्महत्या का निर्णय ले लिया लेकिन जैसे ही वे दोनों नदी में कूदने को हुए वैसे ही छठी माता ने राजा और रानी को दर्शन दिए और कहा कि आप मेरी पूजा करें जिससे आपको अवश्य संतान की प्राप्ति होगी दोनों राजा और रानी ने पूरे विधि विधान के साथ छठी पूजा की और उन्हें संतान की प्राप्ति हुई तब से लेकर आज तक कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को यह पूजा की जाती रही है ।

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छठ व्रत के हैं कुछ विशेष नियम

छठ महाव्रत का यह अनुष्ठान घर की महिलाएं एवं पुरुष दोनों ही करते हैं इस महा व्रत के कुछ नियम है जिसके पालन से ही यह महाव्रत पूरा माना जाता है इसमें प्रथम नियम के रूप में व्रत करने वाले महिला एवं पुरुष को स्वच्छ एवं नए कपड़े पहनने चाहिए जिसमें सिलाई न की गई हो जैसे महिलाएं साड़ी एवं पुरुष धोती पहन सकते हैं व्रत के इन 4 दिनों में व्रत करने वाला धरती पर ही सोता है और इसके लिए कंबल और चटाई का प्रयोग किया जा सकता है और इन 4 दिनों में घर में प्याज लहसुन एवं मांस का प्रयोग पूरी तरह से निषिद्ध माना जाता है इन सभी नियमों का पालन करने पर व्रत करने वाले की सभी मनोकामना पूर्ण होती है ।


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अनूप कुमार Desk/Reporting
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