कपूरकंद मिठाई के हैं बहुत फायदे, गर्मी में प्यास बुझाने के साथ मोटापा भी करता है कम

यह मिठाई लोगों की भूख मिटाकर प्यास भी बुझाती है इसके साथ ही मोटापा भी करती है।

By: Mahendra Pratap

Published: 07 Jun 2018, 08:13 AM IST

फर्रुखाबाद. जिले में गर्मी के सीजन आते ही शहर की सड़कों पर कपूरकन्द की मिठाई दुकानों पर दिखाई देने लगती है।यह मिठाई लोगों की भूख मिटाकर प्यास भी बुझाती है। यहां पर बनने बाली यह मिठाई आस पास के जिलों में भी बेची जाती है लेकिन कल के आधुनिक युग में कपूरकंद की मिठाई बनाने वालों के पास वह साधन नहीं है। जिनसे वह अधिक माल तैयार कर सकें। वर्तमान में शहर में इस दर्जन परिवार इसी मिठाई का काम करते है। जिससे वह अपने परिवार का भरण पोषण करते है। सुबह चार बजे से अपने घर मे इसको बनाने का काम शुरू करते है। उसके बाद दोपहर बाद ठेली पर सजाकर बेचते हैं। कई जिलों के लोग इसकी पैंकिंग कराकर अपने घर लेकर जाते है।

कैसे बनती है कपूरकन्द की मिठाई

सबसे पहले लौकी को बाजार से खरीदकर घर लाकर उसको साफ पानी से धुलाई करते है। फिर उसका छिलका उतार कर कद्दूकस से उस लौकी को किसते है। भट्टी को जलाकर उसके ऊपर कढ़ाई रखकर उसमे चासनी तैयार करते हैं। जब चासनी जमने लगती है। तो उसमें लौकी के लच्छे उसमें डाल दिये जाते हैं। उस दौरान जो गंदकी बनती है उसको किसी न किसी औज़ार से कढ़ाई से बाहर निकाल देते है जब लौकी के लच्छे पक जाते हैं तो उसको एक बड़ी परात में निकाल लेते है। फिर उन लच्छों के ऊपर सूखी चीनी पिसी हुई डालकर लकड़ी के सहारे उसका हर एक लच्छा अलग किया जाता है। उसके बाद उसको कपूर की महक देने के लिए नाम मात्र का कपूर लगाया जाता है। उसके बाद जितनी बनी हुई मिठाई की पैकिंग करनी होती है। किसी बर्तन में उसको सजाकर बाजार में बेचा जाता है।

कपूरकन्द खाने से क्या फायदे

लौकी से तैयार की गई कपूरकन्द नाम की मिठाई सेहत के कैसे लाभदायक है। उसके लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर रामवीर बाजपेई से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि लौकी खाने से मोटापा कम होता है। दूसरी तरफ मेहनतकश लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद होती है क्योंकि लौकी में चीनी मिल जाने से उतना असर नहीं रहता है। फिर भी गर्मी के समय से अन्य मिठाइयों की जगह इसका प्रयोग सेहत के लिए अच्छा रहता है। यदि मोटा आदमी लगातार एक महीने लौकी का पानी लगातार पीता रहे तो उसका मोटापा अपने आप कम होने लगता है।

किन लोगों के लिए हानिकारक भी साबित हो सकती है

डॉक्टर केएम द्विवेदी ने बताया कि कपूरकन्द की मिठाई एलोपैथिक की नजर से हानिकारक भी हो सकती है। जैसे कि यदि किसी को शुगर की बीमारी है वह इस मिठाई को खाता है तो उसका मोटापा भी बढ़ सकता है। उसके साथ ही साथ शुगर भी बढ़ सकती है। इसलिए जिन लोगो को इस प्रकार की कोई भी बीमारी हो तो इस मिठाई का सेवन न करे। हां लौकी यदि सब्जी के रूप में इस्तेमाल करे तो वह फायदेमंद हो सकती है।

शहर के किन किन स्थानों पर मिलती है कपूरकन्द की मिठाई

शहर में लगभग एक दर्जन से अधिक स्थानों पर ठेली लगाकर लोग इस मिठाई को बेचते नजर आ जाएंगे। जिसमें चौक, घूमना, पक्कपुल, लालगेट, रेलवे स्टेशन के पास, फतेहगढ़ चौराहा, आवास विकास कालोनी के पास, उसके बाद दीक्षित मिष्ठान भंडार पर यह मिठाई मिल सकती है।

खरीदने वाले कैसे करते हैं इस्तेमाल

इस मिठाई की रोजाना लगभग एक कुंटल से अधिक बिक्री होती है। इसको खरीदने वाले लोग अपने घरों में आने वाले वाले मेहमानों को नास्ता कराने में प्रयोग करते है। कुछ लोग किसी को गिफ्ट के तौर पर इस्तेमाल करते है। शादी विवाह पार्टी आदि में भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

100 वर्षो से शहर में बनाकर बेची जा रही कपूरकन्द की मिठाई

राजेश गुप्ता का कहना कि हमारे बाबा यह मिठाई बनाते थे। उसके बाद सिर पर थरा रखकर बेचते थे। उनकी मौत होने के बाद पिता जी ने काम करना शुरू किया। जब वह नहीं रहे तो हम लोग यह मिठाई बनाकर बेच रहे हैं। इस मिठाई का कारोबार लगभग 100 वर्ष से अधिक पुराना है। यह मिठाई एक हफ्ते तक खराब नहीं होती है। इसको ठंडक में रखा जाए नहीं तो यह तीन दिन के अंदर खराब हो जाती है।

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