राजपूत रेजिमेंट के दीपावली मेले में बच्चों ने जमकर किया मस्ती

राजपूत रेजिमेंट के दीपावली मेले में बच्चों ने जमकर किया मस्ती
Rajput Regiment

Shatrudhan Gupta | Updated: 17 Oct 2017, 11:19:57 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

मेले में लगाये गए कई प्रकार के स्टालों पर सैनिकों व उनके परिवार ने जमकर उसका लुफ्त उठाया।

फर्रुखाबाद. राजपूत रेजिमेंट के करियप्पा ट्रेनिंग ग्राउंड में मंगलवार को दीपावली मेले का आयोजन सूबेदार मेजर प्रताप सिंह भाटी की अध्यक्षता में हुआ है। मेले का उद्धघाटन डिप्टी कमाडेंट कर्नल रविन्द्र सिंह की पत्नी एवं आवा की वाइस प्रेसिडेंट रचना सिंह ने विधिवत पूजन कर फीता काट कर किया है। उन्होंने अपने साथ मौजूद सैनिको की पत्नियों को त्यौहार की बधाई दी, उसके बाद मेले में लगाये गए कई प्रकार के स्टालों पर सैनिकों व उनके परिवार ने जमकर उसका लुफ्त उठाया। खास बात यह रही कि मेले में बच्चों के खेलने कूदने के बहुत ही अच्छे इंतजाम किए गए थे। खाने पीने से लेकर हर प्रकार के सैनिकों के लिए गेम का इंतजाम किया गया था, जिसमे निशानेबाजी, बोतल में रिंग डालने का खेल आदि शामिल रहे। सभी सैनिक खेल का जमकर लुफ्त उठाया।

प्रथा को जीवित रखने के लिए इस मेले का आयोजन

डिप्टी कमांडेंट रविन्द्र सिंह ने बताया कि जबसे राजपूत रेजिमेंट की स्थापना फतेहगढ़ में हुई है, तब से हर वर्ष धनतेरस पर मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में वर्तमान सैनिक अपने परिवार के साथ व पूर्व सैनिकों के लिए लगाया जाता है। दीपावली प्रकाश का त्यौहार है। लोगो का मानना है कि भगवान राम जब रावण को मारकर अयोध्या वापस अपने घर पहंचे थे तो उस समय पूरी नगरी को दुल्हन की तरह सजाया गया था। उसी प्रथा को जीवित रखने के लिए इस मेले का आयोजन किया जाता है। आगे भी हमेशा आयोजन होता रहेगा।

इस मेले की पांच खास बातें...

इस मेले में साल में एक बार सिविल की दुकानों के स्टाल लगवाए जाते हंै। दोपहर से लेकर शाम तक चलने वाले मेले में जो भी सैनिक कोई खाने पीने की वस्तु खरीदता है, उसको नकद पैसा देना पड़ता है। साल भर में पहली वार रिक्रूट से लेकर अधिकारियों के परिवार आपस मे मिलते जूलते हैं। उस समय कोई अधिकारी या सिपाही नहीं होता है। हजारंों सैनिकों के द्वारा नास्ता करने बाद दोना पत्तलों को उनकी सही जगह पर डाले जाते हैं। इस मेले में शाम को मेला समापन के समय सभी के परिवार एक साथ मिलकर आतिबाजी छुड़ाते हंै, उसके बाद सभी अपनी-अपनी ड्यूटी पर चले जाते हैं।

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