पिता के पास नहीं थे पर्याप्त रुपए, अस्पताल ने किया बच्चे को दाखिल करने से मना, हुई मौत

Abhishek Gupta

Publish: Oct, 13 2017 09:58:22 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
पिता के पास नहीं थे पर्याप्त रुपए, अस्पताल ने किया बच्चे को दाखिल करने से मना, हुई मौत

पैसे ना होने से बच्चे का उपचार ना करने से मासूम की मौत पर जिलाधिकारी मोनिका रानी ने सख्त कार्यवाही कर दी।

फर्रुखाबाद. पैसे ना होने से बच्चे का उपचार ना करने से मासूम की मौत पर जिलाधिकारी मोनिका रानी ने सख्त कार्यवाही कर दी। उन्होंने जाँच के आदेश के साथ ही चिकित्सक भल्ला के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया।
कोतवाली मोहम्मदाबाद क्षेत्र के ग्राम खिमसेपुर निवासी नन्हे लाल के 6 माह के पुत्र प्रवेश की तबियत अचानक खराब हुई। जिसके बाद वह अपनी पत्नी सविता के साथ पुत्र को लेकर शहर कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी स्थित डॉ- सीएन भल्ला के अस्पताल में पंहुचा।

नन्हे लाल का आरोप है कि उसके पास दो हजार रूपये थे। जिसमें से 1800 रूपये जाँच और दवा में खर्च हो गये। जिसके बाद अस्पताल में उससे और रूपये पुत्र को भर्ती कराने के लिये मांगे गये। रूपये ना देने पर भर्ती करने से मना किया गया। नन्हे लाल का आरोप है कि वह रूपये का इंतजाम करने के लिये चला गया। जब लौट के आया तो उसके पुत्र की मौत हो चुकी थी। उसने घटना के सम्बन्ध में जिलाधिकारी मोनिका रानी से शिकायत की। शिकायत मिलने पर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को तलब कर लिया। जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर सीएमओ राजीव शाक्य, कोतवाल अनूप निगम व आवास विकास चौकी इंचार्ज ज्ञानेश्वर कुमार अस्पताल पंहुचे और जाँच पड़ताल की। जिसके बाद मृतक प्रवेश के पिता नन्हें से कोतवाली जाकर तहरीर दी। पुलिस ने डॉ० पीएनभल्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। डॉ० सीएन भल्ला ने बताया कि बच्चे को निमोनिया था। पैसे के लेन देन की कोई बात नहीं थी। बल्कि परिजन भर्ती करने के लिये राय बनाने की बात कह रहे थे।

प्रभारी निरीक्षक अनूप निगम ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया जायेगा।
आखिर प्राइवेट डॉक्टर भूले इंसानियत--देश मे लोग भगवान के बाद जमीन पर मौजूद बैध या डॉक्टर को दूसरा भगवान मानते है।लेकिन कुछ इस पेशे में इस प्रकार के डॉक्टर है जो केवल रुपया को ही सबकुछ मानते है।जिस कारण जो जिले में इंसानियत को कायम रखने वाले डॉक्टरों को सिर झुकाना पड़ता है।यदि भल्ला डॉक्टर उस गरीब के बच्चे को अस्पताल में ही इलाज करते रहने के साथ उससे पैसे लाने को कहते तो शायद उसके बच्चे की जान बच सकती थी लेकिन उन्होंने चंद रुपयों की खातिर एक मासूम को मौत के मूह में भेजने का काम किया है।

बाद में क्यों जागी पुलिस-

मृतक प्रवेश को जीवित रहते पैसा न होने की वजह से अस्पताल से बाहर कर दिया तो नन्हे ने पुलिस से लेकर सीएमओ कार्यालय में जाकर अपने बच्चे की मौत का कारण सभी को बताया, लेकिन किसी ने नहीं सुना फिर वह जिलाधिकारी के पास अपनी फरियाद लेकर पहुंचा। तब डीएम के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज करने के लिए पुलिस तैयार हुई है।

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