वजह हैरान करने वाली है! यहां पर दिवाली का जश्न अभी बाकी है

हिमाचल प्रदेश के गिरिपार इलाके, शिमला के कुछ गांव और कुल्लू के निरमंड में बूढ़ी दिवाली मनाई जाती है।

Devendra Kashyap

24 Nov 2019, 02:44 PM IST

पूरे भारतवर्ष में भगवान राम का वनवास खत्म होने के बाद घर वापसी की खुशी में दिवाली मनाई जाती है, लेकिन हिमाचल प्रदेश के सिरमौर के ट्रांसगिरी क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली मनाई जाती है। अब आप सोच रहे होंगे कि कुछ दिन पहले ही तो छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली मनाई गई थी, फिर ये बूढ़ी दिवाली क्या है?


दरअसल, हिमाचल प्रदेश के गिरिपार इलाके, शिमला के कुछ गांव और कुल्लू के निरमंड में बूढ़ी दिवाली मनाई जाती है। इस साल बूढ़ी दिवाली 26 नवंबर को मनाया जाएगा। वहीं निरमंड का ऐतिहासिक बूढ़ी दिवाली 26 से 29 नवंबर तक धूमधाम से मनाया जाएगा। बूढ़ी दिवाली मनाने के पीछे जो तर्क दिए जाते हैं, उसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे।


बूढ़ी दिवाली मनाने के पीछे तर्क दिया जाता है कि यहां रहने वाले लोगों को भगवान राम के अयोध्या पहुंचने की खबर एक महीने देरी से मिली थी। यहां के रहने वाले लोग जब यह सुखद समाचार सुना तो खुशी से झूम उठे और उन्होंने देवदार और चीड़ की लकड़ियों की मशालें जलाकर अपनी खुशी जाहिर की थी।


बताया जाता है कि तब ही से यहां पर बूढ़ी दिवाली मनाने की परंपरा चली आ रही है। यहां के रहने वाले लोग आज भी दिवाली की अगली अमावस्या अर्थात अगहन महीने की अमावस्या तिथि को बूढ़ी दिवाली मनाते हैं। गिरिपार के लोग बूढ़ी दिवाली को 'मशराली' के नाम से मनाते हैं।

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Devendra Kashyap
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