भू-माफियाओं के फर्जीवाड़े में फंस गए लोग, अब फतेहपुर में गिराए जा सकते हैं चार सौ मकान

हाईकोर्ट के आदेश के बाद चार सैकड़ा मक़ानो के अस्तित्व पर उठे सवाल, एचसी के आदेश के अनुपालन में एसडीएम सदर ने फिर से दर्ज कराया तालाबी नम्बर

By: Ashish Shukla

Published: 11 Dec 2019, 08:42 PM IST

फ़तेहपुर. उच्च न्यायालय के हालिया आदेश के बाद शहर की एक नयी बसी आबादी के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। मामला एक बड़े तालाबी क्षेत्र को भूमिधरी दर्ज कराकर भू-माफियाओं द्वारा बेंच देने का है। प्रशासन ने भूमि को पुनः तालाब दर्ज करके कार्यवाही की बात कही है।

क़स्बा फ़तेहपुर दक्षिणी (न्यू कालोनी ज्वलागंज) में बने लगभग चार सौ से अधिक आलीशान मक़ानों को कभी भी गिराया जा सकता है। पिछले 20 वर्ष के अन्तराल में 22.5 बीघे के क़रीब बड़े तालाब का अधिकांश हिस्सा पाट कर की गई प्लाटिंग पर करोड़ों की क़ीमत के भवन खड़े हो गए हैं । जिस भू-भाग पर यह कालोनी आबाद है उसको पुनः तालाबी नम्बर पर दर्ज कर दिये जाने से इन भवनो का अस्तित्व समाप्त होने की संभावनायें बढ़ गई है।

कुछ वर्ष पूर्व ताज नगरी आगरा में एक बड़े तालाब को पाटकर पाँच सितारा होटल बनाकर खड़ा कर देने के ख़िलाफ़ पिछले साल उच्च न्यायालय द्वारा एक जनहित याचिका पर फ़ैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने न सिर्फ़ होटल को गिराने बल्कि सूबे के सभी ज़िला अधिकारियों को ऐसे तालाबों से तत्काल अवैध क़ब्ज़े हटवाने के स्पष्ट आदेश जारी किये थे।

उच्च न्यायालय के सख़्त आदेश के बाद 20 नवम्बर को एसडीएम सदर प्रमोद कुमार झा ने क़स्बा फ़तेहपुर दक्षिणी (न्यू कालोनी ज्वलागंज) के इस भू-भाग को ख़तौनी में पुनः बतौर तालाबी नम्बर दर्ज करने के आदेश के क्रम में सरकारी दस्तावेज़ो में भूमि फिर से तालाब के रूप में दर्ज हो गयी है। तालाब में दर्ज होने के साथ ही ज़मीन पर बने आवासों गिराने की सरकारी क़वायद भी शुरू हो गई है। देखना यह है कि प्रशासन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का कितना अनुपालन कर पाता है ।

किस तरह हुआ खेल

सरकारी दस्तावेज़ो में क़स्बा फ़तेहपुर दक्षिणी जिसे अब न्यू कालोनी ज्वालागंज के नाम से जाना जाता है में 1958 से 1962 तक चली चकबंदी में हेरफेर करके लगभग 22.5 बीघा तालाबी क्षेत्र का आधा हिस्सा डिप्टी मजिस्ट्रेट रामपाल सिंह व आधा उनके परिजनों के नाम भूमिधरी में दर्ज कर दिया गया। मूलतः ग़ाज़ीपुर थाने के गम्भरी गाँव के मूल निवासी रामपाल सिंह की 1999 में मौत के बाद वर्ष 2000 में उनके वारिसान पुत्र निर्भय सिंह व अभय सिंह एवं पत्नी ने अपने अपने हिस्से (दस बीघे) का मुक्तारआम (पावर आफ अटार्नी) एक नामी माफिया के नाम कर दिया। उन्होंने तालाब का 10 बीघा क्षेत्र लेबल कराकर क़रीब डेढ सौ प्लाटों का बिक्री बैनामा कर दिया।

इसी तरह तालाब के आधे हिस्से का स्वामी बताकर रामपाल सिंह के अन्य परिजनों ने भी तालाब का करीब साढे नौ बीघा एरिया दूसरे छह भूमाफियाओं को पावर आफ अटार्नी कर दिया जिन्होंने तालाब के बड़े हिस्से को लेबल कराकर करीब सवा सौ प्लाटों का बिक्री बैनामा कर दिया। इसमें एक सरकारी महिला अध्यापक के नाम भी करीब एक बीघा की रजिस्ट्री डीड खासी चर्चित रही है।

शेष बचे करीब दो बीघे तालाबी क्षेत्र का भी अस्तित्व नगर पालिका के कूड़े से समाप्त किया जा रहा है। सरकारी दस्तावेज़ 59 फ़सली में 22.5 बीघा इलाक़ा तालाब के नाम दर्ज है। जिसका हवाला गाटा संख्या 2575/2 रक़बा 1.5790, गाटा संख्या 2575/1 गाटा संख्या 1.7400 व गाटा संख्या 2575 मि. के रूप में मिलता है।

एसडीएम के आदेश पर राजस्व दस्तावेज़ो में तालाब दर्ज कर दिया गया है। आगे की कार्यवाही में नगर पालिका परिषद द्वारा तालाबी नम्बर में काबिज सभी अवैध भवन स्वामियों को नोटिस जारी करके उनसे सम्बंधित दस्तावेज़ तलब किये जायेंगे।

Ashish Shukla
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