यूपी पुलिस ने खुलेआम कर दी ऐसी हरकत, जान कर दंग रह जाएंगे आप

Akanksha Singh

Publish: Nov, 15 2017 01:49:29 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
यूपी पुलिस ने खुलेआम कर दी ऐसी हरकत, जान कर दंग रह जाएंगे आप

पुलिस द्वारा निकाय चुनाव को देखते हुए बिना जांच किये ही वोटर लिस्ट देखकर शांतिभंग की कार्रवाई कर दी है।

फर्रुखाबाद. प्रदेश में एक बार फिर उत्तर प्रदेश पुलिस अपने कारनामों से चर्चा का विषय बनी हुई है।जिले के थाना कमालगंज में पुलिस द्वारा निकाय चुनाव को देखते हुए बिना जांच किये ही वोटर लिस्ट देखकर शांतिभंग की कार्रवाई कर दी है। जिसमें दीपावली के समय पवन चौरसिया पुत्र ईश्वर दयाल चौरसिया जो कि काफी समय बीमार रहने के बाद 18 अक्टूबर को मौत हो गई थी, लेकिन पुलिस ने उसको भी शांतिभंग नामित कर दिया है।

 

दूसरी तरफ शिवम गुप्ता पुत्र प्रमोद गुप्ता जो मानसिक तौर पर 90 प्रतिशत कमजोर है। विभव अग्रवाल पुत्र विनय अग्रवाल जो कि 25 वर्षो से मुम्बई में प्राइवेट नौकरी करते है इतनी सालों में कभी घर नहीं आये फिर भी पुलिस ने उनके खिलाफ भी कार्रवाई की है। प्रशांत विश्नोई पुत्र निर्मल विश्नोई जो कई वर्षों से बाहर हैं, उसके खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की है। कमालगंज कस्बे में यह वो लोग है जिनके खिलाफ थाने में किसी ने कभी तहरीर भी नहीं दी है। फिर यह लोग चुनाव में गड़बड़ी कैसे फैला सकते है जबकि उसी कस्बे में जिनके ऊपर दर्जनों मुकदमे है उनके ऊपर कोई कार्रवाई नही है। जब इस मामले में पुलिस अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे है चुनाव में अधिकारी व पुलिस क्यों करती जल्दबाजी-जिला प्रसाशन हो या पुलिस एक टीम बनकर कोई काम को अंजाम नही देती क्योकि जिले के आलाधिकारी चुनाव में कोई गड़बड़ी न हो उसके लिए आयोग द्वारा आदेश दिया जाता है कि जिले में चुनाव के समय जो आदमी झगड़ा से लेकर कोई खुराफात कर सकता है।

 

उन लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई करना सुनिश्चित करे। लेकिन वह आदेश जिले के डीएम व एसपी अपने नीचे काम करने वाले क्षेत्रीय कर्मचारियों को दे देती है। जिसमें पुलिस से कहा जाता है कि हर थाना क्षेत्र से लगभग 200 से ऊपर चुनाव में गड़बड़ी फैलाने को तीन से चार दिन में लिस्ट अधिकारी के पास उपलब्ध कराए। उसके बाद अधिकारी उनको नोटिस के रूप में थाने भेज देते है। जिनको पुलिस तामील कराती है। लेकिन जब शांतिभंग में उनके नाम सामने आते है जो इस दुनिया में नहीं है जो है भी वह किसी काम के नही।

 

पुलिस भी क्या करें एक दम से इतने खुराफाती लोगों को खोजना मुश्किल हो जाता है। जल्दबाजी में पुलिस सार्टिकट का रास्ता अपना लेती जिसका नतीजा यह होता है जो कभी किसी को गाली नही देना जानते वह शांतिभंग करने में आरोपी बन जाते हैं। आगे देखना यह होगा कि अधिकारी इस प्रकार की कार्रवाई करने वाले पुलिस कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करती है। क्योंकि शांतिभंग की कार्रवाई जब हो सकती है जब अधिकारी उस लिस्ट के ऊपर साइन करते है। फिर नोटिस जारी किए जाते है।

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