राम जन्मभूमि विवादित स्थल पर बौद्ध धर्म के लोगो ने भी किया स्वामित्व का दावा तो पक्षकारो ने किया विरोध

अयोध्या में चल रहे राम जन्मभूमि व बाबरी मस्जिद विवाद के पक्षकारो का दावा फैसला को लटकाने के लिए किया जा रहा है यह राजनैतिक दावा

By: Satya Prakash

Published: 24 Jul 2018, 03:32 PM IST

अयोध्या : राम नगरी अयोध्या में वर्ष से राम जन्म भूमि व बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में अब एक नया पक्षकार सामने आ गया अभी तक मुस्लिम व हिन्दू धर्मे के लोग आमने सामने थे लेकिन बौद्ध धर्म के लोग भी अपने स्वामित्व को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दावा कर आगे आ गए है अब सुप्रीम कोर्ट तीन पक्ष रामलला, निर्मोही अखाडा और सुन्नी सेन्ट्रल बोर्ड के साथ बौद्ध धर्म के द्वारा दावा को भी सुनेगा. वही पक्षकारो द्वारा इस दावा को सिर्फ राजनैतिक तुल देने की बात कर रहे है जिससे मामले को लटकाया जा सके.

23 जुलाई को कोर्ट में बौद्ध धर्म के लोगो ने किया दावा


राम जन्मभूमि व बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर चल रहे सुनवाई में 23 जुलाई को बौद्ध धर्म के लोगो ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि इस वर्षो पूर्व हुए खोदाई के दौरान मिले अवशेषों में बौद्ध काल से जुड़े हुए है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वीकृत कर दिया है माना जा रहा है अब फिर से सभी पक्षों से सुनवाई की जाएगी, और इस कारण फैसला आने में भी देरी मानी जाएगी फिरहाल सभी पक्ष काफी हताहित है और सभी पक्षकार इस दावे को ख़ारिज करने की भी मांग कर रहे है जिससे जल्द से जल्द सुनवाई कर फैसला आ सके.

70 वर्षो से क्यों नहीं आया कोई बौद्ध धर्म के दावेदार

इक़बाल अंसारी ने बताया कि इस स्थान को लेकर बौद्ध धर्म का कोई लेना देना नहीं है यह सिर्फ राजनीति के कारण इस प्रकार से दावा किया जा रहा है यह मसला 70 वर्षो से चल रहा है लेकिन अभी तक भी बौद्ध धर्म के लोग सामने नहीं आये और आज जब फैसले का समय निकट आ गया तो इसे रोकने के लिए नेताओ के कहने पर दावा कर सामने आ गए है जब कि वर्षो पहले उसी मस्जिद के 100 मीटर की दुरी पर अपना खेत जोतने का कार्य करते थे तब से कोई सामने नहीं आया तो आज क्यों दिखाई दे रहा था आज यह भी अपनी राजनैतिक रोटी सेकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है इसका और कोई कारण नहीं है.

2019 तक फैसला रोकने के लिए किया गया दावा

वहीं महंत धर्म दास कहा कि यह सभी मामले को लटकाने के लिए नए नए लोग सामने आ रहे है और किसी कारण 2019 तक इस फैसले को रोका जा सके और सुप्रीम कोर्ट को उलझाया जा सके. यह दावा गलत है सुप्रीम कोर्ट जल्द ही सुब्वाई कर फैसला देने के वाला है. तथा बताया कि आज जो सुप्रीम कोर्ट में बौद्ध काल के बारे में बात कर रहा है वह नहीं जानता है कि इस श्रृष्टि के रचयिता भगवान राम है जिनका जन्म अयोध्या में राम जन्मभूमि पर हुआ था उसके बाद से बौद्ध व मुस्लिम शासक आये थे जो कि इस स्थान को बारी बारी तोड़ कर अपने धर्म का ढाचा खडा कर दिया था. सिर्फ ढांचा खडा कर देने से किसी की जमीन को कब्जा नहीं किया जा सकता है इसलिए इनका दावा गलत है इसे जल्द से जल्द ख़ारिज कर देना चाहिए.

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