फर्रुखाबाद में स्वादिष्ट घेवर के कारोबारी चिंतित

कोरोना संकट से घेवर के कारोबार में आई मंदी
परिवार का भरण-पोषण करने में आ रही समस्या

By: Mahendra Pratap

Published: 29 Jul 2020, 01:40 PM IST

Farrukhabad, Farrukhabad, Uttar Pradesh, India

फर्रुखाबाद. सावन का महीना घेवर व सूतफेनी के कारोबार में चार चांद लगने का मौसम होता है। लेकिन इस बार कोरोना संकट ने अनलाॅक की स्थिति में भी स्वादिष्ट घेवर के कारोबार को लाॅक कर दिया है। घेवर कारोबारियों ने लाॅकडाउन समाप्त होने पर सीजनल कारीगरों को बाहर से बुला लिया था, लेकिन कोरोना संकट के कारण घेवर के कारोबार में मंदी ने उनके माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी हैं।

कई वर्षों से कायमगंज में सावन के महीने में घेवर का कारोबार तेजी से पनपा है। मिठाई के लिए विख्यात सीमावर्ती कासगंज जिले से घेवर के कारीगरों को थोक विक्रेता दो माह के लिए बुलाकर घेवर का बड़े पैमाने पर उत्पादन कराते हैं। इस वर्ष लाॅकडाउन समाप्त होने पर कारोबारियों ने 20 हजार रुपए मासिक वेतन वाले कारीगरों को बुलाकर घेवर बनवाना शुरू किया था। वनस्पति घी से तैयार 280 रुपए किलो बिकने वाले घेवर की विगत वर्षों में भारी खपत रही है। इस वर्ष कोरोना संकट के कारण घेवर कारोबारी परेशन हैं। क्योंकि बाहर से आने वाले कारीगरों व उनके सहायकों को वेतन तो पूरा देना होगा। भले उत्पादन या बिक्री हो या न हो।

सावन माह भर बनता है घेवर :- बताया गया कि आमतौर पर सावन माह में कन्या पक्ष अपनी बेटियों व बहनों की ससुराल में सावनी के तौर घेवर व सूतफेनी की सौगात भेजते हैं, जिससे इनकी काफी खपत रहती है। कोरोना संकट में आवागमन न होने से घेवर की बिक्री को आघात लगा है। घेवर कारोबारी मुकेश चंद्र ने बताया कि वह 1985 से यह व्यापार कर रहे हैं। घेवर बनाने का काम सिर्फ सावन माह भर ही चलता है। इसको थोक बाजार में 160-170 रुपए किलो बेचा जाता है,जबकि बाजार में रबड़ी वाला घेवर 220 रुपए किलो और मेवे वाला 260 रुपए किलो में बिकता है।

लागत तक नहीं निकल पा रही :- उन्होंने बताया कि इसे मैदा, दूध, वनस्पति और बर्फ डालकर तैयार करते है। इसके बाद कढ़ाई पर साचे रखकर धीमे-धीमे पकाते हैं। उन्होंने बताया कि पहले करीब 4-5 कुंतल मैदा लग जाती थी, लेकिन अबकि बार मात्र 50 किलो मैदा लगी है, जिससे लागत तक नहीं निकल पा रही है। पहले लाॅकडाउन की वजह से सहालग कैंसिल हो गईं और अब सीजन में काम न मिलने से परिवार का भरण-पोषण करने में समस्या आ रही है।

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