बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती के अलावा इनकी भी होती है पूजा, जानें महत्व

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती के अलावा इनकी भी होती है पूजा, जानें महत्व

By: Tanvi

Updated: 26 Jan 2020, 04:41 PM IST

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। माना जाता है कि बसंत पंचमी का दिन सभी शुभ कार्य करने के लिये शुभ मुहूर्त माने जाते हैं। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि बसंत पंचमी के रूप में मनाई जाती है।

 

बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती के अवतरण का दिन भी माना जाता है। वहीं बृज क्षेत्र में बसंत पंचमी के दिन से होली का शुभारंभ हो जाता है। चौराहों पर होलिका दहन के लिए लकड़ी एकत्र करने के बाद गुलाल उड़ाया जाता है। जो फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक उमंग के साथ लगातार चलता रहता है।

 

basant_panchami1.png

मां सरस्वती पूजन की सामग्रियां

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने के लिये अधिकांश पूजा सामग्रियां सफेद वर्ण की होती हैं। इसलिये सरस्वती पूजन में सफेद वस्त्र, सफेद चंदन, दही-मक्खन, सफेद तिल, अक्षत, श्रीफल और तिल के लड्डू का उपयोग करें। मां सरस्वती की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में अज्ञानरुपी अंधकार दूर होता है और ज्ञान का प्रकाश खुलता है।

मां सरस्वती की ऐसे करें पूजा

इस दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर व्यक्ति को पीले वस्त्र धारण कर कलश स्थापना करनी चाहिये। इसके बाद मां सरस्वती को सफेद फूल की माला के साथ मां को सिंदूर व अन्य सफेद श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ायें। वहीं माता के चरणों में गुलाल अर्पित कर उन्हें मिठाई या खीर का भोग लगायें। इसके बाद अंत में यथाशक्ति ''ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः '' का जाप करें।

 

basant_panchami3.jpg

अक्षर ज्ञान कराने का शुभ दिन

बसंत पंचमी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का दिन होने से बसंत पंचमी के दिन छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान कराया जाता है। स्कूलों एवं शिक्षा संकायों में सरस्वती पूजन किया जाता है तथा ज्ञान वृद्धि के लिए कामना की जाती है। वहीं गुरुद्वारों में इस दिन राग वसंत में गुरुवाणी के कीर्तन द्वारा श्रद्धालुओं में भावना जागृत की जाती है।

कामदेव और रति की पूजा का दिन

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के अलावा राधा-कृष्ण, कामदेव और देवी रति की भी पूजा की जाती है। इस दिन इन चारों देवों की पूजा का विधान है। क्योंकि बसंत पंचमी के दिन ही कामदेव और रति ने पहली बार मानव ह्रदय में प्रेम और आकर्षण का संचार किया था। इस दिन कामदेव और रति के पूजन का उद्देश्य दांपत्त्य जीवन को सुखमय बनाना है। माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में पारिवारिक प्रेम, स्नेह, प्रसन्नता आदि में वृद्धि होती है। इनके साथ-साथ भगवान गणेश, सूर्यदेव, भगवान विष्णु व शिव-पार्वती की भी पूजा अर्चना करें।

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned