कूर्म जयंती 18 मई : भगवान कच्छप की पूजा के बाद इस मंत्र का जप करेगा हर मनोकामना पूरी, बना देगा मालामाल

कूर्म जयंती 18 मई : भगवान कच्छप की पूजा के बाद इस मंत्र का जप करेगा हर मनोकामना पूरी, बना देगा मालामाल

Shyam Kishor | Publish: May, 17 2019 01:46:27 PM (IST) त्यौहार

लक्ष्मी जी को सबसे अधिक प्रिय हैं भगवान कच्छप रूप, इनकी पूजा करने वाले पर शीघ्र प्रसन्न हो जाती है

वैशाख मास की पूर्णिमा 18 मई 2019 दिन शनिवार को भगवान विष्णु के कूर्म (कच्छप) अवतार यानी की कूर्म जयंती का पर्व मनाया जायेगा। हिंदू धार्मिक मान्यता अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु ने कूर्म(कछुए) का अवतार लिया था और मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण कर समुद्र मंथन में देवताओं एवं दानवों की विशेष सहायता की थी। इस भगवान के कच्छप रूप की पूजा कर उनके मंत्र का जप करने से मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न हो जाती है और उनकी कृपा से व्यक्ति धन धान्य से परिपूर्ण हो जाता है।

 

कच्छप अवतार की पौराणिक कथा

हिन्दू धर्म के ग्रंथों में वर्णित पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री हरि विष्णुजी ने देवताओं के आवाहन पर कच्छप रूप धारण कर समुद्र मंथन के समय अपने पीठ पर मंदराचल पर्वत को धारण किया था तभी समुद्र मंथन का प्रयोजन संभव हो पाया था। कथानुसार दैत्यराज बलि के शासन में असुर दैत्य व दानव बहुत शक्तिशाली हो गए थे और उन्हें दैत्यगुरु शुक्राचार्य की महाशक्ति भी प्राप्त थी, जिस कारण देवता असुरों को पराजित नहीं कर पा रहे थे। साथ ही एक बार देवराज इन्द्र को किसी कारण से नाराज़ हो महर्षि दुर्वासा ने श्राप देकर श्रीहीन कर दिया था जिस कारण इन्द्र शक्तिहीन हो गये थे। इसी अवसर का लाभ उठाकर दैत्यराज बलि नें तीनों लोकों पर अपना राज्य स्थापित कर लिया और इन्द्र सहित सभी देवतागण यहां वहां भटकने लगे।

 

इस समस्या के समाधान के लिए सभी देवता प्रजापिता ब्रह्मा जी के पास जाकर प्रार्थना करते हैं कि वह उन्हें इस संकट से बाहर निकालें। देवताओं के साथ ब्रह्मा जी भी इस संकट से मुक्ति के लिए भगवान श्री विष्णु जी के पास जाकर सहायता मांगते हैं। देवगणों की विपदा सुनकर भगवान विष्णु ने उन्हें दैत्यों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने के कि सलाह दी। क्षीर सागर को मथ कर देवता उसमें से अमृत निकाल कर उस अमृत का पान कर लें और अमृत पीकर सभी देवगण अमर होकर दैत्यों की मारने में शक्तिशाली बन जायेंगे। समुद्र मंथन से निकले अमृत को पीकर सभी देवता अमर हो गये और उन्होंने असुरों का अंत कर पुनः स्वर्ग लोक प्राप्त किया।

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इस मंत्र का करें जप

शास्त्रों नें इस दिन की बहुत महत्ता बताई गई है, इस दिन से निर्माण संबंधी कार्य शुरू किया जाना बेहद शुभ माना जाता है। कूर्म जयंती के दिन वास्तु दोष के विशेष उपाय भी किये जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के कूर्म (कछुए) रूप का षोडषोपचार पूजन करने के बाद नाचे दिये गये मंत्रों का जप करने से मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होकर व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी कर देती हैं।

 

कूर्म मंत्र

।। ॐ कूर्माय नम: ।।
।। ॐ हां ग्रीं कूर्मासने बाधाम नाशय नाशय ।।
।। ॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाय नम: ।।
।। ॐ ह्रीं कूर्माय वास्तु पुरुषाय स्वाहा ।।

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