गणेश चतुर्थी पर अपनी राशि अनुसार करें पूजा, बन जाएगी बिगड़ी बात

Sunil Sharma

Publish: Aug, 23 2017 03:05:00 (IST) | Updated: Aug, 25 2017 09:34:00 (IST)

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गणेश चतुर्थी पर अपनी राशि अनुसार करें पूजा, बन जाएगी बिगड़ी बात

श्रीगणपति महाचतुर्थी (२५ अगस्त) यानी आनंद मोदक बांटते विघ्नराज एकदंत भगवान् गणपति के जन्म-प्राकट्य का उत्सव

गणेशजी की इस गरिमा के लिए रामचरित मानस में संत तुलसीदासजी ने लिखा है। ‘महिमा जासु जान गनराऊ प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ’। कार्य के आरम्भ के समय कहा भी जाता है कि श्री गणेश करें। हठ योग में मूलाधार चक्र को गणेशजी का प्रतीक माना जाता हैं और स्वास्तिक की चार भुजाओं के कोण गणपति के ही प्रतीक हैं। गणेश में ‘गण’ का अर्थ है, ‘वर्ग समूह’ और ‘ईश’ का अर्थ है स्वामी अर्थात् जो समस्त जीव जगत के ‘ईश’ हैं वही गणेश है।

गजानन की विशेष पूजा
ज्योतिष में चतुर्थी तिथि के अधिष्ठातृ-देवता-स्वामी गौरीपुत्र भगवान् गणपति स्वयं ही हैं, अत: प्रत्येक मास में दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि को गणपति का विधिवत् पूजन करने से पुरुषों को अमोघ सिद्धि व स्त्रियों को लिए पति की लंबी आयु की प्राप्ति होती है। पुराकाल में सिंदुरासुर नामक दैत्य को मारने के कारण विजय प्राप्त होने के कारण गणेशजी को सिंदूर चढ़ाया जाता है। गणपति को सिंदूर चढ़ाने से सुख-समृद्धि व संतान की प्राप्ति होती है। जिन व्यक्तियों की जन्मपत्री में बुध ग्रह लग्नाधिपति हो या बुध की महादशा चल रही हो, उन्हें अनिवार्य रूप से गणपति का खासकर बुधवार को अभिषेक व ‘ॐ गं गणपतये नम:’ मंत्र का १०८ बार जप करना चाहिए और गजानन के बारह नामों का उच्चारण करके ही घर से बाहर निकलना चाहिए।

राशिनुसार श्री गणेश पूजा
मेष और वृश्चिक राशि वालों को मूंगे या अकीक के गणपति का पूजन करना चाहिए।
वृष तथा तुला राशि के जातकों को सफेद आक व स्फटिक से बने गणपति का आराधन करना चाहिए।
मिथुन और कन्या राशि वाले व्यक्ति सभी प्रकार के गणपति का पूजन कर सकते हैं।
कर्क व सिंह राशि वाले व्यक्तियों को पार्थिव गणेश पूजन करना चाहिए।
धनु एवं मीन राशि वाले हरिद्रा गणपति का पूजन करें तो श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है।
मकर और कुंभ राशि वाले जातक धातु से बनी गणपति की प्रतिमा का पूजन करें तो ऐसा पूजन सभी सिद्धियों को देने वाला होता है।

अपनी वाणी सिद्ध करने के लिए गणपति की प्रतिमा के सामने या बहते हुए जल में खड़े होकर गणपति मंत्र के जप करने चाहिए। दोषों से बचने के लिए इस वेदोक्त गणपति गायत्री मंत्र का नित्य जप करना चाहिए-
‘ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।।’

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