काशी में आज से होगी रंगभरी होली की शुरुआत

काशी में आज से होगी रंगभरी होली की शुरुआत

By: Shyam

Published: 06 Mar 2020, 10:49 AM IST

आज 6 मार्च फागुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से भगवान शिव की पावन नगरी काशी में रंभभरी होली का आरंभ हो रहा है। रंगभरी होली की यह उत्सव होली पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक मनाया जाएगा। काशी वासी के शिव भक्तों की मान्यता है कि आज ही के दिन माता पार्वती एवं शिव जी विवाह के बाद पहली बार पवित्र काशी नगरी में प्रवेश किया था। तभी से काशी में रंगभरी होली उत्सव मनाने का आरंभ हुआ है।

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फाल्गुन मास की इस एकादशी के दिन काशी नगरी में बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार करने के साथ ही होली उत्सव आरंभ हो जाता है। धार्मिक प्राचीन मान्यतानुसार रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव एवं माता पार्वती अपने विवाह के बाद सबसे पहले काशी नगरी में ही आएं थे। तभी से इस एकादशी तिथि से फाल्गुन पूर्णिमा होली पर्व तक 6 दिवसीय रंभभरा होली महापर्व मनाया जाने लगा।

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रंगभरी ग्यारस के दिन ऐसे पूजन करें-

ग्यारस के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत व पूजा का संकल्प लें। घर से एक पात्र में जल भरकर शिव मंदिर जाएं। अबीर, गुलाल, चन्दन और बेलपत्र भी साथ ले जाएं। पहले शिवलिंग पर चन्दन लगाएं, फिर बेल पत्र और जल अर्पित करें। फिर अबीर और गुलाल अर्पित करते हुए धन प्राप्ति की कामना करें।

काशी में आज से होगी रंगभरी होली की शुरुआत

रंगभरी ग्यारस के दिन इस उपाय से विवाह बाधा होगी दूर-

रंगभरी एकादशी के दिन उपवास रखें। सूर्यास्त के बाद भगवान शिव और पार्वती की संयुक्त पूजा करें। पूजा के बाद उनको गुलाबी रंग का अबीर अर्पित करें। सुखद वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें।

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रंगभरी ग्यारस के दिन निराहार या फलाहार उपवास रखें। मध्य दोपहर या मध्य रात्रि के समय भगवान शिव की विशेष पूजा करें। भगवान शिव के समक्ष दीपक जलाएं, उन्हें हरे रंग का अबीर अर्पित करें। कम से कम तीन माला "नमः शिवाय" पंचक्षारी मंत्र का 3 माला जप करें।

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रंगभरी ग्यारस के दिन इस उपाय रोग होते हैं ठीक-

रोगी या उनके परिजन रंगभरी एकादशी के दिन मध्य रात्रि में शिव जी की पूजा करें। शिव जी को जल और बेल पत्र समर्पित करें। इसके बाद लाल, पीला और सफ़ेद रंग का अबीर शिव जी को अर्पित करें। फिर "ॐ हौं जूं सः" बीच मंत्र की 11 माला का जप रुद्राक्ष की माला से करें।
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