महाशिवरात्रि 2019: शिव मंदिर में जाकर सबसे पहले करें ये काम, चुटकियों में पूरी होगी मनोकामना

महाशिवरात्रि 2019: शिव मंदिर में जाकर सबसे पहले करें ये काम, चुटकियों में पूरी होगी मनोकामना

Tanvi Sharma | Publish: Feb, 24 2019 03:33:40 PM (IST) त्यौहार

शिव मंदिर में जाकर सबसे पहले करें ये काम, चुटकियों में पूरी होगी मनोकामना

महाशिवरात्रि पर देवों के देव महादेव की पूजा की जाती है। इस दिन भक्त उनसे अपनी मुरादों को पूरा करने का वरदान मांगते हैं। शिवरात्रि के दिन कुछ लोग घर में ही शिवलिंग बनाकर पूजा करते हैं, वहीं कुछ लोग मंदिर में जाकर उनसे अपनी इच्छापूर्ति का आशीर्वाद लेने जाते हैं। मंदिर में जाने शिव अभिषेक किया जाता है तो कोई बेलपत्र पंचामृत से शिव जी को स्नान कराकर उन्हें मनाता है। इन्हीं सब चीज़ों के बीच एक ऐसा उपाय भी है जिससे शिव जी तक आपकी सभी मनोकामना जल्द पहुंचती है। जी हां, इस एक अद्भुत उपाय से शिव जी आपकी मनोकामना जल्दि सुनकर उसे पूरे करेंगे। तो आइए जानते हैं क्या है वो उपाय.....

mahashivratri 2019

सभी जानते हैं भगवान शिव का वाहन नंदी है और हर शिव मंदिर में शिव के साथ नंदी विराजमान रहता है। शास्त्रों के अनुसार अगर मंदिर में जाकर नंदी के कान में चुपके से कोई मन्नत मांगी जाए तो ये मनोकामना जल्द ही पूरी हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं शिव तक मनोकामना पहुंचाने के लिए नंदी के कान में क्यों कही जाती है, तो आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण.....

भगवान शिव तपस्वी हैं और वे हमेशा समाधि में रहते हैं। ऐसे में उन तक हमारे मन की बात नहीं पहुंच पाती। इस स्थिति में नंदी ही हमारी मनोकामना शिवजी तक पहुंचाते हैं। इसी मान्यता के चलते लोग नंदी को लोग अपनी मनोकामना कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिलांद नाम के एक मुनि थे, जो ब्रह्मचारी थे। वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने उनसे संतान उत्पन्न करने को कहा। शिलांद मुनि ने संतान भगवान शिव की प्रसन्न कर अयोनिज और मृत्युहीन पुत्र मांगा। भगवान शिव ने शिलाद मुनि को ये वरदान दे दिया। एक दिन जब शिलांद मुनि भूमि जोत रहे थे, उन्हें एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा।

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एक दिन मित्रा और वरुण नाम के दो मुनि शिलाद के आश्रम आए। उन्होंने बताया कि नंदी अल्पायु हैं। यह सुनकर नंदी महादेव की आराधना करने लगे। प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और नंदी का अपना गणाध्यक्ष भी बनाया। भगवान शिव और पार्वती ने सभी गणों के समक्ष गणों के अधिपति के रूप में नंदी का अभिषेक करवाया। उसके बाद ही भगवान शिव ने नंदी को वरदान दिया कि जहां उनका निवास होगा वहां नंदी भी विराजमान होंगे और जो भी व्यक्ति नंदी की पूजा कर उनके कान में अपनी मनोकामना कहेगा उसकी वो मनोकामना पूरी होगी। इसी वजह से अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए लोग नंदी के कान में अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं और नंदी उनकी कामना को पूरी करते हैं।

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