Janmashtami 2019: इस दिन पड़ रही है कृष्ण जन्माष्टमी, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Janmashtami 2019: इस दिन पड़ रही है कृष्ण जन्माष्टमी, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Tanvi Sharma | Publish: Aug, 08 2019 01:47:29 PM (IST) | Updated: Aug, 08 2019 01:50:19 PM (IST) त्यौहार

Janmashtami 2019: इस दिन पड़ रही है कृष्ण जन्माष्टमी, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

कृष्ण जन्माष्टमी ( Krishna Janmashtami 2019 ) का पर्व आने वाला है, जो कि इस साल 24 अगस्त को शनिवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन कृष्ण भक्त देश के कोने कोने में उत्सव की तैयारी करने लगते हैं। कृष्ण भक्ति के लिए यह खास दिन माना जाता है। भगवान श्री कृष्ण का इस दिन जन्मोत्सव मनाया जाता है। क्योंकि भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए इस हर साल इस तिथि को कृष्ण जी का जन्मदिन जन्माष्टमी ( Janmashtami 2019 ) के रूप में बड़ी धूम-धाम से आस्था के साथ मनाया जाता है। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं और रात 12 बजे कृष्ण जी की आरती करते हैं।

 

krishna janmashtami 2019

कृष्ण जन्माष्टमी पूजन का शुभ मुहूर्त ( Janmashtami Shubh Muhurt )

तिथि: 24 अगस्‍त, शनिवार
पूजा मुहूर्त: रात 12:01 बजे से 12:45 बजे तक
अवधि: 45 मिनट

ऐसे करें जन्माष्टमी व्रत ( janmashtami vrat )

माना जाता है कि जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण की पूजा करने से सभी दुखों व शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति व प्रेम आता है। जिन महिलाओं को संतान सुख नहीं मिल पाता उनके लिए इस दिन कृष्ण की सच्चे मन से पूजा करने पर कृष्ण प्रसन्न होते हैं व उनकी संतान संबंधित सभी विपदाएं दूर हो कर देते हैं। श्री कृष्ण जैसी दिव्य संतान प्राप्त करने के लिए इस दिन विशेष पूजा अर्चना भी की जाती है।

 

krishna janmashtami 2019

कृष्णा जन्माष्टमी पूजा विधि ( janmashtami puja vidhi )

1. जन्माष्टमी का व्रत के लिए जातक को सूबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। उसके बाद हाथ में जल, फल और पुष्प लेकर संकल्प करके मध्यान्ह के समय काले तिलों के जल से स्नान (छिड़ककर) कर देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाएं। अब इस सूतिका गृह में सुन्दर बिछौना बिछाकर उस पर शुभ कलश स्थापित करें। कलश स्थापना चूंकि हर पूजा के पहले महत्वपूर्ण मानी जाती है, इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण जी को स्तनपान कराती माता देवकी जी की मूर्ति या सुन्दर चित्र की स्थापना करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा और लक्ष्मी जी इन सबका नाम क्रमशः लेते हुए विधिवत पूजन करें। अंत में आप अपना व्रत खोल सकते हैं।

जन्‍माष्‍टमी महत्‍व ( janmashtami mahatva )

भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जो त्योहार मनाया जाता है, उसे कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जानते हैं। अष्टमी के दिन कृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए इसे कृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है। पौराणिक कहानियों के अनुसार श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को हुआ था। इसलिए भाद्रपद मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यदि रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग हो तो वह और भी शुभ माना जाता है।

 

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