यूपी का अनोखा सरकारी स्कूल, डाइनिंग टेबल पर लंच करते हैं बच्चे, स्वच्छता अभियान में भी है आदर्श

  • प्रधानाध्यापक देवब्रत त्रिपाठी की लगन से यूपी का यह सरकारी स्कूल बना आदर्श
  • छह कमरों वाले इस स्कूल की कक्षाओं और फर्श पर टाइल्स भी लगवाये गये हैं।

By: Akhilesh Tripathi

Published: 01 Jul 2019, 07:28 PM IST

फतेहपुर. देश में सरकारी बेसिक स्कूलों की स्थिति को लेकर व्याप्त चिंता के बीच यूपी के फतेहपुर जिले के एक गांव की प्राथमिक पाठशाला मिसाल पेश कर रही है। फतेहपुर जिले के बेहद पिछड़े गांव अर्जुनपुर गढ़ा में स्थित यह पाठशाला यहां के मुख्य कर्ताधर्ता के प्रयासों की वजह से क्षेत्र में एक मिसाल के तौर पर मशहूर हो चुकी है। यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिये गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बड़ा डाइनिंग हॉल, बड़ा बगीचा, स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने वाला माहौल और ऐसी कई चीजें हैं जो देश के बाकी प्राथमिक स्कूलों के लिये सपने जैसा है। कभी गम्भीर अभावों से जूझ रहे इस स्कूल को आदर्श पाठशाला बनाने का ज्यादातर श्रेय यहां के प्रधानाध्यापक देवब्रत त्रिपाठी को जाता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

School class room

 

जहां एक तरफ लोग किसी स्कूल में सुविधाएं बढ़ाने के लिये सरकार से आस लगाते हैं, वहीं प्रधानाध्यापक ने इसे व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझते हुए इस पाठशाला को तमाम ऐसी सुविधाओं से लैस किया, जिनसे कोई स्कूल आदर्श विद्यालय में तब्दील हो सकता है।

 

वर्तमान में प्रधानाध्यापक के तौर पर सेवारत त्रिपाठी ने इस प्राथमिक विद्यालय के प्रति अपने लगाव के बारे में जिक्र करते बताया कि 10 सितम्बर 1982 को प्राथमिक विद्यालय अर्जुनपुर गढ़ा में बतौर सहायक अध्यापक नियुक्ति के बाद उन्होंने इस स्कूल को भी उन्हीं समस्याओं से घिरा पाया, जिनसे अमूमन क्षेत्र का हर प्राथमिक स्कूल ग्रस्त है। सबसे बड़ी समस्या इसका जर्जर भवन और उसमें भी ग्रामीणों का अवैध कब्जा था। उन्होंने सक्षम अधिकारियों के मार्फत प्रयास किये,जिससे स्कूल की चहारदीवारी का निर्माण हुआ और कब्जा खत्म हो सका।

Dining table in school

 

अन्य सरकारी स्कूलों की तरह इस प्राथमिक पाठशाला में भी विद्यार्थियों की तादाद बढ़ाना कोई कम बड़ी चुनौती नहीं थी। त्रिपाठी के मुताबिक इसके लिये शिक्षा व्यवस्था को मनोवैज्ञानिक तरीके से ढाला गया ताकि बच्चों के लिये पढ़ाई बोझ ना बन सके। इसके अलावा परिसर को कौतूहलपूर्ण बनाने के लिये एक बड़ी फुलवारी तैयार की गयी, जिसमें फलदार वृक्ष लगाये गये। इसकी देखभाल वह खुद करते हैं। साथ ही बच्चों को बागवानी से जोड़ने के मकसद से इस बगीचे में कई चीजें उगायी जाती हैं। इससे विद्यालय के प्रति और भी आकर्षण उत्पन्न हुआ और छात्रसंख्या में वृद्धि हुई।

School Principal devbrat Tripathi

अर्जुनपुर गढ़ा के प्रधान प्रतिनिधि धर्मराज यादव के मुताबिक पिछले कुछ सालों में गांव के प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर बदल गयी है। पहले इसका भवन जर्जर स्थिति में था, मगर यहां के प्रधानाध्यापक और उनके सहयोगियों की मेहनत और लगन का नतीजा है कि यह विद्यालय आसपास के इलाकों में अलग पहचान रखता है।

 

उन्होंने कहा कि पहले इस विद्यालय पर लोगों ने कब्जा कर रखा था। उसे कब्जामुक्त कराने में भी प्रधानाध्यापक त्रिपाठी का अहम योगदान है। पहले जहां, स्कूल में गिने-चुने छात्र ही थे, वहीं अब यह तादाद बढ़ी है। स्कूल में पढ़ाई भी होती है। कुल मिलाकर आस-पास के क्षेत्र में ऐसा कोई और स्कूल नहीं है।

 

 

 

School Old Building

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि हमारा प्रयास रहता है कि जनपद स्तर पर न्यूनतम एक मॉडल स्कूल आवश्यक रूप से स्थापित किया जाए, जिससे परिषदीय शिक्षा प्रणाली के प्रति आकर्षण बढ़े। प्रधानाध्यापक देवब्रत त्रिपाठी की स्कूल के प्रति व्यक्तिगत लगनशीलता सराहनीय है और यह स्कूल एक आदर्श पेश कर सका है।

 

 

उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापक के प्रयासों से अर्जुनपुर गढ़ा प्राथमिक पाठशाला की तस्वीर में व्यापक परिवर्तन आया है। निश्चित रूप से जबतक ऐसे शिक्षक सक्रिय रहेंगे, शिक्षा प्रणाली में चामत्कारिक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।

 

 

विकास की दौड़ में बहुत पिछड़े बुंदेलखण्ड से सटे फतेहपुर के गांव अर्जुनपुर गढ़ा में स्थित यह प्राथमिक पाठशाला अपनी कई खूबियों के लिये चर्चित है। यहां बच्चों को दोपहर का भोजन कराने के लिये एक विशाल डाइनिंग हॉल बनवाया गया है, जिसमें करीब 200 बच्चे एक साथ बैठकर खाना खा सकते हैं। जिले में इस तरह का डाइनिंग हॉल किसी अन्य स्कूल में नहीं है।

 

 

विद्यालय में सभी बच्चों को स्वच्छता के लिये प्रेरित किया जाता है। जो बच्चे घर से नहाकर नहीं आते हैं, उन्हें विद्यालय में स्नान करवाने के लिये साबुन और तौलिये के साथ-साथ कंघा, तेल इत्यादि की विशेष व्यवस्था की गयी है। अक्सर पानी की किल्लत से जूझने वाले इस इलाके में पूर्व में, स्कूल के छात्रों और शिक्षकों को कुएं से खींचकर पानी लाना पड़ता था। प्रधानाध्यापक ने अपने प्रयासों से विद्यालय में हैण्डपम्प लगवाया और सबमर्सिबल मोटर की व्यवस्था की। छह कमरों वाले इस स्कूल की कक्षाओं और फर्श पर टाइल्स भी लगवाये गये हैं। साथ ही कक्षा तीन, चार और पांच के विद्यार्थियों के बैठने के लिये फर्नीचर की व्यवस्था की गयी है, जो उन्होंने खुद ही की है।

 

 

त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा हमेशा शिक्षक के प्रति श्रद्धाभाव रखने से ही मिलती है। लिहाजा, बच्चों में यह भावना जगाये रखने के लिये स्कूल में सेवानिवृत शिक्षकों के सम्मान की परम्परा डाली गयी है। इसके लिये उनकी पहल पर अपने न्याय पंचायत में सेवानिवृत शिक्षकों के सम्मान की परम्परा को फिर शुरू किया गया है। इसके अलावा पाठशाला परिसर में मां सरस्वती और इस क्षेत्र में साक्षरता की अलख जगाने वाले संत सोमानंद की प्रतिमा स्थापित की गयी है।

 

 

प्रधानाध्यापक का कहना है कि अपने पिता और गुरुजन की वचनों से प्रेरित होकर उन्होंने हमेशा अपने कार्यस्थल को सर्वश्रेष्ठ बनाने का प्रयास किया। वह चाहते हैं कि जिला स्तर पर आदर्श बनने के बाद उनका प्राथमिक विद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति हासिल करे।

Akhilesh Tripathi
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