Coronavirus पंजाब में अकेले बल्देव ने चार लाख लोगों को संकट में डाला, सरकार ने जार किया ये निर्देश

नवांशहर, जालंधर और होशियारपुर के 21 घर वालों व मित्रों में हो चुकी है पहचान

आनंदपुर साहिब में हुए होला मोहल्ला में भी भाग लिया था, पूरे देश से आए थे सिख

बन चुकी है अटूट श्रृंखला, इसे तोड़ने के लिए पंजाब सरकार ने जारी किया है निर्देश

By: Bhanu Pratap

Published: 25 Mar 2020, 06:30 PM IST

चंडीगढ़। पंजाब Punjab का एक शहर है नवांशहर Nawanshahr। यूं तो सरकार ने इसका नाम बदलकर शहीद भगत सिंह नगर कर दिया है, लेकिन आज भी प्रचवन में नवांशहर ही है। इस जिले का गांव है पठवाला। यहां से 70 वर्षीय बल्देव सिंह विदेश भ्रमण पर गए। जर्मनी zermany, से इटली Italy होते हुए लौटे। कोरोनावायरस coronavirus से बंगा के सिविल अस्पताल Hospital में उनकी मौत हो गई। वे जिसके भी संपर्क में आए, कोरोनावायरस देते चले गए। अब अटूट श्रृंखला बन गई है। निकट संपर्क में रहने वाले 21 लोगों की तो पहचान हो गई है। मुश्किल उन चार लाख लोगों पर है जिन्होंने होला मोहल्ला Hola mohalla में भाग लिया था। पंजाब में कर्फ्यू के कारण सबको घर में बंद कर दिया है, लेकिन जो संक्रमित हो चुके हैं, उनका क्या होगा?

7 मार्च को आए, 19 मार्च को मौत

बल्देव सिंह सात मार्च को अपने गांव पठवाला आए। यहां से होला मोहल्ला उत्सव में भाग लिया। वे मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित थे। कोरोनावायरस के लक्षणों के साथ बंगा अस्पताल पहुंचे। ट्रेवल हिस्ट्री होने के बाद भी उनकी जांच नहीं की गई। 19 मार्च, 2020 को मौत हो गई तब स्वास्थ्य विभाग जागा। कोरोनावायरस की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग के हाथ से तोते उड़ गए। फिर पता लगाया गया किस-किसके सम्पर्क में आए। जैसे ही जानकरी मिली कि श्री आनंदपुर साहिब (जिला रूपनगर) के होला मोहल्ला में भाग लिया और सेवा की है तो संकट बढ़ गया।

Coronavirus

होला मोहल्ला

श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1757 में खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसके बाद होली से अगले दिन होला मोहल्ला त्योहार मनाना शुरू किया। श्री आनंदपुर साहिब में होलगढ़ में होला मोहल्ला की शुरुआत की। इसमें शस्त्रधारी सिंह दो दल बनाकर एकदूसरे पर बनावटी हमला करते हैं। यह युद्ध जैसा प्रतीत होता है। यह उत्सव छह दिन चलता है। इसे देखने के लिए देश-विदेश से सिख श्रद्धालु आते हैं। यह उत्सव हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहती एक छोटी नदी चरण गंगा के तट पर समाप्त होता है। इस बार मुख्य उत्सव 10 से 12 मार्च तक चला। अन्य आयोजन सात मार्च से शुरू हो गए थे।

क्या है संकट

इस बार होला मोहल्ला उत्सव में चार लाख लोगों ने भाग लिया। इसमें कोरोनावायरस संक्रमित बल्देव सिंह भी आए थे। यहां सेवा भी की। अनेक लोगों के निकट संपर्क में आए। इसमें भाग लेने वाले लोग अन्य गुरुद्वारों में जाकर मत्था टेकते हैं। हिमाचल प्रदेश के लोग भी बड़ी संख्या में आते हैं। संकट यह है कि जिन लोगों में बल्देव सिंह से कोरोनावायरस पहुंचा है, वे भी अनजाने में ही दूसरों को दे कर रहे हैं। लाखों लोग कोरोनावायरस के करियर हो सकते हैं। इनकी अभी तक कोई पहचान नहीं हो पाई है।

कोरोनावायरस

इनकी हुई पहचान

बल्देव सिं के निकट संपर्क में रहने वाले 21 लोगों को कोरोनावायरस हो चुका है। 21 मार्च को तीन बेटे, दो बेटी, एक पौत्री और एक मित्र (होशियारपुर) में कोरोनावायरस की पहचान हुई। 22 मार्च को दो बहू, दो पौत्री, दो मित्र और गांव के सरपंच में पहचान हुई। 23 मार्च को दो साल के पौत्र को कोरोनावायरस से ग्रसित पाया गया। 24 मार्च को नाती, दो पौत्र और जालंधर के तीन रिश्तेदारों में कोरोनावायरस की पहचान की जा चुकी है। ये लोग भी अन्य के संपर्क में रहे हैं। इस तरह अटूट श्रृंखला बन गई है। इसे तोड़ने का एकमात्र उपाय क्वारंटाइन ही है।

क्या हैं निर्देश

तमाम लोग विदेश से आए थे, वे वापस जा चुके हैं। अन्य राज्यों से भी लोग आए थे। सरकार के सामने मुश्किल है श्रृंखला को तोड़ना। राज्य सरकार ने सभी जिला उपायुक्तों से कहा है कि वे होला मोहल्ला में भाग लेने वाले लोगों से कहें कि जांच कराएं। घरों में ही रहें। अब तो कर्फ्यू लगा हुआ है, इसलिए घरों में ही रहना है।

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