लोहिया अस्पताल के एसएनसीयू में बच्चे की हुई मौत, लोगों ने जमकर किया हंगामा

लोहिया अस्पताल के एसएनसीयू में बच्चे की मौत पर जमकर हंगामा हुआ।

By: आकांक्षा सिंह

Published: 16 May 2018, 01:55 PM IST

फर्रुखाबाद. लोहिया अस्पताल के एसएनसीयू में बच्चे की मौत पर जमकर हंगामा हुआ। महिलाओं ने कहा कि उनकी तरह तुम्हारी भी संतानों की मौत हो तब तुम्हें पता चले कि गरीब इंसान किस तरह इलाज करा पाता है। महिलाओं ने रोते हुए कहा कि वे इस बच्चे की मौत की जिम्मेदार को दंड दिलाकर रहेंगी। इसके लिए वह पीएम मोदी तक लड़ेंगी और खामोश नहीं बैठेंगी। लोहिया अस्पताल के एसएनसीयू में डाक्टर और स्टाफ की लड़ाई से पहले भी बच्चों की मौत हो चुकी है।

मामला शहर के गढ़ी अब्दुल रशीद का है। यहां साबिर ने अपनी पत्नी बीवी माहेनूर को प्रसव पीड़ा के बाद लोहिया महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्तपाल में भर्ती होने के बाद शुरू में तो साबिर को प्रसव के बारे में कुछ नहीं बताया गया। बाद में कहा गया कि प्रसव बड़े आपरेशन से हो सकेगा। साबिर और उनके परिवार ने किसी तरह आपस में चंदा इकट्ठा करके पैसे का इंतजाम किया। लोहिया के स्टाफ ने साबिर को पत्नी के आपरेशन के लिए सरकारी सेवा से इस्तीफ़ा देकर निजी अस्पताल खोलने वाले डा. कमलेश शर्मा के अस्पताल में भेज दिया। प्रसव के बाद बच्चे को लोहिया अस्पताल के एसएनसीयू में शिफ्ट किया गया। कई सरकारी डाक्टर सरकारी सेवा से इस्तीफ़ा देकर निजी अस्पताल चला रहे हैं और आपसी सांठ- गांठ से वे लोहिया अस्पताल के एसएनसीयू को अपने निजी अस्पताल के पार्ट के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

माहेनूर की बहन तरन्नुम और नूरी ने बताया कि एसएनसीयू में स्टाफ बार-बार पैसे की मांग करता रहा। पैसा न दे पाने पर बच्चे को ले जाने की धमकी दी गयी। हम लोगों को बच्चे को देखने भी नहीं दिया गया। पैसे की कमी के कारण हम बच्चे को कहीं ले जाने की स्थिति में नहीं थे। डाक्टर और स्टाफ की लापरवाही के चलते बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद तरन्नुम और नूरी ने जम कर हंगामा किया। नूरी ने बताया कि कि पैसों की मांग पूरी न होने पर उनके बच्चे का सही इलाज नहीं किया गया। जिससे उसकी मौत हो गयी। एसएनसीयू के प्रभारी डा. कैलाश ने बताया कि बच्चा बहुत सीरियस था। उसके फेफड़ों में पानी भर गया था। पसलियां बहुत तेज चल रहीं थीं। सारी स्थिति से परिजनों को बता दिया गया था और उनकी सहमति से ही इलाज किया गया। हम लोगों ने बेहतर से बेहतर करने का प्रयास किया पर फिर भी बच्चे को नहीं बचाया जा सका।

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आकांक्षा सिंह
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