6 बार तबाही की दर से लौटी दुनिया

Amanpreet Kaur

Publish: Jul, 29 2017 01:03:00 (IST)

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1962 : क्यूबा मिसाइल संकट

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करगिल युद्ध के दौरान  जनरल परवेज मुशर्रफ भारत पर परमाणु हमला करने की तैयारी में थे। वहीं एक अमरीकी सैन्य कमांडर ने कहा कि यदि राष्ट्रपति  ट्रंप कह दें तो वह चीन पर परमाणु हमला कर सकते हैं। यह पहली बार नहीं।  जापान पर किए गए दोहरे परमाणु हमले को छोड़ दें तो कम से कम छह बार दुनिया परमाणु युद्ध के मुहाने से लौटी है।

1962 : क्यूबा मिसाइल संकट


शीतयुद्ध के  दौरान सीआईए की मदद से 1961 में क्यूबा में फीदेल कास्त्रो को उखाडऩे के लिए विद्रोहियों के एक बड़े समूह ने समुद्री रास्ते (बे ऑफ पिग्स) से हमला किया, लेकिन कास्त्रो ने इसे नाकाम कर दिया। जवाब में कास्त्रो ने सोवियत परमाणु मिसाइलों को अपने यहां तैनात करना शुरू कर दिया।

जब परमाणु युद्ध के सबसे करीब थे...

क्यूबा अमरीकी राज्य फ्लोरिडा से मात्र 180 किमी दूर है। अक्टूबर, 1962 में अमरीका और मिसाइलों को आने से रोकने के लिए क्यूबा की नौसेनिक नाकाबंदी कर दी।  दो सप्ताह चले इस तनाव के दौरान एक अमरीकी जहाजों से घिरी परमाणु हथियारो से लैस सोवियत पनडुब्बी बी-59 का संपर्क  बाकी दुनिया के कट गया। और उसका कमांडर  परमाणु बम से लैस टारपीडो दागने वाला था। उसे लगा कि  युद्ध शुरू हो चुका है  और परमाणु हमले  के सिवा कोई विकल्प नहीं। इस दौरान क्यूबा ने एक अमरीकी टोही विमान मार गिराया। अमरीका ने भी एफ-102 ए विमान उड़ाए जो परमाणु मिसाइलों से लैस थे। माना गया इस दौरान एक भी कदम परमाणु युद्ध छिड़ सकता था। आखिर सोवियत संघ पीछे हटने को तैयार हो गया। बदले में अमरीका ने कभी भी क्यूबा पर हमला न करने का वादा किया।

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