13 अगस्त : सावन के आखिरी मंगलवार, मां मंगला गौरी की कर लें ये पूजा, विवाह, नौकरी, व्यापार और धन की हर बाधा हो जायेगी दूर

13 अगस्त : सावन के आखिरी मंगलवार, मां मंगला गौरी की कर लें ये पूजा, विवाह, नौकरी, व्यापार और धन की हर बाधा हो जायेगी दूर

Shyam Kishor | Publish: Aug, 12 2019 04:51:22 PM (IST) त्यौहार

mangla gauri vrat : इस दिन मां मंगला गौरी का पूजन करने से विवाह, नौकरी, व्यापार और धन संबंधिक सभी तरह की हर बाधाएं दूर हो जाती है। जानें पूजा विधि और महत्व।

भगवान शिव की आराधना का पवित्र सावन मास खत्म होने वाला है और 13 अगस्त 2019 का मंगलवार सावन मास का आखिरी मंगलवार है जिस दिन मां मंगला गौरी ( mangla gauri vrat ) के निमित्त व्रत रखकर विशेष पूजा आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है इस दिन मां मंगला गौरी का पूजन करने से विवाह, नौकरी, व्यापार और धन संबंधिक सभी तरह की हर बाधाएं दूर हो जाती है। जानें पूजा विधि और महत्व।

 

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मां मंगला गौरी की पूजा औऱ व्रत अविवाहितों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। अगर सावन मास में पड़ने वाले मंगलवार को अविवाहित लड़के-लड़कियां माता मां मंगला गौरी (पार्वती) की पूजा विधि-विधान से करे तो शीघ्र ही उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है। सावन में इस दिन व्रत-उपवास करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होने लगती है। इस दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति व संतान की लंबी उम्र एवं सुखी जीवन की कामना के लिए खासतौर पर इस व्रत को करती है।

 

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सावन मास के अंतिम मंगलवार को मां मंगला गौरी का विशेष पूजन करने से विवाह में आ रही रूकावटे दूर हो जाती है, नौकरी संबंधित परेशानी से मुक्ति मिलती है, व्यापार में लाभ होने लगता है एवं धन, मान-सम्मान में वृद्धि भी होने लगती है।

 

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ऐसे करें मां मंगल गौरी व्रत और पूजन

1- इस व्रत को करने वाले इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ-सुथरे धुले हुए वस्त्र पहनकर व्रत करने का संकल्प लें।
2- व्रती इस दिन एक ही समय अन्न ग्रहण करके पूरे दिन मां पार्वती की पूजन, आराधना करें।
3- मां मंगला गौरी (पार्वतीजी) का एक चित्र अथवा प्रतिमा के सामने हाथ में थोड़ा सा जल व अक्षत लेकर अपनी मनोकामना रखते हुए संकल्प लें।

 

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4- संकल्प लेने के बाद में मां मंगला गौरी के सामने आटे का बड़ा दीपक बनाकर उसमें गाय का घी डालकर रूई की 16 बत्तियां लगाकर जलाएं। 16 बत्तियों वाला दीपक जलाकर मां मंगला गौरी का षोडशोपचार विधि से श्रद्धापूर्वक पूजन करें।

5- पूजन के बाद ये वस्तुएं- 16 मालाएं, लौंग, सुपारी, इलायची, फल, पान, लड्डू, सुहाग की सामग्री, 16 चूड़ियां, मिठाई, 5 प्रकार के सूखे मेवे, 7 प्रकार के अनाज (जिसमें गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर) आदि थोड़े थोड़े मां मंगला गौरी को चढ़ाएं।

6- मां मंगला गौरी के इस मंत्र का जप सुबह एवं शाम को 108-108 बार जप करें।

मंत्र

श्वेते वृषे समारुढ़ा, श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरीं शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदया।।

उपरोक्त विधि विधान से पूजा अर्चना करने पर मां शिवप्रिया मंगला गौरी सावन मास में प्रसन्न होकर सभी मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद प्रदान करती है।

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