Shani jayanti : आज जरुर करें ये पाठ, शनि दोषों से जल्द मिलेगी मुक्ति

शनिदेव को प्रकोपों व कष्टों को कम करने के लिए शनि जयंती पर करें ये उपाय

Tanvi Sharma

June, 0311:12 AM

सभी ग्रहों में शनिदेव को न्यायाधीश की उपाधि दी गई है। कहा भी जाता है की शनिदेव हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इसलिए शनि के नाम पर सभी भयभीत हो जाते हैं। खासकर वे लोग जिन पर शनि की महदशा, शनि की साढ़ेसाती, शनि ढैय्या या शनि की महादशा से पीड़ित हैं। लेकिन ज्योतिषशास्त्र में हर चीज़ का हल है, जिसके अनुसार शनिदेव को प्रकोपों व कष्टों को कम करने के लिए शनि जयंती पर दशरथकृत शनि स्तोत्र करते हैं उन्हें शनि दोषों से जल्द मुक्ति मिलती है और शनिदेव प्रसन्न भी होते हैं। इस पाठ को नियमित रूप से करने से भी लाभ मिलता है। आइए पढ़ते हैं शनि स्त्रोत पाठ...

shani jayanti 2019

दशरथकृत शनि स्तोत्र

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।

नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।

नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च।।

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।

तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।

देवासुरमनुष्याश्च सिद्घविद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।

प्रसाद कुरु मे देव वाराहोऽहमुपागत।
एवं स्तुतस्तद सौरिग्र्रहराजो महाबल:।।

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