निर्जला एकादशी पर बन रहा शुभ संयोग, श्री हरी को चढ़ाएं काले तिल, जल्द पूरी होगी मनोकामना

निर्जला एकादशी पर बन रहा शुभ संयोग, श्री हरी को चढ़ाएं काले तिल, जल्द पूरी होगी मनोकामना

Tanvi Sharma | Updated: 12 Jun 2019, 01:58:44 PM (IST) त्यौहार


निर्जला एकादशी पर बन रहा शुभ संयोग, श्री हरी को चढ़ाएं काले तिल, जल्द पूरी होगी मनोकामना

चौबीस एकादशी में से एक निर्जला एकादशी का अपना अलग ही महत्व है। हर साल जयेष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। इस बार 13 जून, गुरुवार के दिन एकादशी पड़ रही है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा व कथा की जाती है। वहीं पड़ित रमाकांत मिश्रा बताते हैं कि इस बार निर्जला एकदाशी का व्रत व पूजा करने पर कई गुना फल की प्राप्ति होगी। क्योंकि गुरुवार का कारक ग्रह गुरु है, इस दिन भगावन विष्णु यानी बृहस्पति की पूजा की जाती है और एकादशी के दिन भी भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। तो ऐसे में गुरूवार के दिन एकादशी पड़ना बहुत ही श्रेष्ठ है।

nirjala ekadashi

भीम ने किया था निर्जला एकादशी व्रत

इसे निर्जला, पांडव और भीमसेनी एकादशी कहा जाता है। महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था। इस दिन निर्जल रहकर यानी बिना पानी पिए व्रत किया जाता है। गुरुवार और एकादशी का योग होने से इसका महत्व काफी अधिक बढ़ गया है। पंडित जी के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा की जाए तो भाग्य का पूरा साथ तो मिलेगा ही साथ ही आपकी हर मनोकामना भी पूरी होगी। वहीं जिन जातकों की कुंडली में गुरू की स्थिति शुभ नहीं है। वे इस दिन कुछ उपाय भी कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस दिन क्या करें....

एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंत्र का करें जाप
- ऊँ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।

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1. इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनें।
2. घर के मंदिर में सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा करें।
3. इसके बाद भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी का आवाहन कर दोनों की पूजा करें।
4. भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को बैठने के लिए आसन दें और उसके बाद समस्त देवी-देवताओं की पूजा करें।
5. भगवान को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण और फिर यज्ञोपवित (जनेऊ) पहनाएं। पुष्पमाला पहनाएं।
6. सुगंधित इत्र अर्पित करें। तिलक करें। तिलक के लिए अष्टगंध का प्रयोग करें।
7. धूप और दीप जलाएं। भगवान विष्णु को तुलसी दल विशेष प्रिय है। तुलसी दल अर्पित करें।
8. भगवान विष्णु की पूजा में काले तिल विशेष रूप से चढ़ाएं। काले तिल से बना भोग अर्पित करें।
9. अपनी श्रद्धानुसार के घी या तेल का दीपक जलाएं और भगवान को नेवैद्य अर्पित करें।
10. इसके बाद भगावन विष्णुजी की पूज करें और मंत्र का जाप 108 बार करें।
11. जाप के बाद एकादशी व्रत कथा सूनें और आरती करें।
12. अंत में भगावन से पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।

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