Navratri: नवरात्रि के दूसरे दिन छात्र करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, मिलेगा सफलता का आशीर्वाद

Navratri: नवरात्रि के दूसरे दिन छात्र करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, मिलेगा सफलता का आशीर्वाद

Tanvi Sharma | Publish: Apr, 07 2019 11:50:38 AM (IST) | Updated: Apr, 07 2019 11:50:39 AM (IST) त्यौहार

Navratri: नवरात्रि के दूसरे दिन छात्र करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, मिलेगा सफलता का आशीर्वाद

नवरात्रि प्रारंभ हो चुकी है और नौं दिनों तक मां की आराधना में भक्त लीन रहते हैं। इन नौ दिनों में देवी के नौ रुपों की आराधना करने का विधान है और सभी रुपों के अनुसार मां अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती है। मां दुर्गा को आदिशक्ति व सभी पापों का नाश करने वाली कहा जाता है। इन सभी रुपों में देवी के वाहन अलग-अलग है इसके साथ ही उनके रुप और अस्त्र-शस्त्र भी अलग-अलग हैं।

maa brahmacharini

आज नवरात्रि का दूसरा दिन है। आज के दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरुप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी सुख शांति व सफलता का का आशीर्वाद देती हैं। मां पार्वती ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण मां के रूप को ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है। नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना विद्यार्थ‍ियों को जरूर करना चाहिए। इस दिन पीले या सफेद वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए। विद्यार्थी इस दिन मां की पूजा आराधना के साथ-साथ मंत्रों का जाप भी करेंगे तो मिलेगी अपार सफलता...

मां का करें इस मंत्र से जाप

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

maa brahmacharini

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में इन चीज़ों का रखें ध्यान

1. मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के समय पीले या सफेद वस्त्र पहनें।

2. मां को सफेद वस्तुएं अर्पित करें जैसे- मिश्री, शक्कर या पंचामृत।

3. 'स्वाधिष्ठान चक्र' पर ज्योति का ध्यान करें या उसी चक्र पर अर्ध चन्द्र का ध्यान करें।

4. मां ब्रह्मचारिणी के लिए "ऊं ऐं नमः" का जाप करें और जलीय और फलाहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

ब्रह्मचारिणी की व्रत कथा

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी का जन्म हिमालय राज पर्वत के घर हुआ था। जिनकी माता का नाम मैना था। एक दिन की बात है। एकबार नारदजी से हिमालय राज ने कन्या के भविष्य के बारे में जानना चाहा तब नारद जी ने कन्या के वैवाहिक जीवन में अवरोध की बताया था। फिर मुनि श्री नारद जी ने कन्या के वैवाहिक जीवन की सुगमता व अन्य समस्याओं के निवारण हेतु व्रत, तप करने के उपाय भी बताए। अर्थात नारद जी के कहे अनुसार कन्या व्रत व तपस्या में लीन हुई और हजारों वर्ष तक समस्त देव और ब्रह्मदेव की आराधना की। मां के द्वारा की गई तपस्या का उल्लेख गोस्वामी तुलसी दास ने भी श्रीराम चरित्र मानस में भी किया है।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned