पनामा जैसे छोटे देश ऐसे बनते हैं बड़े देशों के टैक्स हैवन

Amanpreet Kaur

Publish: Jul, 29 2017 01:15:00 (IST)

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शेल कंपनियां कैसे करती हैं अपना कारोबार

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पनामा जैसे छोटे से देश के बड़े-बड़े देशों के लिए टैक्स हैवन बनने के पीछे की कहानी यह है कि आमतौर पर इन छोटे द्वीपीय देशों की बैंकिंग गोपनीयता अच्छी होती है और लेनदेन पर लगने वाला कर बहुत कम होता है। दुनिया में इस तरह के देश काफी हैं जो ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड से मकाऊ, बाहमास और पनामा तक फैले हैं। इस तरह की जगहों पर होने वाली वित्तीय सेवाएं पूरी तरह से कानूनी हैं। इनकी गोपनीयता ही दुनिया भर के टैक्स चोरों और अपराधियों के लिए इन्हें आकर्षक बनाती हैं, खासकर तब जब अधिकारी कमजोर हों या आंखें मूंद लें। कुल मिलाकर ये ज्यादातर मामले धन के मालिकों की पहचान छिपाने, धन के स्रोत को छिपाने, काले धन को सफेद बनाने और कर चोरी के हैं। कर बचाने की ऐसी पनाहगाह का इस्तेमाल कानूनी तरीके से भी होता है।

शेल कंपनियां कैसे करती हैं अपना कारोबार

फोनसेका का कहना है कि वो उन्हीं कंपनियों को रजिस्टर कराता है जो कर चुराने, मनी लांड्रिंग करने या अन्य गैरकानूनी काम कर रही हैं। शेल कंपनियां केवल खाली खोल की तरह होती है। वह और कुछ नहीं करती है, केवल पैसे का प्रबंधन करती हैं। नाम भी छिपाती हैं।

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