सरकार ने बदले नियम, फिर भी डाक्टर्स को पसंद नहीं सरकारी अस्पताल

कोरोना की दस्तक देने के बाद जारी किए नियुक्ति पत्र
साक्षात्कार में 380 हुए सफल, लेकिन 71 ने संभाली ड्यूटी
मनचाहे जिलों में तैनाती देने को तैयार सरकार

By: Devkumar Singodiya

Updated: 02 Apr 2020, 06:55 PM IST

फरीदाबाद. इसे कोरोना का खौफ कहें या हरियाणा के सरकारी अस्पतालों से डाक्टरों का लगातार हो रहा मोहभंग। मामला चाहे जो हो, लेकिन प्रदेश सरकार के बार-बार नियमों में बदलाव करने के बावजूद चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में ड्यूटी के लिए तैयार नहीं हैं। हालात यह है कि हाल ही चयनित हुए 380 डाक्टर्स में से केवल 71 ने ही अभी तक ड्यूटी ज्वाइन की है, जबकि 309 चिकित्सक अभी ड्यूटी संभालने से इनकार कर रहे हैं।

हालांकि सरकार का तर्क है कि कोरोना वायरस के चलते नए डाक्टर ड्यूटी नहीं संभाल रहे हैं जबकि इससे पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है जब सरकार ने साक्षात्कार लिया और डॉक्टर्स ने नौकरी ज्वाइन नहीं की। हरियाणा सरकार डाक्टर्स की कमी को पूरा करने के लिए कई बार नियम भी बदल चुकी है। वर्तमान में वॉक इन इंटरव्यू सिस्टम भी लागू है।


पहले भी विवादों में रही थी भर्ती

मनोहर सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान भी डॉक्टर्स की यह भर्ती विवादों में रही थी। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के तीन बार मंजूरी दिए जाने के बाद भी मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस भर्ती पर रोक लगाए रखी थी। मामला दिल्ली दरबार तक जाने के बाद सीएमओ ने फाइल निकाली और पीजीआई, रोहतक में डॉक्टरों की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया।

कुल 447 खाली पदों पर नियमित भर्ती का फैसला हुआ था। लिखित परीक्षा में मैरिट और उम्मीदवारों की शैक्षणिक व अन्य योग्यताओं के नंबरों के हिसाब से मैरिट पर चयन होना था।कुल 380 डॉक्टरों के चयन के नतीजे घोषित किए गए।


मनचाहे जिले में ड्यूटी ज्वाइन करने की सुविधा

सरकार ने इन डॉक्टरों को नियुक्ति-पत्र उस समय जारी किए, जब देश में कोरोना दस्तक दे चुका था। मौजूदा हालातों में डॉक्टर ड्यूटी ज्वाइन करने को तैयार नहीं हैं। अभी तक केवल 71 ही डॉक्टर्स ने ड्यूटी ज्वाइन की है। वह भी तब जब सरकार ने नियमों में छूट दी। सरकार ने तय किया है कि नवचयनित डॉक्टर किसी भी जिले के किसी भी अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन कर सकते हैं।

सरकार द्वारा संबंधित अस्पताल में ही डॉक्टर के नियुक्ति आदेश जारी कर दिए जाएंगे। बशर्ते संबंधित अस्पताल में डॉक्टरों के पद रिक्त हों। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि डॉक्टरों की कमी पूरा करने के लिए भर्ती की गई है। कांट्रेक्ट पर भी 350 के करीब डॉक्टर लगाने की मंजूरी दी हुई है।


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