Exclusive :मुकदमे के पक्षकारों ने कहा श्री श्री रविशंकर नहीं करा पायंगे मंदिर मस्जिद विवाद का हल

Anoop Kumar

Publish: Nov, 15 2017 11:23:43 (IST)

Faizabad, Uttar Pradesh, India
Exclusive :मुकदमे के पक्षकारों ने कहा श्री श्री रविशंकर नहीं करा पायंगे मंदिर मस्जिद विवाद का हल

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने माना विवादित स्थल था राम जन्म भूमि फिर भी मुस्लिम पक्षकार और हिन्दू पक्षकारों में नहीं बनी बात तो अब कैसे मानेंगे दोनों पक्ष

Exclusive :मुकदमे के पक्षकारों ने कहा श्री श्री रविशंकर नहीं करा पायंगे मंदिर मस्जिद विवाद का हल

अनूप कुमार
फैजाबाद .गुरुवार को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर अयोध्या पहुंच रहे हैं उनके अयोध्या आने का मकसद पूरी दुनिया में प्रसिद्ध अयोध्या के राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद के हल को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षकारों से मुलाकात करना है .बीते पखवाड़े भर के अंदर श्री श्री रविशंकर का दावा है कि इस विवाद के हल के लिए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड शिया वक्फ बोर्ड के अलावा हिंदू पक्षकारों ने भी उनसे मुलाकात की है .2 दिन पूर्व ही निर्मोही अखाड़े की अयोध्या शाखा के महंत दिनेंद्र दास ने भी आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से मिलकर अयोध्या मामले पर बातचीत की है . इसी आधार पर उम्मीद जताई जा रही है की श्री श्री रविशंकर इस विवाद के हल में अहम भूमिका निभा सकते हैं और गुरुवार को उनका अयोध्या दौरा बेहद अहम माना जा रहा है .

श्री श्री रविशंकर के प्रयास को लेकर नही दिख रहा दोनों पक्षों में कोई उत्साह विहिप ने कहा धर्म संसद में संतों के फैसले का है हमे इंतज़ार

एक तरफ जहां आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के मध्यस्थता के जरिए अयोध्या के मंदिर मस्जिद विवाद को हल करने की बात कही जा रही है वही इस पहल का अयोध्या के आम लोगों साधु-संतों और इस मुकदमे और इस विवाद से जुड़े लोगों पर कोई खास असर दिखाई देता नजर नहीं आ रहा है .सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे में दो हिंदू पक्षकारों में से एक अहम पक्षकार रामलला विराजमान की ओर से भी आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के दौरे को लेकर कोई उत्साह नहीं देखा जा रहा है . वही श्री राम जन्मभूमि के मामले में श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास से लेकर विश्व हिंदू परिषद भी इस तरह के किसी प्रयास को निरर्थक मान रही है और संतों का ध्यान आगामी 24 नवंबर को कर्नाटक के रूप में होने वाली धर्म संसद की ओर है .विश्व हिंदू परिषद भी संतो के निर्णय का इंतजार कर रही है जानकारों का यही मानना है कि इस विवाद का एकमात्र हल सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला ही है या तो कानून बनाकर अयोध्या में इस विवाद का हल किया जा सकता है बाकी सुलह-समझौते जैसी कोई गुंजाइश नहीं बची है .

पहले भी कई बार की जा चुकी है बातचीत की कोशिश लेकिन बेमतलब रहा प्रयास

अयोध्या में राम मंदिर बाबरी मस्जिद विवाद के हल के लिए यह कोई पहला प्रयास नहीं है 6 दिसंबर सन 1992 की घटना के बाद कई बार बातचीत का दौर भी चल चुका है जिस में तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल में राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय की मध्स्थता में बातचीत का प्रयास किया गया था लेकिन मुस्लिम पक्ष बातचीत को बीच में ही छोड़ कर चला गया .इतना ही नहीं मुस्लिम पक्ष ने यह शपथ पत्र भी दिया था कि यदि विवादित स्थल पर मंदिर का अंश सिद्ध हो जाएगा तो वह अपना दावा वापस ले लेगा जिसके बाद पुरातत्व विभाग की खुदाई में विवादित स्थल के अंदर से राम जन्मभूमि के अवशेष मिलने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यहां पर मंदिर था लेकिन फिर भी मुस्लिम पक्ष कार अपने वादे से मुकर गए और उन्होंने इस मामले को लेकर कोर्ट में अपनी लड़ाई जारी रखी .विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा यह सिद्ध हो चुका है कि उस स्थान पर राम मंदिर था तब अब किस बात का समझौता मुस्लिम पक्ष को अपना मुकदमा पहले वापस लेना चाहिए .


हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने भी माना विवादित स्थल था राम जन्म भूमि फिर भी मुस्लिम पक्षकार और हिन्दू पक्षकारों में नहीं बनी बात तो अब कैसे मानेंगे दोनों पक्ष

30 सितंबर 2010 हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ अपने आदेश में स्वीकार कर लिया विवादित स्थल राम जन्म भूमि है और रामलला विराजमान ही उसके स्वामी हैं फिर भी मुस्लिम पक्षकार अपने दावे पर आज भी अड़े हैं , ऐसे में बातचीत जैसे विषय के लिए कोई स्थान नहीं बचता है .बाबरी मस्जिद के पैरोकार हाजी महबूब भी ये मानते हैं कि सुलह समझौते की कोशिश में जब तक कोई सरकारी पक्ष शामिल नहीं होता तब तक इस प्रकार की किसी भी वार्ता का कोई मतलब ही नहीं है .वही बाबरी मस्जिद के मुख्य मुद्दई रहे हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी भी लगातार सुलह समझौते के लिए प्रयासरत जरूर रहे लेकिन इस मुकदमे के सभी पक्षकारों के एक साथ ना बैठने के कारण अभी तक इस मामले में कोई हल नहीं निकल पाया है . पुराने इतिहास को टटोलने पर बीते ढाई दशक में इस विवाद में जो कुछ बदला उसे देखते हुए आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के प्रयास से भी बहुत उम्मीद अयोध्या के लोगों को नहीं है .

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