ये हैं गणेश पूजा के शुभ मुहूर्त, आप भी फायदा उठाएं

Sunil Sharma

Publish: Aug, 25 2017 12:36:00 (IST)

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ये हैं गणेश पूजा के शुभ मुहूर्त, आप भी फायदा उठाएं

चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि रात्रि ८.३२ तक, तदुपरान्त पंचमी पूर्णा संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी

चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि रात्रि ८.३२ तक, तदुपरान्त पंचमी पूर्णा संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। चतुर्थी तिथि में शत्रुमर्दन, बंधन, अग्निविषादिक असद् कार्य सिद्ध होते हैं। शुभ कार्य वर्जित है। पर किसी शुभकार्यारम्भ के समय लग्न में केन्द्र या त्रिकोण स्थान में कोई शुभग्रह स्थित हो तो रिक्ता तिथि का दोष परिहृत हो जाता है। तब शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

नक्षत्र: हस्त ‘क्षिप्र व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र दोपहर बाद २.३६ तक, तदुपरान्त चित्रा ‘मृदु व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। हस्त नक्षत्र में यात्रा, विद्या, विवाहादि मांगलिक कार्य, गृहारम्भ व प्रतिष्ठादि कार्य और चित्रा में सभी स्थिर व कृषि विषयक कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं।

योग: शुभ नामक योग रात्रि ११.२७ तक, तदन्तर शुक्ल नामक योग रहेगा। दोनों ही नैसर्गिक शुभ योग हैं। विशिष्ट योग: रवियोग नामक शक्तिशाली शुभ योग सूर्योदय से दोपहर बाद २.३६ तक है। करण: वणिज नामकरण प्रात: ८.२९ तक, तदुपरान्त रात्रि ८.३२ तक भद्रा है। इसके बाद पुन: बवादिकरण प्रारम्भ हो जाएंगे।

शुभ विक्रम संवत् : 207४
संवत्सर का नाम : साधारण
शाके संवत् : 193९
हिजरी संवत् : 143८, मु.मास: जिलहिज-२
अयन : दक्षिणायन
ऋतु : शरद्
मास : भाद्रपद।
पक्ष : शुक्ल।

शुभ मुहूर्त: आज हस्त नक्षत्र में विपणि-व्यापारारम्भ, वाहन क्रय करना, मशीनरी प्रारम्भ करना व सगाई के शुभ मुहूर्त हैं तथा चित्रा नक्षत्र में विवाह द्विगर्त प्रदेशीय का शुभ मुहूर्त है।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से पूर्वाह्न १०.५३ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत, दोपहर १२.२९ से दोपहर बाद २.०५ तक शुभ तथा सायं ५.१६ से सूर्यास्त तक चर के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर १२.०३ से दोपहर १२.५४ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

व्रतोत्सव: साम श्रावणी कर्म, महागणपति चतुर्थी, कलंक चतुर्थी, चन्द्र दर्शन निषेध (चन्द्रास्त रात्रि ९.२९ पर जयपुर में), मेला गणेशजी मोती डूंगरी जयपुर, जैन संवत्सरी (चतुर्थी पक्ष), गणेश जन्मोत्सव प्रा. (महाराष्ट्र में) तथा सौभाग्य चतुर्थी (बंगाल) है। चन्द्रमा: चन्द्रमा रात्रि ९.०९ तक कन्या राशि में, तदन्तर तुला राशि में रहेगा। ग्रह मार्गी-वक्री: सायं ५.४० से शनिदेव मार्गी हो जाएंगे। ग्रह राशि-नक्षत्र परिवर्तन: प्रात: ८.५७ पर गुरु चित्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण में प्रवेश करेंगे।

दिशाशूल: शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल है। आज दक्षिण दिशा की यात्रा लाभदायक है। राहुकाल: प्रात: १०.३० से दोपहर १२.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारम्भ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे
आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (ठ, पे, पो, र, री) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। रात्रि ३.०९ तक जन्मे जातकों की जन्म राशि कन्या तथा इसके बाद जन्म लेने वाले जातकों की राशि तुला है। इनका जन्म रजतपाद से हुआ है। सामान्यत: ये जातक धनवान, कीर्तिवान, साहसी, उच्चपदाकांक्षी, थोड़े क्रोधी, पर बुद्धिमान, सुंदर लिखावट वाले तथा कुछ आयुर्वेद को जानने वाले भी होते हैं।

इनका भाग्योदय कुछ विलम्ब से लगभग ३२ वर्ष की आयु के पश्चात ही होता है। कन्या राशि वाले जातकों को आज पद-प्रतिष्ठा तथा कीर्ति में वृद्धि होगी। आज गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय- आज दोपहर ११.१२ से दोपहर बाद १.४५ तक का श्रेष्ठ समय है। १२.०४ से १२.५५ तक अभिजित मुहूर्त व दोपहर १२.१९ से १.४५ तक वृश्चिक लग्न का भी उत्तम समय सम्मिलित है।

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