यहां गिर रहा शिक्षा का स्तर, अधिकारियों की उदासीनता के चलते 50 बच्चे की जान खतरे में

Akansha Singh

Updated: 12 Jul 2019, 09:40:31 AM (IST)

Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

फर्रुखाबाद. आज भले ही देश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू है, लेकिन दूर दराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए शिक्षा हासिल करना किसी चुनौती से कम नहीं है। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए योगी सरकार ने भले ही बच्चों के लिए अनेक सुविधाए दी हैं, लेकिन जिले में एक ऐसा स्कूल है जहां का नजारा सारी सुविधाओं से परे नजर आया। यहां पर नौनिहाल जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करते हैं। अभी तक ना ही तीसराम की मढैया की तरफ किसी भी अधिकारी नें अपना रुख नही किया। जिसके चलते गंगा के कटान का समय रहते निदान नही हो सका जिससे विधालय की दीवार गंगा में समा गयी।

जनपद में अधिकारियो की उदासीनता के चलते तक़रीबन आधा सैकड़ा बच्चे अपनी जान जोखिम मे डाल कर पढ़ने को मजबूर है। विकास खंड राजेपुर के ग्राम तीसराम की मडैया के ग्राम से जिले के अधिकारी सालो बाकिफ है और आलाधिकारी सैकड़ो बार निरीक्षण भी हो चुके है लेकिन ग्राम का हाल बदहाल ही है क्योंकि ग्राम गंगा नदी के सामने मुहाने पर बसा हुआ है। पिछले कई सालों में ग्राम के 3 दर्जन से अधिक मकान गंगा नदी में समां गए और गंगा में फिर से शुरू हुए कटान से ग्राम एक मात्र प्राथमिक स्कूल भी गंगा ने अपनी चपेट में ले लिया है। प्राथमिक स्कूल के पास स्कूल की पिछली दीवार गंगा के कटान से गिर गयी है और स्कूल गंगा में किसी भी समय पर समां सकता है लेकिन ग्रामीणों के पास और स्कूल न होने के चलते जान जोखिम में डाल कर अपने नौनिहालों को मजबूरन स्कूल भेज रहे हैं। स्कूल में माहज दो टीचर ही पढ़ाने जाता है। गंगा के किनारे मुहाने पर बसे इस स्कूल को बचाने की जिला प्रशसन कोई पहल से करता तो शायद स्कूल बच जाता लेकिन जब गंगा नदी ने स्कूल के आधे हिस्से को गंगा की धारा ने निगल लिया तो जिला प्रशसन अब सिंचाई विभाग की तरफ से गंगा की धारा लकड़ी की बल्लिया गाड़ कर सिर्फ एक विभागीय कार्रवई के शिवाय कुछ भी नहीं किया जा सका है। वहीं जब इस मामले पर जिले के अधिकारी अभी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है और भारी बारिश के बाद गंगा नदी का जलस्तर बढ़ना भी लाजमी है तो आगे आने बाले समय में किसी भी दिन कोई भी बड़ा हादसा होने की आशंका किसी से छिपी नहीं है।

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