आश्चर्यचकित करने वाले चमत्कार करते थे नीब करोरी बाबा, अचंभित हो गए थे ग्रामीण, यूपी का यह स्थान है खास

-फर्रुखाबाद जिले के नीब करोरी बाबा के चमत्कार थे आश्चर्यजनक
-फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर में हुआ था उनका जन्म

By: Arvind Kumar Verma

Published: 11 Sep 2021, 06:31 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
फर्रुखाबाद. नीब करोरी बाबा श्रद्धा का ऐसा नाम है, जिनकी आस्था फर्रुखाबाद जिला ही नहीं बल्कि दूर दराज के लोगों में भी है। मंदिरों में लोग नीब करोरी बाबा प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा करते हैं। नीब करोरी वाले बाबा के बारे में बताया जाता है कि उनके चमत्कार आश्चर्यचकित करने वाले थे। नीब करोरी गांव के लोगों में उनकी श्रद्धा गहरी है। बाबा लक्ष्मणदास जी का असली नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा है। वर्ष 1900 में उनका जन्म फीरोजाबाद जिले के अकबरपुर में हुआ था। लोगों के मुताबिक 11 वर्ष की उम्र में उनका विवाह हो गया था।

1973 में मथुरा में ली समाधि

बाबा की ईश्वर में बहुत आस्था थी। इसलिए शादी के छह वर्ष बाद वह घर छोड़कर गुजरात चले गए और वहां साधना की। नीब करोरी गांव के लोग कहते हैं कि बाबा लक्ष्मणदास जी सन 1961 में गांव आए थे। यहां 15 जून 1964 में उन्होंने एक मंदिर का निर्माण करा अपने हाथ की बनी हनुमान जी मूर्ति स्थापित की। मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ गई कि प्रत्येक वर्ष यहां मेला लगने लगा। बाबा के भक्त दूर दराज से आने लगे। वहीं मंदिर के समीप एक गुफा में बाबा लक्ष्मणदास तपस्या करते रहे। यहां गांव में वह करीब 11 वर्ष तक रहे। इसके बाद 11 सितंबर 1973 में मथुरा-वृंदावन में उन्होंने समाधि ले ली।

बाबा की अनुकंपा से कुएं का पानी हो गया था मीठा

इसके चलते भक्तों ने 15 फरवरी 1984 में उसी मंदिर में बाबा लक्ष्मणदास की प्रतिमा की स्थापना करा दी। नीब करोरी गांव के ग्रामीण बताते हैं कि गांव में बाबा के चमत्कार देख लोग दंग रह जाते थे। गांव के मंदिर स्थित खारा पानी वाला कुआं था। बाबा ने ग्रामीण से कहा इसमें चीनी डाल दो तो कुआं खारा पानी नहीं देगा। ग्रामीण ने चीनी डाल दी, जिसके बाद उस कुएं का पानी पीने योग्य हो गया। हालांकि अब मंदिर में वह कुआं बंद कर दिया गया है।

बाबा के ट्रेन से उतरने पर ट्रेन का इंजन हुआ था बंद

बताते हैं कि एक बार बाबा लक्ष्मणदास गंगास्नान के लिए ट्रेन से फर्रूखाबाद जा रहे थे। टिकट न होने पर ट्रेन में टीटीई ने उन्हें ट्रेन से नीचे उतार दिया था। सरल स्वभाव के बाबा ट्रेन से उतरकर नीम के पेड़ के नीचे बैठ गए। उनके ट्रेन से उतरने के बाद ट्रेन का इंजन ही बंद हो गया। इसके बाद गलती का एहसास होने पर रेलवे के कर्मचारियों ने उनसे क्षमा मांगी तो उन्होंने कहा कि यहां पर स्टेशन बनाया जाए। उसके बाद से यहां पर बाबा लक्ष्मणदास पुरी नाम से स्टेशन बना दिया गया है।

Arvind Kumar Verma
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