केरल की संस्कृति और खूबसूरती का महत्वपूर्ण हिस्सा है ओणम का त्यौहार, जानें क्यों है ये खास

केरल की संस्कृति और खूबसूरती का महत्वपूर्ण हिस्सा है ओणम का त्यौहार, जानें क्यों है ये खास

Tanvi Sharma | Publish: Aug, 05 2018 03:53:02 PM (IST) त्यौहार

केरल की संस्कृति और खूबसूरती का महत्वपूर्ण हिस्सा है ओणम का त्यौहार, जानें क्यों है ये खास

हमारे देश में कई धर्म और उनसे जुड़ी कई तरह की संस्कृतियां भी हैं। देश में हर राज्य की एक अलग संस्कृति है। हम कई संस्कृति और इनसे जुड़े कई त्यौहारों को साथ मिलकर मनाते हैं। कुछ त्यौहार ऐसे हैं जिन्हें पूरे देश में मनाया जाता है तो कुछ त्यौहार ऐसे हैं जिन्हें राज्य स्तर पर मनाया जाता है। राज्य स्तर पर मनने वाले त्यौहार उक्त राज्य में प्रमुखता से मनाया जाता है। इसी तरह ओणम का त्यौहार केरल में बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। ओणम का त्यौहार केरल में काफी बड़े स्तर पर मनाया जाता है, इस दौरान केरल राज्य बहुत ही सुंदर नजर आता है। यह त्यौहार केरल की खूबसूरती का दर्शाता है। ओणन का उत्सव 10 दिनों तक मनाया जाता है। जिसमें चारों और फूल और हरियाली नजर आती है। इस समय किसान व उनके परिवार फसल पकने की खुशी में अपने घरों के आंगन को खूबसूरत रंगोली सजाते हैं। इस साल यह त्यौहार 15 अगस्त 2018 से 27 अगस्त 2018 तक मनाया जाएगा। आइए जानते हैं ओणन के बारे में कुछ खास बातें और क्यों मनाया जाता है त्यौहार....

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पाताल लोक से आते हैं राजा

ओणम को लेकर मान्यता है की साल में एक बार यानी इस समय राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने पाताल लोक से आते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा महाबली ने भगवान विष्णु से साल में एक दिन अपनी प्रजा से मिलने के लिए धरती पर आने की अनुमति मांगी थी और भगवान विष्णु ने राजा महाबली को इसकी अनुमति दे दी थी। उसके बाद से ही हर साल एक दिन राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने के लिए पाताल लोक से धरती पर आते हैं। इस दिन राज्य के लोग उनका भव्य स्वागत करते हैं। इसके लिए वे अपने घरों को रंगोली से सजाते हैं। कई तरह के पकवान भी बनाते है। यह त्यौहार केरल के अलावा भी कई जगहों पर मनाया जाता है।

 

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पोक्कलम है ओणम उत्सव में आकर्षण का केंद्र

फूलों से बनी रंगोली को मलयाली में पोक्कलम कहा जाता है। ओणम उत्सव के समय महिलाएं अपने घर के आंगन में फूल की पंखुड़ियों से खूबसूरत पोक्कलम यानी फूलों की रंगोलिया बनाती हैं। इसके लिए केरल की महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता है। आंगन में बनी खूबसूरत फूलों की रंगोली लोगों को अपनी और आकर्षित करती है वहीं खूबसूरती भी फैलाती है। यह पोक्कलम उत्सव का महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र भी होती है।

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त्यौहार के दौरान मनाई जाती है खाल प्रतियोगिता

जैसे ही ओणम नजदीक होता है सभी लोग अपने-अपने घरों में तैयारियां करना शुरु कर देता है। केरल का यह पर्व बड़ेे हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है। इस प्रसिद्ध त्यौहार के लिए कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। यहां ओणम के दौरान लोग अपने दोस्तों व करीबी रिश्तेदारों को खाने पर बुलाते हैं। इस आयोजन व रिवाज को लोग ओणम लंच कहते हैं। इन स्वादिष्ट पकवानों में लगभग 27 तरह के दक्षिण भारतीय पकवान होते हैं। जिनमें स्पेशल पूजा वाली खीर (आडाप्रधावन) के साथ खिचड़ी करेला, खिचड़ी बीटरुट, अवियल, पुलिस्सेरी, दाल, साम्भर, दही, घी, आमदूध और चावल का खीर, केला, केला चिप्स, पापड़ सहित कई चीज़ें शामिल होती है। इन सभी पकवानों को एक ही केले के पत्ते पर रखकर खाया जाता है। 10 दिन के उत्सव के दौरान कई तरह के खेल-कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इस दौरान केरल राज्य की खूबसूरती देखते ही बनती है।

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