बर्तन साफ़ करने वाली की बेटी ने यूपी बोर्ड में किया नाम रोशन

 बर्तन साफ़ करने वाली की बेटी ने यूपी बोर्ड में किया नाम रोशन

Abhishek Gupta | Publish: Jun, 10 2017 07:04:00 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

जीजीआईसी बालिका इंटर कालेज की छात्रा राधिका कटियार ने स्कूल में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त करके स्कूल और अपने घर का नाम रोशन किया.

फर्रुखाबाद. जीजीआईसी बालिका इंटर कालेज की छात्रा राधिका कटियार ने स्कूल में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त करके स्कूल और अपने घर का नाम रोशन किया। राधिका अपने घर में सबसे बड़ी है। उससे छोटी बहन साधिका व भाई राज कटियार हैं। माँ रेनू कटियार ने बताया कि 2009 में मेरे पति की मृत्यु मार्ग दुर्घटना में हो गई थी। राधिका के पिता टैक्सी चलाकर बच्चों का पालन पोषण कर थे, लेकिन उनकी मौत के बाद से घर पर आफत टूट पड़ी। 

उन्होंने आगे कहा कि मैंने हिम्मत नहीं हारी। बच्चों की शिक्षा पूरी कराने के लिए लोगों के घरों में बर्तन-सफाई का काम शुरू कर दिया। लोगों के घरों से महीने में लगभग दो से तीन हजार रूपये मिल जाते हैं। उसी में घर का खर्चा, स्कूल की फीस, किताबे आदि सभी काम इतने पैसों में ही करने पड़ते हैं। हम रात दिन इसलिए मेहनत कर रहे हैं कि मेरी दोनों बेटियां शिक्षिका बन सके। मेरी दोनों बेटियां पढ़ने में होशियार है, जिसकी वजह से मेरी हिम्मत और बढ़ गई है। राधिका का भी कहना है कि मैं अपनी बच्चों की इच्छा हर हालात में पूरी करुँगी। उसके लिए मुझे रात दिन एक क्यों न करना पड़े। 


राधिका के घर का यह आलम है कि सुबह खाना खा लिया तो शाम को नहीं बन पाता है। कभी-कभी तो खाली पेट ही सोना पड़ता है। इस परिवार की बेटियों के लिए कोचिंग सेंटर वालों ने भी अपने दरवाजे खोल दिए हैं। जिसमें उन्होंने कहा कि हमारे कोचिंग सेंटर में ऐसी सभी गरीब छात्राओं को मुफ़्त में कोचिंग दी जायेगी। जिससे समाज में कोई गरीब छात्रा पढ़ाई बन्द कर घर पर न बैठ सके। आर्यन सिंह का कहना है कि मैं जिले के सभी शिक्षकों से अनुरोध भी कर रहा हूँ कि वो राधिका जैसी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनको मुफ़्त में शिक्षा दें ताकि गरीब और अमीर का भेदभाव खत्म हो सके।

क्या भाजपा सरकार इस गरीब छात्रा को आगे की पढ़ाई में मदद करेगी। वही दूसरी तरफ जिले की चारों विधानसभाओं में विधायक व सांसद भी भाजपा से ही जीते हैं, लेकिन यदि सही पड़ताल की जाए तो जिले भर में हजारों ऐसे ही परिवार होंगे जिनके घरों के चूल्हे ठंडे पड़े हुए हैं। फिर भी सरकार उनकी कोई मदद भी नहीं कर रहा है। यदि उसकी आर्थिक मदद जी जाए तो आगे चलकर राधिका पढ़ाई कर सकती है।
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