अपनी मौसी के घर जाने के लिए रथ पर सवार हुए भगवान जगन्नाथ, शुरु हुई रथयात्रा

Tanvi Sharma

Publish: Jul, 14 2018 12:47:45 PM (IST)

त्यौहार
अपनी मौसी के घर जाने के लिए रथ पर सवार हुए भगवान जगन्नाथ, शुरु हुई रथयात्रा

अपनी मौसी के घर जाने के लिए रथ पर सवार हुए भगवान जगन्नाथ, शुरु हुई रथयात्रा

पुरी में आज यानी 14 जुलाई से सालाना रथ यात्रा शुरू हो चुकी है। रथयात्रा निकलने से पहले भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए बीमार रहते हैं। यानि भगवान जगन्नाथ ज्‍येष्‍ठ मास की पूर्णिमा से अमावस्‍या तक बीमार रहते हैं और इन 15 दिनों श्री जगन्नथ जी का उपचार एक बच्चे की तरह किया जाता है। इस रिती का अंसारा कहा जाता है। लेकिन अब भगवान जगन्नाथ रथयात्र के लिए पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं और उनके भक्तों के लिए शुक्रवार भगवान जगन्नाथ के कपाट खोल दिए गए थे। आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को भगवान स्वस्थ हो जाते हैं और द्वितीया तिथि को गुंडीचा मंदिर तक भगवान की रथ यात्रा निकलती है। इस साल अमावस्या और प्रतिपदा एक ही दिन होने के कारण शुक्रवार से प्रतिपदा के उत्सव मनाए गए और आज से 9 दिनों तक चलने वाली रथ यात्रा आज सुबह 4 बजकर 32 मिनट से शुरू हुई और यह 15 जुलाई की रात 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। रथ में सवार भगवान श्री जगन्नाथ अपनी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर के लिए निकल चुके हैं।

rath yatra

यात्रा में सबसे पीछे चलते है भगवान जगन्नाथ

रथयात्रा में सबसे आगे दाऊ बलभद्रजी का रथ, उसके बाद बीच में बहन सुभद्राजी का रथ तथा सबसे पीछे भगवान जगन्नाथजी का रथ होता है। बलभद्र के रथ को ‘पालध्वज’ कहते हैं, उसका रंग लाल एवं हरा होता है। सुभद्रा के रथ को ‘दर्पदलन’ कहते हैं और उसका रंग एवं नीला होता है। वही भगवान जगन्नाथ के रथ को ‘गरुड़ध्वज’ या ‘नन्दीघोष’ कहते हैं और इसका रंग लाल व पीला होता है।

यहां जानें रथ यात्रा का महत्‍व

रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को दशावतारों के रूप में पूजा जाता है, जिनमें विष्णु, कृष्ण, वामन और बुद्ध भी शामिल हैं। जिस तरह भरत देश में हर त्यौहार का महत्व है उसी तरह पुरी की रथ यात्रा भी बेहद महत्‍वपूर्ण मानी जाती है। इस पर्व को अटूट, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। पुरी के अलावा देश और विदेशों से भी लोग भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल होने आते हैं। जगन्नाथ जी की रथ यात्रा पुरी सहित विदेशों और देश के कई शहरों में निकाली जाती है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्र का उल्लेख स्कन्दपुराण में मिलता है। इस पुराण के अनुसार पुरी तीर्थ में स्नान करने से और जगन्नाथजी का रथ खींचने से सभी तीर्थों के दर्शन का पुण्य फल प्राप्त होता है और भक्त को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि इस रथयात्रा के रथ के शिखर के दर्शन से मात्र से ही मनुष्यों के कई जन्मों के पाप कट जाते हैं।

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